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तिब्बत बाढ़: चीन नहीं दे रहा कोई जानकारी; लापता लोगों की तलाश में परिजन बेहाल, बोले- सूचना कहां से मिले?

Sat, 05 Sep 2026 02:00 PM IST
शिवम गर्ग वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क/तिब्बत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क/तिब्बत Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 05 Sep 2026 02:00 PM IST
सार

नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ के बाद तिब्बत में लापता लोगों के परिजन अपनों की खबर के लिए परेशान हैं। परिवारों का आरोप है कि चीन से पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही और वे सोशल मीडिया, नेपाल व विदेशी दूतावासों से सुराग जुटा रहे हैं। चीन के आधिकारिक आंकड़ों और सूचना प्रतिबंधों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर तिब्बत में क्या हो रहा है? आइए, विस्तार से जानते हैं...

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Why Are Families Struggling to Find Missing Loved Ones in Tibet Amid Floods and China Information Silence?
चीन की चुप्पी से बढ़ी बेचैनी! - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ को एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन तिब्बत में लापता लोगों के परिजन अब भी अपने अपनों की खबर के लिए परेशान हैं। परिवारों का कहना है कि उन्हें चीन की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही और उन्हें सोशल मीडिया, नेपाल तथा विदेशी दूतावासों से मिलने वाली सूचनाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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चीन के सिचुआन प्रांत की 31 वर्षीय फैन होंग भी ऐसे ही परिवारों में शामिल हैं। उनके पति लिन बो नेपाल में एक चीनी हाईवे परियोजना पर काम कर रहे थे। आपदा की सुबह पति से आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद संपर्क नहीं हो पाया। फैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडनोट पर अपने पति की जानकारी मांगते हुए पोस्ट किया। पोस्ट को 18 हजार से ज्यादा लाइक्स और करीब 4,600 कमेंट मिल चुके हैं। उनका कहना है कि वह अधिकारियों से स्थिति की जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।

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नेपाल-तिब्बत सीमा पर लिन बो कहां लापता हुए?

लिन बो 2024 से स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी हाईवे की मरम्मत परियोजना से जुड़े थे। यह सड़क नेपाल को तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के जरिए चीन से जोड़ती है। वह निर्माण स्थल पर रह रहे थे और सड़क के करीब 16 किलोमीटर लंबे हिस्से पर काम कर रहे थे। फैन के मुताबिक, निर्माण स्थल तक बचाव अभियान आगे नहीं बढ़ पा रहा है। लापता लोगों के परिजन चीनी अधिकारियों से अपने ड्रोन या हेलीकॉप्टर भेजने की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं, ताकि प्रभावित इलाके में अपने स्तर पर तलाश की जा सके।

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तिब्बत में कितने लोग अब भी लापता हैं?

  • नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ ने कई गांवों को तबाह कर दिया और 1,200 से ज्यादा लोगों की जान गई।
  • नेपाल के अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार तक करीब 4,800 लोग लापता थे।
  • वहीं चीनी अधिकारियों ने तिब्बत की तरफ 541 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी दी है।
  • इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक शामिल हैं।
  • चीन की ओर से गुरुवार तक आधिकारिक तौर पर 21 लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी।

चीन के आधिकारिक आंकड़ों पर क्यों उठ रहे सवाल?

तिब्बत से जुड़े संगठनों ने चीन की ओर से बताए गए मृतकों के आंकड़े पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सामने आए वीडियो में तबाही का स्तर काफी व्यापक दिखाई देता है, जबकि आधिकारिक तौर पर मौतों का आंकड़ा अपेक्षाकृत कम बताया गया है। तिब्बत वॉच की टेनजिन चोएकी ने कहा कि उपलब्ध जानकारी की कमी के कारण लोग केवल अनुमान लगाने को मजबूर हैं। उनका कहना था कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। तिब्बती पुलिस ने 30 अगस्त को बताया था कि ऑनलाइन आपदा के पैमाने को लेकर अधिकारियों के अनुसार गलत जानकारी फैलाने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

अमेरिका स्थित इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत की अध्यक्ष टेंचो ग्यात्सो ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल आपदा और राहत अभियान की सार्वजनिक जानकारी प्रभावित हो रही है, बल्कि यह पता लगाने में भी मुश्किल हो रही है कि प्रभावित समुदायों की स्थिति क्या है और उन्हें मदद मिल रही है या नहीं। संगठन के मुताबिक, कुछ सूत्रों ने बाहरी संगठनों से बात करने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता भी जताई है।

लापता लोगों की तलाश में परिवार सोशल मीडिया पर क्यों निर्भर हैं?

चीन में कई परिवार अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए नेपाल, विदेशी दूतावासों और सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। डॉयिन पर लापता सीमा सुरक्षा अधिकारियों की तस्वीरें भी साझा की जा रही हैं। फैन होंग का कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा जानकारी नेपाल से मिल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी हाईवे परियोजना में काम करने वाले कर्मचारियों को लेकर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही और ज्यादातर खबरें नेपाल के जलविद्युत स्टेशन पर केंद्रित हैं।

तिब्बत में लापता विदेशी परिवारों की तलाश कैसे चल रही है?

लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ब्रिटिश नागरिक श्रीधर अव्वारी, उनकी पत्नी दीप्ति और 14 वर्षीय बेटा अभिनव 26 अगस्त को ग्यिरोंग के इमिग्रेशन क्षेत्र के पास लापता हुए थे। परिवार भारत में रहता है और रिश्तेदारों का मानना है कि वे तिब्बत की तरफ चले गए थे। परिवार के मुताबिक, दीप्ति ने आखिरी बातचीत में नेटवर्क नहीं होने की बात कही थी और बाद में संपर्क करने का भरोसा दिया था। बाढ़ के बाद उनका फोन भी कनेक्ट नहीं हो पाया। परिवार की रिश्तेदार प्रियंका रपाका ने कहा कि चीन की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली और वे ऑनलाइन यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कितने लोगों को बचाया गया और कितनी मौतें हुई हैं।

क्या चीन ने मुख्य आपदा क्षेत्र तक पहुंच बना ली है?

चीनी अधिकारियों के अनुसार अब मुख्य आपदा क्षेत्र तक सड़क के जरिए पहुंच बनाई जा चुकी है। सरकारी मीडिया ने इलाके में खोज और बचाव अभियान जारी होने की जानकारी दी है। अधिकारियों के मुताबिक सैकड़ों लापता लोगों की तलाश की जा रही है। इस बीच, भारत से नेपाल पहुंचे एक अन्य परिवार का सदस्य भी अपनी लापता बहन की खबर का इंतजार कर रहा है। उनका कहना है कि चीनी अधिकारियों से जानकारी हासिल करना मुश्किल हो रहा है और उन्हें ब्रिटेन के दूतावास के जरिए अपडेट मिलने की बात कही जा रही है। लापता लोगों के परिजनों के लिए हर गुजरता दिन चिंता बढ़ा रहा है। उन्हें अब भी इस बात का इंतजार है कि चीन की ओर से उनके अपनों के बारे में स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी कब सामने आएगी।

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