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छुपाई अफगानिस्तान की असलियत: अमेरिका सरकार को उसके अपने अधिकारियों ने ही रखा अंधेरे में

Mon, 16 Aug 2021 01:58 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 16 Aug 2021 01:58 PM IST
सार

इतिहास में अफगानिस्तान जितना लंबा युद्ध अमेरिका ने कभी नहीं लड़ा है। इस युद्ध के दौरान नाकामी क्यों हासिल हुई, इस बारे में ठोस जानकारियां खुद अमेरिका सरकार के पास मौजूद दस्तावेजों में हैँ। उनमें दो हजार से ज्यादा पेज का एक ऐसा दस्तावेज भी है, जिसे युद्ध में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया...

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US army officers hide the truth about afghanistan from its top leadership
अफगानिस्तान संकट - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अफगानिस्तान की असल हालत के बारे में अमेरिका के अधिकारियों ने अपनी सरकार को अंधकार में रखा। उन्होंने सरकार को सच नहीं बताया। ये दावा अखबार द वाशिंगटन पोस्ट ने किया था। ये दावा सरकारी दस्तावेजों के आधार पर किया गया था, जो साल 2019 में अखबार को हाथ लगे थे।

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अब अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद अखबार फिर से वह कहानी सामने लाया है। इस ख़बर के मुताबिक गलत सूचना देने का सिलसिला पिछले 18 साल से चल रहा था। जिन सरकारी दस्तावेजों का हवाला अखबार ने दिया है, उनके मुताबिक अधिकारियों के पास इस बात के साक्ष्य थे कि अफगानिस्तान में युद्ध में विजय नहीं प्राप्त की जा सकती है। लेकिन वे उसके विपरीत घोषणाएं करते रहे।
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इतिहास में अफगानिस्तान जितना लंबा युद्ध अमेरिका ने कभी नहीं लड़ा है। इस युद्ध के दौरान नाकामी क्यों हासिल हुई, इस बारे में ठोस जानकारियां खुद अमेरिका सरकार के पास मौजूद दस्तावेजों में हैं। उनमें दो हजार से ज्यादा पेज का एक ऐसा दस्तावेज भी है, जिसे युद्ध में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने वाले लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया था। जिन लोगों से बातचीत की गई, उनमें सैनिक जनरल, राजनयिक, सहायता कर्मी और अफगान सरकार के अधिकारी शामिल हैं। ये दस्तावेज औपचारिक रूप से अभी तक अप्रकाशित है।

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द वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक जिन लोगों से बातचीत की गई, उनमें से ज्यादातर की पहचान अमेरिका सरकार ने छिपाने की कोशिश की है। अखबार ने कहा था कि अमेरिका के सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम के तहत तय प्रतिबंधों के कारण उसने उन दस्तावेजों को प्रकाशित नहीं किया। लेकिन उसने पूरे दस्तावेज का सार प्रकाशित किया था। इसके मुताबिक अमेरिकी अधिकारी यह लगातार कहते रहे कि युद्ध में वे आगे बढ़ रहे हैं। जबकि हकीकत इसके विपरीत थी और अधिकारी उस हकीकत को जानते भी थे।

अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इंटरव्यू के दौरान संबंधित व्यक्तियों ने दो टूक बातें कहीं। उन्होंने अपनी शिकायत, असंतोष और असल हालात को बयान किया। मसलन, पूर्व राष्ट्रपतियों जॉर्ज बुश जूनियर और बराक ओबामा के कार्यकाल में अफगानिस्तान से संबंधित मामलों के प्रभारी और थ्री स्टार जनरल रहे डगलस लुटे ने 2015 में कहा- ‘हमारे पास अफगानिस्तान की मूलभूत समझदारी नहीं थी। हमें यही नहीं पता था कि हम क्या कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा- अफगानिस्तान में हमारी अकुशलता के बारे में अमेरिकी जनता को मालूम होगा, तो वे कहेंगे कि 2,300 सैनिकों की जान बेकार में चली गई। उसके लिए वे अमेरिकी सरकार और कांग्रेस (सांसद) को दोषी ठहराएंगे। ऐसे में यह बताने का कौन साहस करेगा कि ये जानें निरर्थक चली गईं?

साल 2001 में जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला, तब से उसके सात लाख 75 हजार सैनिक वहां तैनात किए गए। कई सैनिकों को कई बार वहां भेजा गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उनमें से लगभग 2,300 की मृत्यु हुई। 20,589 सैनिक जख्मी हुए, जिनमें कई विकलांग हो गए।

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