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प. एशिया संकट: होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी बरकरार, ईरान से सीजफायर पर भी सस्पेंस; वैश्विक बाजार में बढ़ा तनाव

Sun, 31 May 2026 03:23 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, सिंगापुर।
एएनआई, सिंगापुर। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 31 May 2026 03:23 AM IST
सार

अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को सख्ती से जारी रखा है। हालांकि ईरान के साथ 60 दिनों के युद्धविराम विस्तार पर बातचीत चल रही है, लेकिन परमाणु शर्तों और लेबनान विवाद के कारण दोनों पक्ष किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं।

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us blockade in strait of hormuz remains active as iran ceasefire talks stall
होर्मुज का रास्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच का सैन्य तनाव फिलहाल कम नहीं हो रहा है। सिंगापुर के सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह लागू है। यह बयान तब आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ 60 दिनों के युद्धविराम पर विचार कर रहे हैं। इस नाकेबंदी से दुनिया के इस सबसे जरूरी तेल रास्ते में जहाजों की आवाजाही ठप है। अमेरिकी कार्रवाई के कारण अप्रैल के मध्य से अब तक 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों को वापस भेजा गया है।
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युद्ध के लिए तैयार अमेरिका:पीट हेगसेथ
अमेरिकी युद्ध सचिव ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक के बाद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दोबारा युद्ध शुरू कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हथियारों का भंडार इस काम के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की है। सेना ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी बल पूरी तरह मुस्तैद हैं। दूसरी तरफ ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी सेना ने शनिवार को एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। वहीं, होर्मुज के बंद होने से वैश्विक बाजार में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। 
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क्या है सीजफायर समझौते की शर्तें और विवाद?
पाकिस्तानी मध्यस्थों की मदद से एक अस्थायी समझौता तैयार किया गया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच लड़ाई को रोकना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में दो घंटे बैठक की। हालांकि अभी तक इस समझौते पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। इस समझौते को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुख्य विवाद इस प्रकार हैं:-
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परमाणु प्रतिबंध: अमेरिका की शर्त है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ईरान इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मान रहा है।

मुक्त व्यापार: ट्रंप चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह टोल-फ्री हो। ईरान का कहना है कि वे नाकेबंदी हटने के बाद ही जहाजों को रास्ता देंगे।

समुद्री बारूदी सुरंगें: समझौते के तहत ईरान को 30 दिनों में समुद्री सुरंगें हटानी होंगी। अमेरिका ने पहले ही कई सुरंगों को नष्ट करने का दावा किया है।

यह भी पढ़ें: जापोरिज्जिया परमाणु प्लांट पर ड्रोन हमला: रूस ने मढ़ा आरोप तो यूक्रेन ने किया इनकार, कहा- यह सिर्फ प्रोपेगैंडा

लेबनान संकट से उलझा कूटनीतिक गणित
इस पूरे विवाद में लेबनान का मोर्चा सबसे बड़ा रोड़ा बन गया है। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान संकट नहीं सुझलगा, तब तक अमेरिका से कोई समझौता नहीं होगा। इस बीच इस्राइली सेना लेबनान के भीतर 30 किलोमीटर तक घुस चुकी है। वहां गांवों को खाली करने के आदेश जारी हैं। दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधि पेंटागन में सीधे बातचीत भी कर रहे हैं। कूटनीतिक बातचीत के बावजूद जमीन पर युद्ध का खतरा लगातार बना हुआ है।
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