आतंकी समूह आईएसआईएल भारत में बड़े हमले को अंजाम देने में असमर्थ रहा, लेकिन उसके आकाओं ने समर्थकों के जरिये लोन एक्टर हमलों को अंजाम देने का प्रयास किया। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी साझा की।
UN Report: 'भारत में बड़े हमले की साजिश, ISIL के मंसूबे पर फिरा पानी'; पश्चिम एशिया में खलीफा के शासन की मंशा
इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट (आईएसआईएल) एक आतंकी समूह है, जिसका लक्ष्य पश्चिम एशिया में खलीफा का शासन (खिलाफत) स्थापित करना है। रिपोर्ट के अनुसार, दाएश समर्थक अल-जौहर मीडिया अपने प्रकाशन सेरात उल-हक के माध्यम से भारत विरोधी प्रचार कर रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अफगानिस्तान में सक्रिय दो दर्जन आतंकी समूह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतराः
रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में दो दर्जन से अधिक आतंकी समूह सक्रिय हैं। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों ने इन्हें अफगानिस्तान के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य देशों के लिए भी खतरे के रूप में आंका है। रिपोर्ट के अनुसार, सत्ता तथा वरिष्ठ व मध्यम स्तर के नेतृत्व को गंवाने के बावजूद अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों की उपस्थिति उसके साथ-साथ मध्य एशियाई देशों की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा और गंभीर चुनौती है।
क्षेत्र के लिए खतरा बना हुआ है इस्लामिक स्टेट-खुरासानः गुटेरस
इसके अलावा, दाएश से अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को खतरे से संबंधित महासचिव की 20वीं रिपोर्ट के अनुसार, दाएश से पैदा होने वाले खतरी की गंभीरता चिंताजनक बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, दाएश नेतृत्व तथा उसकी वित्तीय गतिविधियों को लक्षित करने में सदस्य देशों व अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की लगातार प्रगति के बावजूद आतंकी समूह खुद को परिस्थिति के अनुरूप ढाल रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा, अफगानिस्तान में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस्लामिक स्टेट-खुरासान न केवल देश, बल्कि क्षेत्र और उससे आगे के लिए भी खतरा बना हुआ है। मैं सभी सदस्य देशों से आह्वान करता हूं कि वे एकजुट होकर अफगानिस्तान को फिर से अन्य देशों को प्रभावित करने वाली आतंकी गतिविधियों का केंद्र बनने से रोकें।
अफगानिस्तान सक्रिय अल-कायदा ने गैर-अफगान मूल के क्षेत्रीय आतंकी संगठनों तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी), इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ईटीआईएम/टीआईपी) व जमात अंसारुल्लाह के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश की, ताकि पड़ोसी देशों में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान ने अल-कायदा को मजबूत करने के लिए अफगानिस्तान में सेफ हाउस व प्रशिक्षण शिवरों के जरिये अपने अनुकूल वातावरण बनाए रखा। तालिबान ने टीटीपी को रसद व वित्तीय सहायता प्रदान करना जारी रखा। एक सदस्य राष्ट्र ने बताया कि नूर वली मसूद के परिवार को 30 लाख अफगानी (लगभग 43,000 अमेरिकी डॉलर) का मासिक भुगतान मिलता था। टीटीपी ने अफगान तालिबान सहित टीटीपी कैडरों के भीतर भर्ती बढ़ाते हुए कुनार, नंगरहार, खोस्त व पक्तिका (बरमल) प्रांतों में नए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए।
भारतीय उपमहाद्वीप में बढ़ा टीटीपी, अफगान तालिबान व अल-कायदा के बीच सहयोग
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपमहाद्वीप में टीटीपी, अफगान तालिबान व अल-कायदा के बीच सहयोग बढ़ा है। ये तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान के बैनर तले हमले कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि आत्मघाती हमलावरों, लड़ाकों तथा अन्य सुविधाओं की उपलब्धता के कारण टीटीपी क्षेत्रीय खतरे में तब्दील हो सकता है और क्षेत्र में सक्रिय अन्य आतंकी समूहों के लिए एक छत्र संगठन बन सकता है।
संबंधित वीडियो