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Pakistan: नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान, देश को भूखा रख अपनी झूठी शान के लिए खर्च कर रहा भारी रकम
Sat, 30 May 2026 05:08 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
आईएएनएस, नई दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र
आईएएनएस, नई दिल्ली/संयुक्त राष्ट्र
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 30 May 2026 05:08 PM IST
सार
मानवाधिकार उल्लंघन, बलूचिस्तान संकट और अल्पसंख्यकों पर हमलों के आरोपों से घिरा पाकिस्तान अब विदेशी लॉबिस्ट्स के जरिए दुनिया में अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है। आर्थिक संकट से जूझने के बावजूद पाकिस्तान अमेरिका की लॉबिंग कंपनियों पर भारी पैसा खर्च कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट और बढ़ते आतंरिक विरोध ने इस्लामाबाद और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर दबाव बढ़ा दिया है। आइए, विस्तार से समझते हैं...
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दुनिया में बेनकाब हुआ पाकिस्तान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा पाकिस्तान अब अपनी खराब होती अंतरराष्ट्रीय छवि को बचाने के लिए विदेशी लॉबिस्ट्स और दबाव समूहों पर भारी पैसा खर्च कर रहा है। दुनिया भर में मानवाधिकार उल्लंघन, अल्पसंख्यकों पर हमले और बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में बिगड़ते हालात को लेकर पाकिस्तान लगातार सवालों के घेरे में है। इसके बावजूद इस्लामाबाद अपनी जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर विदेशों में अपनी छवि चमकाने में जुटा हुआ है। पाकिस्तान की यह रणनीति अब उसकी दोहरी नीति को भी उजागर कर रही है।
पाकिस्तान लंबे समय से खुद को दुनिया के सामने एक मजबूत देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर भी पाकिस्तान लगातार प्रचार करता रहा है। लेकिन जमीन पर हालात अलग कहानी बताते हैं। पाकिस्तान के भीतर मानवाधिकार उल्लंघन, धार्मिक असहिष्णुता और सेना के खिलाफ बढ़ते गुस्से ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोशल मीडिया के दौर में अब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से आने वाली खबरें दुनिया तक तेजी से पहुंच रही हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान अब विदेशी लॉबिंग कंपनियों के जरिए दुनिया का नजरिया बदलने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान को लॉबिस्ट्स की जरूरत क्यों पड़ी?
अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान पहले मानता था कि वह बिना लॉबिस्ट्स के भी अपनी छवि संभाल सकता है। लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उसे दबाव समूहों और विदेशी कंपनियों का सहारा लेना पड़ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लोगों ने सेना और सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। विकास की कमी, लापता लोगों के मामले और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान से इन मुद्दों पर सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे इस्लामाबाद की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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ये भी पढ़ें- Explainer: बाजार से विदेशी निवेशकों का मोहभंग? निकाले हजारों करोड़ रुपये, 10 सवालों के जवाब से समझें सबकुछ
अमेरिका में कौन सुधार रहा है पाकिस्तान की छवि?
इसी महीने पाकिस्तान ने अमेरिका की लॉबिंग फर्म ‘एर्विन ग्रेव्स स्ट्रेटजी ग्रुप एलएलसी’ के साथ समझौता किया है। इस फर्म को हर महीने 50 हजार डॉलर दिए जाएंगे। इसका काम वॉशिंगटन में पाकिस्तान के पक्ष में माहौल तैयार करना और बड़े नेताओं व नीति निर्माताओं से संपर्क बनाना होगा। अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान पहले भी कई लॉबिंग कंपनियों के जरिए बैठकों, सेमिनारों और गोलमेज चर्चाओं का आयोजन कराता रहा है। इन कार्यक्रमों का मकसद दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक छवि पेश करना और देश के भीतर हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाना होता है।
अफगानिस्तान को लेकर क्या नैरेटिव बना रहा है पाकिस्तान?
पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के मुद्दे को भी अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन कर रहे हैं। उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को लेकर भी अफगान तालिबान पर आरोप लगाए हैं। हालांकि अफगान तालिबान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। अब पाकिस्तान की लॉबिंग फर्मों का काम यह भी होगा कि वे अमेरिका और दूसरे देशों को यह समझाएं कि अफगानिस्तान क्षेत्रीय अस्थिरता की बड़ी वजह है और उस पर सख्ती जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने कैसे खोली पोल?
