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अमेरिका में गांधी और मार्टिन लूथर की विरासत के लिए विधेयक पारित, भारतवंशी उत्साहित

Fri, 31 Jul 2020 04:52 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 31 Jul 2020 04:52 AM IST
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US Congressional committee passes Bill to push legacies of Mahatma Gandhi, Martin Luther King Jr
महात्मा गांधी - फोटो : फाइल फोटो

अमेरिकी संसद की प्रमुख समिति ने महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर की विरासतों का प्रचार करने के लिए एक विधेयक को पारित कर दिया है। यह विधेयक नागरिक अधिकारों के पैरोकार जॉन लेविस द्वारा लिखा गया है। भारतवंशी सांसद एमी बेरा द्वारा अनुमोदित ‘गांधी-किंग एक्सचेंज एक्ट’ को सदन की विदेश मामलों की समिति ने पारित किया। इसे लेकर भारतवंशियों में उत्साह है।

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इस विधेयक में महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर के काम और विरासतों का अध्ययन करने के लिए अमेरिका तथा भारत के बीच आदान-प्रदान की पहल करने का प्रावधान है। बेरा ने कहा, ‘जॉन लेविस न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनियाभर में नागरिक अधिकारों के नायक थे।
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उन्होंने सभी के लिए मानवाधिकार, समानता, न्याय तथा लोकतंत्र के पक्ष में संघर्ष किया। गांधी और डॉ. किंग की तरह कांग्रेस सदस्य लेविस ने अहिंसा के अपने कामों के जरिए दुनिया को आकार दिया और उनकी जीवन गाथा पूरे इतिहास में गूंजेगी।’
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इस विधेयक के पारित होने से अमेरिका के विदेश मंत्रालय को भारत सरकार के साथ मिलकर दोनों देशों के शोधार्थियों के लिए वार्षिक शैक्षिक मंच स्थापित करने का अधिकार मिल जाएगा। यह शैक्षिक मंच मोहनदास करमचंद गांधी और मार्टिन लूथर किंग जूनियर की विरासतों पर केंद्रित होगा।

भारत से प्रभावित थे विधेयक बनाने वाले लेविस

अमेरिका में पारित विधेयक को लिखने वाले नागरिक अधिकारों के पैरोकार जॉन लेविस ने डॉ. किंग की भारत यात्रा की 50वीं वर्षगांठ पर भारत में एक प्रतिनिधिमंडल का 2009 में नेतृत्व किया था।

इस यात्रा से प्रेरित होकर उन्होंने संघर्ष के समाधान की कोशिशों और मौजूदा नीति में बदलावों के लिए गांधी और डॉ. किंग जूनियर के सिद्धांतों को लागू करने के मकसद से इस विधेयक को तैयार किया। उनका बीती 17 जुलाई को 80 साल की उम्र में निधन हो गया था।

अमेरिकी स्कूलों में पढ़ाए जाएंगे गांधी
इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद अब दोनों देशों की सरकार की ओर से राष्ट्रीय पाठ्यक्रम में दोनों हस्तियों के बारे में पढ़ाया जाएगा। इसके बाद अब गांधी दर्शन के लिए स्कूलों में अध्ययन का रास्ता बन गया है। अब अमेरिका के बच्चे भी जान सकेंगे कि अहिंसा को अपनी नीतिगत बातें एवं सत्य बातें मनवाने के लिए एक अस्त्र के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

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