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कैसे बची कैप्टन स्मित की जान?: 'लगातार बह रहा था खून, होंठ भी पड़ गए थे नीले'; अब डॉक्टर ने खुद बताई हकीकत
Wed, 07 Oct 2026 12:37 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Wed, 07 Oct 2026 12:37 AM IST
सार
फ्लाईदुबई उड़ान में कैप्टन स्मित मच्छार की जान कैसे बची। किसी ने विमान संभाला तो किसी ने हमलावर को बांधा। लेकिन खून से लथपथ स्मित मच्छार को एक डेंटिस्ट यानी दांतो के डॉक्टर ने कैसे संभाला। इस पर अब एक और खुलासा हुआ है। हाल ही में एक उन्हीं डॉक्टर ने एक इंटरव्यू दिया है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि उस माहौल में उन्होंने स्मित की जान कैसे बचाई? आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...
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कैप्टन स्मित की जान बचाने वाले डॉक्टर ने क्या बताया?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई चाकूबाजी से हर कोई हैरान है। 170 से ज्यादा यात्रियों की जान बचाने वाले पायलट स्मित मच्छार इसके असली हीरो रहे। दरअसर, उनके सह-पायलट ने अल हमाम ने अचानक उनपर चाकू से हमला कर दिया था। इसके बाद विमान काफी नीचे आ गया था। कुछ ही सेकंड में विमान क्रैश भी हो सकता था। लेकिन स्मित ने हार नहीं मानी। खून से लथपथ होने के बावजूद स्मित ने मुकाबला किया और मौका मिलते ही कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया।
इस दौरान चार यात्रियों ने तुरंत दौड़ लगाई। कुछ ने हमलावर को पकड़ा। एक ने विमान संभाला। उन्हीं चार में से एक दांतों के डॉक्टर भी थे। उन्होंने तुरंत स्मित को संभाला और उनकी जान बचाने पूरी ताकत झोंक दी। एक इंटरव्यू में जॉर्जियाई दंत चिकित्सक डॉ. शुता मुसाएव ने इस बारे में बात की। उन्होंने बताया कि करीब 45 मिनट तक वो लगातार घावों पर दबाव बनाए रखे रहे। बर्फ की मदद से खून रोकने की कोशिश की।
कपड़ों और बर्फ से कैसे रोका गया खून?
मुसाएव ने बताया कि कैप्टन के सिर और बाएं हाथ से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था। उन्होंने पहले टी-शर्ट को घाव पर रखकर दबाव बनाया, लेकिन खून नहीं रुका। इसके बाद उन्होंने विमान के कर्मचारियों से बर्फ मांगी। कैप्टन के घाव बहुत गहरे थे, इसलिए कई आइस पैकेट इस्तेमाल करने पड़े। मुसाएव ने करीब 45 मिनट तक घाव पर दबाव बनाए रखा और बर्फ लगाते रहे। उनका कहना था कि जब भी वह खून देखने के लिए टी-शर्ट हटाते थे, खून फिर तेज बहने लगता था।
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जब नब्ज गिर गई तो दंत चिकित्सक ने क्या किया?
मुसाएव लगातार कैप्टन की हालत देखते रहे। वह उनसे बात करते रहे ताकि वह बेहोश न हों। उन्होंने कैप्टन से उनके बच्चों के बारे में पूछा और कहा कि वह जल्द अपने परिवार के पास लौटेंगे। कैप्टन ने अपना नाम और उम्र बताई। उन्होंने बताया कि वह भारत से हैं और दुबई में रहते हैं। वह दर्द में थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। एक समय उनकी नब्ज बहुत कम हो गई। तब मुसाएव ने उनके पैर ऊपर किए, जिसके बाद नब्ज फिर लौट आई। जब कैप्टन के होंठ नीले पड़ने लगे तो उन्होंने विमान कर्मचारियों से जल्द लैंडिंग कराने को कहा।
दवा देने से क्यों मना किया और लैंडिंग तक क्या किया?
कैप्टन दर्द की दवा मांग रहे थे। मुसाएव ने उन्हें थोड़ा-थोड़ा पानी दिया, लेकिन भारी खून बहने के कारण दवा देने से मना कर दिया। उन्हें डर था कि कैप्टन को हिलाने या दवा देने से दोबारा ज्यादा खून निकल सकता है। वह लगातार उनकी नब्ज, बातचीत और होंठों का रंग देखते रहे। विमान के सऊदी अरब में उतरने के बाद उन्होंने कैप्टन को जमीन पर मौजूद डॉक्टरों के हवाले कर दिया। मुसाएव ने कहा कि कैप्टन ने उनकी और अन्य यात्रियों की जान बचाई, इसलिए उन्होंने भी उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। घटना के बाद मुसाएव और उनकी पत्नी भी मानसिक तनाव से गुजरे। मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि कैप्टन मच्छर की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और वह स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।
विमान में हमला होने के बाद क्या हुआ?