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति की रिपोर्ट ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दीं। रिपोर्ट में धार्मिक असहिष्णुता, हिंदू और ईसाई लड़कियों के कथित अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन पर गंभीर चिंता जताई गई। इसके अलावा शिया मुसलमानों, अहमदियों, ईसाइयों, हिंदुओं और सिखों पर बढ़ते हमलों को रोकने में पाकिस्तान की नाकामी पर भी सवाल उठे। इससे दुनिया में पाकिस्तान की छवि को बड़ा झटका लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कई विदेशी मीडिया संस्थानों में पाकिस्तान समर्थक लेख और रिपोर्ट दिखाई दे सकती हैं, ताकि माहौल बदला जा सके।
आसिम मुनीर पर क्यों बढ़ रहा दबाव?
अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान इस समय पूरी तरह फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रभाव में है। लेकिन टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए के लगातार हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी आसिम मुनीर की छवि को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आम लोग महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं। इसके बावजूद सरकार करोड़ों रुपये छवि सुधारने के अभियानों पर खर्च कर रही है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर सिर्फ दुनिया में अपनी इज्जत बचाने की कोशिश कर रहा है।
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पाकिस्तान लंबे समय से खुद को दुनिया के सामने एक मजबूत देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर भी पाकिस्तान लगातार प्रचार करता रहा है। लेकिन जमीन पर हालात अलग कहानी बताते हैं। पाकिस्तान के भीतर मानवाधिकार उल्लंघन, धार्मिक असहिष्णुता और सेना के खिलाफ बढ़ते गुस्से ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोशल मीडिया के दौर में अब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से आने वाली खबरें दुनिया तक तेजी से पहुंच रही हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान अब विदेशी लॉबिंग कंपनियों के जरिए दुनिया का नजरिया बदलने की कोशिश कर रहा है।
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पाकिस्तान को लॉबिस्ट्स की जरूरत क्यों पड़ी?
अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान पहले मानता था कि वह बिना लॉबिस्ट्स के भी अपनी छवि संभाल सकता है। लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उसे दबाव समूहों और विदेशी कंपनियों का सहारा लेना पड़ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लोगों ने सेना और सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। विकास की कमी, लापता लोगों के मामले और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान से इन मुद्दों पर सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे इस्लामाबाद की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
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अमेरिका में कौन सुधार रहा है पाकिस्तान की छवि?
इसी महीने पाकिस्तान ने अमेरिका की लॉबिंग फर्म ‘एर्विन ग्रेव्स स्ट्रेटजी ग्रुप एलएलसी’ के साथ समझौता किया है। इस फर्म को हर महीने 50 हजार डॉलर दिए जाएंगे। इसका काम वॉशिंगटन में पाकिस्तान के पक्ष में माहौल तैयार करना और बड़े नेताओं व नीति निर्माताओं से संपर्क बनाना होगा। अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान पहले भी कई लॉबिंग कंपनियों के जरिए बैठकों, सेमिनारों और गोलमेज चर्चाओं का आयोजन कराता रहा है। इन कार्यक्रमों का मकसद दुनिया के सामने पाकिस्तान की सकारात्मक छवि पेश करना और देश के भीतर हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाना होता है।
अफगानिस्तान को लेकर क्या नैरेटिव बना रहा है पाकिस्तान?
पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के मुद्दे को भी अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान लगातार दावा करता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी संगठन कर रहे हैं। उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को लेकर भी अफगान तालिबान पर आरोप लगाए हैं। हालांकि अफगान तालिबान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। अब पाकिस्तान की लॉबिंग फर्मों का काम यह भी होगा कि वे अमेरिका और दूसरे देशों को यह समझाएं कि अफगानिस्तान क्षेत्रीय अस्थिरता की बड़ी वजह है और उस पर सख्ती जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने कैसे खोली पोल?
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति की रिपोर्ट ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दीं। रिपोर्ट में धार्मिक असहिष्णुता, हिंदू और ईसाई लड़कियों के कथित अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन पर गंभीर चिंता जताई गई। इसके अलावा शिया मुसलमानों, अहमदियों, ईसाइयों, हिंदुओं और सिखों पर बढ़ते हमलों को रोकने में पाकिस्तान की नाकामी पर भी सवाल उठे। इससे दुनिया में पाकिस्तान की छवि को बड़ा झटका लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कई विदेशी मीडिया संस्थानों में पाकिस्तान समर्थक लेख और रिपोर्ट दिखाई दे सकती हैं, ताकि माहौल बदला जा सके।
आसिम मुनीर पर क्यों बढ़ रहा दबाव?
अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान इस समय पूरी तरह फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रभाव में है। लेकिन टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए के लगातार हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी आसिम मुनीर की छवि को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आम लोग महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं। इसके बावजूद सरकार करोड़ों रुपये छवि सुधारने के अभियानों पर खर्च कर रही है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर सिर्फ दुनिया में अपनी इज्जत बचाने की कोशिश कर रहा है।