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नेपाल जलप्रलय के 10 दिन: सैलाब में 600 बच्चे भी समाए, मलबे में अपनों की तलाश...; कई भारतीय इलाकों पर बढ़ा खतरा

Sat, 05 Sep 2026 10:08 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो / एजेंसी।
अमर उजाला ब्यूरो / एजेंसी। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 05 Sep 2026 10:08 AM IST
सार

नेपाल में जलप्रलय के 10 दिन बीत चुके हैं। राहत और बचाव कार्य में लगी एजेंसियों के मुताबिक सैलाब में 600 बच्चे भी समा गए हैं। मलबों के नीचे अपनों की तलाश जारी है। इसी बीच जलभराव के कारण कई भारतीय इलाकों पर भी खतरा बढ़ने की खबर है।

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Nepal Tragedy 10 Days passed 600 Children Swept Away in Floods Search under Debris on Threat on Indian Areas
नेपाल की त्रासदी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स

विस्तार

नेपाल में आई आपदा ने पूरी दुनिया को हैरान कर के रख दिया है। अब खबर सामने आई है कि इस आपदा में करीब 600 बच्चे भी लापता हैं। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी आपदा के बाद 10वें दिन भी सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। सेना के जवान दिन रात मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं। रसुवा से लेकर नुआकोट तक चप्पे-चप्पे पर लोगों को तलाश किया जा रहा है। इस बीच एक दुखी कर देने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, नेपाल में बाढ़ के कारण आई तबाही में रसुवा और नुवाकोट इलाके में लगभग 600 बच्चे भी लापता बताए जा रहे हैं।

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22 शिक्षक लापता
स्थानीय सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा जो आंकड़े जुटाए गए हैं उसके अनुसार, रसुवा में करीब 280 बच्चे लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, नुवाकोट में करीब 300 से 350 बच्चों का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लापता छात्रों का पता लगा है लेकिन जिले में कम से कम 300 छात्र लापता हैं। रसुवा में 16 शिक्षक और नुवाकोट में छह शिक्षक भी लापता बताए जा रहे हैं। बता दें कि नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने बताया था कि बाढ़ के कारण रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में 22 स्कूल प्रभावित हुए थे। इनमें से 12 स्कूल पूरी तरह तबाह हो गये थे। 
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चमेलिया नदी में पानी जमा होने से भारतीय इलाकों पर बढ़ा खतरा
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ (झूलाघाट) से आई रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ में हुए भूस्खलन  से नदी का प्रवाह रुक गया है। नेपाल की चमेलिया नदी में पानी जमा होने से भारतीय क्षेत्रों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। भट्टाड़ के पास पहाड़ी से भूस्खलन होने से इस नदी का प्रवाह रुक गया है और यहां कृत्रिम झील बन गई है। यदि झील टूटी तो इसका पानी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बहने वाली काली नदी में मिलकर भारतीय क्षेत्रों में तबाही मचा सकता है।

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  • यही चमेलिया नदी भारतीय क्षेत्र गेठीगाड़ाके सिमपानी और नेपाल के सेरा में काली नदी में मिलती है। यही काली नदी झूलाघाट, पंचेश्वर होते हुए टनकपुर पहुंचती है। अपि हिमाल गांव पालिका के वार्ड अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे बोहरा ने बताया कि नेपाल के दार्चुला के अपिहिमाल गांव पालिका, वार्ड नंबर एक, भट्टाड़ नामक स्थान पर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर चमेलिया नदी में गिर गया है।
  • नदी का प्रवाह थमने से यहां कृत्रिम झील बनने लगी है। ऐसे में झील टूटी तो इसका पानी रसुवा की तरह काली नदी से सटे नेपाल के साथ ही भारतीय क्षेत्रों में बड़ी तबाही का कारण बन सकता है।

भट्टाड़ के 15 परिवारों को किया जा चुका है शिफ्ट
अपिहिमाल गांव पालिका के वार्ड अध्यक्ष भगत सिंह ठेकरे से मिली जानकारी के अनुसार, भट्टाड़ में चमेलिया नदी के खतरे को देखते हुए इसके किनारे बसे 15 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है। घटना की सूचना भी दार्चुला प्रशासन को दी गई है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है इससे पहाड़ी के और टूटने का खतरा बना हुआ है। यदि ऐसा हुआ तो यह बड़ी समस्या बन सकता है।

सिक्किम की 16 हिमनद झीलें कभी भी मचा सकती हैं तबाही
हिमालय में तेजी से बदलते मौसम के बीच सिक्किम में हिमनद झीलों का खतरा बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने 40 हिमनद झीलों की पहचान जोखिम वाली झीलों के तौर पर की है। इनमें 16 सबसे अधिक जोखिम वाली श्रेणी-ए में हैं। जीएलओएफ जोखिम न्यूनीकरण पर आयोजित मीडिया कार्यशाला में सिक्किम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव संदीप तांबे ने बताया कि दो झीलें श्रेणी-बी यानी उच्च जोखिम और नौ श्रेणी-सी यानी मध्यम से कम जोखिम वाली हैं। 13 झीलों को अभी वर्गीकृत नहीं किया गया है।

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी रिपोर्ट
राज्य सरकार ने शाको छो को जीएलओएफ यानी हिमनद झील के अचानक फटने से आने वाली बाढ़ के लिहाज से सबसे संवेदनशील माना है। इस पर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी गई है। प्रारंभिक रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय को भी दी जा चुकी है।

  • 169 भारतीय अब तक सुरक्षित बचाए गए: विदेश मंत्रालय ने बताया कि तीन और भारतीयों को बचाया गया। अब तक 169 भारतीयों को निकाला गया है।

हमने कर दिखाया...सुरंग में फंसे और लोगों को बचाएंगे अर्नोल्ड, सिलक्यारा में मदद करने वाले ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ की निगरानी में चल रहा अभियान
भारत में 2023 में सिलक्यारा सुरंग (उत्तराखंड) में फंसे मजदूरों को बचाने में मदद करने वाले ऑस्ट्रेलियाई सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने शुक्रवार को नेपाल में दो लोगों को जिंदा बचाए जाने की घटने की पर कहा, हमने कर दिया। साथ ही, उम्मीद जताई कि आगे और भी लोगों को सुरक्षित बचाया जाएगा। वह विक्टोरिया के मोनबुलक स्थित अपने घर से नेपाल में चल रहे बचाव अभियान की निगरानी कर रहे थे। डिक्स ने बताया, हेलिकॉप्टरों से आ रही सैटेलाइट तस्वीरों का उपयोग करके टीम को यह पहचानने में मदद की कि त्रिशूली-3 जल विद्युत संयंत्र पहले कहां पर था। फिर उसकी तुलना इंजीनियरिंग के नक्शों से की गई। तब पता लगाया कि ड्रिलिंग कहां करनी है। 

एक दिन पहले ही कहा था- सुरंग सुरक्षित, जिंदा होंगे लोग
डिक्स ने एक दिन पहले ही पोस्ट में सुरंग से लोगों के जीवित निकलने की संभावना जताई थी। उन्होंने लिखा था, सुरंग एक इंजीनियर की बनाई ऐसी जगह होती हैं जो मौसम के असर से सुरक्षित रहती है।

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