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US-Russia: जाते-जाते बाइडन ने पुतिन की बढ़ाई परेशानी, रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर नये प्रतिबंधों की घोषणा की

Sat, 11 Jan 2025 01:01 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 11 Jan 2025 01:01 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रूस को बड़ा झटका दिया है, जिसके तहत बाइडन प्रशासन ने रूस की 200 उर्जा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इन कंपनियों में दो भारतीय कंपनियां भी शामिल है, जिनपर अमेरिकी नियमों के उल्लघन का आरोप लगा है। 

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US announces sweeping sanctions on Russia’s energy sector, two Indian companies named World News In Hindi
बाइडन और पुतिन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने जाते जाते रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बड़ा झटका दिया है। अमेरिका की बाइडन प्रशासन ने रूस की ऊर्जा क्षेत्र की 200 से ज्यादा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसमें दो भारतीय कंपनियां स्काईहार्ट मैनेजमेंट सर्विसेज और एविजन मैनेजमेंट सर्विसेज भी शामिल है। इन कंपनियों पर जिन पर रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि इन कंपनियों ने रूस से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के परिवहन में भाग लिया था। 
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अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान
मामले में अमेरिका के विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने कहा अमेरिका ने आज रूस के ऊर्जा क्षेत्र में शामिल 200 से अधिक संस्थाओं और लोगों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जिनमें  रूस के प्रमुख तेल उत्पादक, बीमा कंपनियां और अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
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उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों के बाद नए प्रतिबंधों के निशाने पर 180 से ज्यादा तेल वाहक जहाज, व्यापारी, तेल क्षेत्र सेवा कंपनियां और रूसी ऊर्जा अधिकारी भी हैं। ब्लिंकन ने कहा कि इस कार्रवाई से रूस के ऊर्जा संसाधनों से मिलने वाली आय पर असर पड़ेगा और रूस को यूक्रेन पर अपना युद्ध जारी रखने के लिए वित्तीय मदद मिलना मुश्किल होगा।
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अमेरिका के निशाना पर 80 और संस्थाएं
अमेरिका के विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने आगे कहा कि अमेरिकी सरकार ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों की सूची में लगभग 80 संस्थाओं और व्यक्तियों को शामिल किया है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने अमेरिकी स्वीकृत आर्कटिक एलएनजी 2 परियोजना को समर्थन दिया, रूस के खनन और धातु क्षेत्र में काम करने वाले लोग और रूस के परमाणु ऊर्जा संगठन रोसाटॉम के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

ट्रेजरी विभाग का भी एक्शन
इसके अलावा अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने 150 से अधिक संस्थाओं और व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें प्रमुख रूसी तेल उत्पादक कंपनियां जैसे गज़प्रोम नेफ्ट और सर्गुटनेफ्टेगास, रूसी बीमा कंपनियां, और छाया बेड़े के जहाज भी शामिल हैं। ट्रेजरी ने रूस के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक प्रतिबंधित किया है, जिससे रूस को कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन में अमेरिकी सेवाओं का इस्तेमाल बंद हो गया है।

अमेरिका के साथ अब ब्रिटेन भी
ब्लिंकन ने यह भी बताया कि यूनाइटेड किंगडम भी रूस के ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाने में अमेरिका के साथ जुड़ गया है, और G7 जैसे देशों के साथ मिलकर रूस की युद्ध के लिए वित्तीय मदद रोकने की कोशिश कर रहा है।

स्काईहार्ट और एविजन पर आरोप
 स्काईहार्ट और एविजन पर यह आरोप है कि उन्होंने अमेरिकी नियमों के तहत नामित एलएनजी वाहकों से एलएनजी लोड किया था। इन दोनों कंपनियों को अब रूस के ऊर्जा क्षेत्र के लिए वित्तीय या भौतिक मदद देने के आरोप में प्रतिबंधित किया गया है।


रूस के लिए झटका
अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन का ये कदम रूस की अर्थव्यवस्था को और नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से है। हालांकि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर वह राष्ट्रपति होते तो यह युद्ध नहीं होता, और उन्होंने पुतिन के साथ अपने संबंधों को लेकर भी बयान दिए थे।
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