मुसाएव के मुताबिक, चीखने की आवाज सुनकर वह कॉकपिट की ओर दौड़े। वहां कैप्टन मच्छर घायल हालत में फर्श पर पड़े थे। सह-पायलट ओमानी नागरिक हमाम अल-हमामी ने कथित तौर पर कैप्टन पर हमला किया था और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की थी। एक अन्य यात्री यानिव हयून ने हमलावर को कॉकपिट से बाहर खींच लिया। इसके बाद उसने विमान को संभालकर सीधा किया। बाद में तीसरे पायलट ने विमान का नियंत्रण संभाल लिया। हमलावर पर काबू पाने के बाद मुसाएव ने अपना पूरा ध्यान घायल कैप्टन पर लगा दिया।
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इस दौरान चार यात्रियों ने तुरंत दौड़ लगाई। कुछ ने हमलावर को पकड़ा। एक ने विमान संभाला। उन्हीं चार में से एक दांतों के डॉक्टर भी थे। उन्होंने तुरंत स्मित को संभाला और उनकी जान बचाने पूरी ताकत झोंक दी। एक इंटरव्यू में जॉर्जियाई दंत चिकित्सक डॉ. शुता मुसाएव ने इस बारे में बात की। उन्होंने बताया कि करीब 45 मिनट तक वो लगातार घावों पर दबाव बनाए रखे रहे। बर्फ की मदद से खून रोकने की कोशिश की।
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कपड़ों और बर्फ से कैसे रोका गया खून?
मुसाएव ने बताया कि कैप्टन के सिर और बाएं हाथ से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था। उन्होंने पहले टी-शर्ट को घाव पर रखकर दबाव बनाया, लेकिन खून नहीं रुका। इसके बाद उन्होंने विमान के कर्मचारियों से बर्फ मांगी। कैप्टन के घाव बहुत गहरे थे, इसलिए कई आइस पैकेट इस्तेमाल करने पड़े। मुसाएव ने करीब 45 मिनट तक घाव पर दबाव बनाए रखा और बर्फ लगाते रहे। उनका कहना था कि जब भी वह खून देखने के लिए टी-शर्ट हटाते थे, खून फिर तेज बहने लगता था।
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जब नब्ज गिर गई तो दंत चिकित्सक ने क्या किया?
मुसाएव लगातार कैप्टन की हालत देखते रहे। वह उनसे बात करते रहे ताकि वह बेहोश न हों। उन्होंने कैप्टन से उनके बच्चों के बारे में पूछा और कहा कि वह जल्द अपने परिवार के पास लौटेंगे। कैप्टन ने अपना नाम और उम्र बताई। उन्होंने बताया कि वह भारत से हैं और दुबई में रहते हैं। वह दर्द में थे और मदद की गुहार लगा रहे थे। एक समय उनकी नब्ज बहुत कम हो गई। तब मुसाएव ने उनके पैर ऊपर किए, जिसके बाद नब्ज फिर लौट आई। जब कैप्टन के होंठ नीले पड़ने लगे तो उन्होंने विमान कर्मचारियों से जल्द लैंडिंग कराने को कहा।
दवा देने से क्यों मना किया और लैंडिंग तक क्या किया?
कैप्टन दर्द की दवा मांग रहे थे। मुसाएव ने उन्हें थोड़ा-थोड़ा पानी दिया, लेकिन भारी खून बहने के कारण दवा देने से मना कर दिया। उन्हें डर था कि कैप्टन को हिलाने या दवा देने से दोबारा ज्यादा खून निकल सकता है। वह लगातार उनकी नब्ज, बातचीत और होंठों का रंग देखते रहे। विमान के सऊदी अरब में उतरने के बाद उन्होंने कैप्टन को जमीन पर मौजूद डॉक्टरों के हवाले कर दिया। मुसाएव ने कहा कि कैप्टन ने उनकी और अन्य यात्रियों की जान बचाई, इसलिए उन्होंने भी उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश की। घटना के बाद मुसाएव और उनकी पत्नी भी मानसिक तनाव से गुजरे। मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि कैप्टन मच्छर की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और वह स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।
विमान में हमला होने के बाद क्या हुआ?
मुसाएव के मुताबिक, चीखने की आवाज सुनकर वह कॉकपिट की ओर दौड़े। वहां कैप्टन मच्छर घायल हालत में फर्श पर पड़े थे। सह-पायलट ओमानी नागरिक हमाम अल-हमामी ने कथित तौर पर कैप्टन पर हमला किया था और विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश की थी। एक अन्य यात्री यानिव हयून ने हमलावर को कॉकपिट से बाहर खींच लिया। इसके बाद उसने विमान को संभालकर सीधा किया। बाद में तीसरे पायलट ने विमान का नियंत्रण संभाल लिया। हमलावर पर काबू पाने के बाद मुसाएव ने अपना पूरा ध्यान घायल कैप्टन पर लगा दिया।