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Nepal: अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री की नेपाल यात्रा, इस बार पहले जैसी कामयाब नहीं रहा डॉनल्ड लू का दौरा

Sun, 31 Jul 2022 08:04 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 31 Jul 2022 08:04 PM IST
सार

विदेश मंत्री नारायण खड़का ने संसद को इस बात की जानकारी दी कि नेपाल सरकार ने कूटनीतिक माध्यम से एसपीपी के बारे में अपना पत्र अमेरिका को भेज दिया है। उसके कुछ घंटे बाद ही लू की प्रधानमंत्री देउबा से बातचीत हुई। कुछ समय बाद काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास ने नेपाल सरकार का पत्र मिलने की पुष्टि कर दी।

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US Assistant Secretary of State visit to Nepal this time Donald Lu visit was not as successful as before
NEPAL USA - फोटो : iStock

विस्तार

अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डॉनल्ड लू को अपनी नेपाल यात्रा में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली। विश्लेषकों ने कहा है कि अगर उनकी यात्रा का मकसद नेपाल को अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) में शामिल होने पर राजी करना था, तो यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। बल्कि उनकी यात्रा की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले नेपाल सरकार ने अमेरिका को वह पत्र भेज दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि नेपाल एसपीपी में शामिल नहीं होगा। 

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गुरुवार को काठमांडू पहुंचे डॉनल्ड लू यहां प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और विदेश मंत्री नारायण खड़का से मिले। इस दौरान उनकी किसी और नेता से मुलाकात नहीं हुई। पिछले साल नवंबर में लू जब काठमांडू आए थे, तब उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल से भी बातचीत की थी। लेकिन इस बार मुलाकात प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री तक सीमित रही।
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अधिकारियों के मुताबिक इन मुलाकातों के दौरान एसपीपी मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हुई। बल्कि इन वार्ताओं में सारा ध्यान नेपाल और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने पर केंद्रित रहा। एक अधिकारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा है कि बातचीत इस मसले पर हुई कि टिकाऊ विकास का लक्ष्य हासिल करने में नेपाल को अमेरिका क्या सहायता दे सकता है। साथ ही नेपाल में अमेरिकी निवेश बढ़ाने के सवाल पर भी बातचीत हुई। चूंकि नेपाल ने अमेरिका को पत्र भेज कर यह बता दिया कि एसपीपी में शामिल होने का उसका कोई इरादा नहीं है, इसलिए इस अध्याय को समाप्त मान लिया गया।
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विदेश मंत्री नारायण खड़का ने संसद को इस बात की जानकारी दी कि नेपाल सरकार ने कूटनीतिक माध्यम से एसपीपी के बारे में अपना पत्र अमेरिका को भेज दिया है। उसके कुछ घंटे बाद ही लू की प्रधानमंत्री देउबा से बातचीत हुई। कुछ समय बाद काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास ने नेपाल सरकार का पत्र मिलने की पुष्टि कर दी। दूतावास के जन संपर्क प्रमुख गैरेट विल्करसन ने पत्रकारों से कहा- ‘हम पत्र मिलने की पुष्टि करते हैं और नेपाल सरकार के फैसले को स्वीकार करते हैं।’

एसपीपी से जुड़ा विवाद उस समय खड़ा हुआ, जब बताया जाता है कि प्रधानमंत्री देउबा अपनी अमेरिका यात्रा की तैयारी में हैं। पहले बताया गया था कि देउबा जुलाई के मध्य में अमेरिका जाएंगे। कई विश्लेषकों ने राय जताई है कि एसपीपी से जुड़े विवाद के कारण देउबा की यात्रा के कार्यक्रम में जटिलता पैदा हुई। इसीलिए अभी तक यह कार्यक्रम घोषित नहीं हो पाया है। समझा जाता है कि अब ये यात्रा सितंबर में होगी।


सूत्रों के मुताबिक लू और खड़का के बीच अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) से हुए करार को लागू करने के बारे में विचार-विमर्श हुआ। इस विवादास्पद करार के तहत नेपाल को 50 करोड़ डॉलर की सहायता मिलने वाली है। पिछले साल नवंबर में डॉनल्ड लू की यात्रा के बाद इस करार के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया तेज हुई थी। इसे लू की कामयाबी माना गया था। लेकिन ऐसा लगता है कि एसपीपी मामले में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिल सकी है।

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