फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   UN children's agency UNICEF said One in Five Children Gets Exposed To Extreme Heat Globally

UN: तापमान में तेजी से बढ़ोतरी वैश्विक संकट की आहट, दुनिया में हर पांच में से एक बच्चा भीषण गर्मी की चपेट में

Wed, 14 Aug 2024 09:38 AM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 14 Aug 2024 09:38 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी यूनिसेफ के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के भयंकर असर के कारण तापमान में असामान्य रूप से बढ़ोतरी हो रही है। इस बढ़ते हुए तापमान का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। 

विज्ञापन
UN children's agency UNICEF said One in Five Children Gets Exposed To Extreme Heat Globally
Heat wave - फोटो : istock

विस्तार

पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। कहीं बहुत ज्यादा गर्मी के कारण जंगलों में आग लग रही है तो कहीं लोगों को पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है। भारत के भी कई राज्यों में गर्मी और उमस से लोग बेहाल हैं। अपने ठंडे मौसम के लिए पहचाने जाने वाले यूरोप और अमेरिका भी एतिहासिक गर्मी का सामना कर रहे हैं। इसी बीच, संयुक्त राष्ट्र ने एक डराने वाली चेतावनी जारी की है। उसके मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण करीब 50 करोड़ बच्चे हर साल अपने दादा-दादी की तुलना में दोगुने या उससे भी अधिक दिनों तक भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। 

विज्ञापन


असामान्य रूप से तापमान में हो रही बढ़ोतरी
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यानी यूनिसेफ के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के भयंकर असर के कारण तापमान में असामान्य रूप से बढ़ोतरी हो रही है। इस बढ़ते हुए तापमान का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, पांच में से एक बच्चा ऐसे इलाकों में रहता है, जहां 60 साल पहले की तुलना में हर साल कम से कम दोगुने दिन गर्म दर्ज किए जाते हैं। इनकी तादाद करीब 46.6 करोड़ है।
विज्ञापन


बच्चों में जलवायु परिवर्तन...
यूनिसेफ के मुताबिक, अगर वैश्विक स्तर पर बात की जाए तो हर पांच में से एक बच्चा भीषण गर्मी से प्रभावित है। दरअसल, बच्चों में जलवायु परिवर्तन के साथ अपने शरीर के तापमान को ढालने की क्षमता कम होती है। यूनिसेफ की एडवोकेसी प्रमुख लिली कैप्रानी ने कहा कि छोटे बच्चों के शरीर वयस्कों की तरह नहीं होते हैं, उनमें अत्यधिक गर्मी से बहुत अधिक खतरा होता है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए खतरों की भी चेतावनी दी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


आठ करोड़ बच्चे शिक्षा से वंचित
इसके अलावा, जब उच्च तापमान के कारण स्कूलों को बंद करना पड़ता है, तो बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाते हैं - जिसने 2024 में अब तक कम से कम आठ करोड़ बच्चों को प्रभावित किया है। 




यह है हीटवेव की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन इस हीटवेव की मुख्य वजह है। वहीं ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (जीएचजी), जो कोयले, गैस और तेल जैसे जीवाश्म ईंधन को जलाने से होता है, वो हीट वेव को अधिक गर्म और खतरनाक बना रहा है। वैश्विक तापमान उबाल पर है। अनुमान है कि दक्षिण एशिया के इन देशों में हर साल कम से कम 83 दिन 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान रहता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed