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रूस बनाम यूक्रेन: दोनों देशों के बीच छिड़ गई है ‘एनर्जी वॉर’, नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन बन रही रोड़ा

Sat, 13 Nov 2021 03:41 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 13 Nov 2021 03:41 PM IST
सार

जानकारों के मुताबिक हाल में यूरोपीय देशों को सीधे गैस सप्लाई करने की रूस की बढ़ रही क्षमता से यूक्रेन परेशान है। हाल में गैजप्रोम ने हंगरी को 15 साल तक हर साल 4.5 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस सप्लाई करने का समझौता किया था। यूक्रेन ने इस समझौते की भी निंदा की थी। उसने इसे अपनी राष्ट्रीय और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया था...

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Ukraine alleged Russia for blocking coal imports from Kazakhstan
यूक्रेन रूस संघर्ष - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

यूक्रेन ने कहा है कि उसका रूस के साथ ‘ऊर्जा युद्ध’ शुरू हो गया है। उसने आरोप लगाया है कि रूस ने यूक्रेन में ऊर्जा सप्लाई को बाधित करने में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। इसकी वजह से यूक्रेन में बिजली कारखानों और घरों को गर्म रखने के सिस्टम के लिए दिक्कतें पैदा हो रही हैं।

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कजाखस्तान से कोयले को यूक्रेन जाने से रोका

शुक्रवार को यूक्रेन के ऊर्जा उपमंत्री मेक्सिम नेमचिनोव ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा- ‘आज असल में हमारा रूस के साथ एक युद्ध चल रहा है। रूस कजाखस्तान से होने वाले कोयला आयात को रोक रहा है। साथ ही वह यूक्रेन की गैस परिवहन क्षमता को घटा रहा है।’ इसके पहले यूक्रेन की ऊर्जा समिति के प्रमुख आंद्रे गेरुस ने संसद में कहा कि रूस ने कजाखस्तान से कोयले को अपने रेलवेज के माध्यम से यूक्रेन जाने से रोक दिया है।

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हालांकि कजाख अधिकारियों ने यूक्रेन के इस आरोप का खंडन किया है, लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेन्स्की ने रूस से जर्मनी तक बनी नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन पर प्रतिबंध लगवाने की मुहिम छेड़ दी है। इसकी शुरुआत उन्होंने ट्विटर कैंपेन से की। रूस से जर्मनी तक बनी पाइपलाइन यूक्रेन की जमीन से नहीं गुजरेगी। इस तरह इसके जरिए रूस सीधे यूरोप को अपनी गैस सप्लाई करने में सक्षम हो जाएगा। जेलेन्स्की ने ये मांग फिर से उठाई है कि अमेरिकी कांग्रेस इस पाइपलाइन पर प्रतिबंध लगाए, क्योंकि उसकी वजह से यूक्रेन के गैस का कारोबार प्रभावित होगा।

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ऊर्जा कंपनी गैजप्रोम ने किया खंडन

कजाख अधिकारियों ने कहा है कि रूस ने जानबूझ कर यूक्रेन के लिए उनके कोयले के निर्यात में रुकावट खड़ी नहीं की है। बल्कि सप्लाई में देरी रूस में इन्फ्रास्ट्रक्चर संबंधी दिक्कतों की वजह से हो रही है। उधर रूस की ऊर्जा कंपनी गैजप्रोम ने खंडन किया है कि उसने यूक्रेन में गैस परिवहन संबंधी अधिक क्षमता को खरीद लिया है। गैस परिवहन लाइन सोवियत संघ के दौर में बनी थी। अब इसके कितने हिस्से का उपयोग रूस और यूक्रेन करेंगे, यह कोटा तय है।


रूस का आरोप है कि यूक्रेन का गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर पुराना पड़ गया है। यह बढ़ी मांग के मुताबिक गैस परिवहन में अक्षम हो गया है। रूसी अधिकारियों ने कहा है कि यूक्रेन के इस सिस्टम का आधुनिकीकरण करने में नाकाम रहने का भविष्य में खराब असर देखने को मिलेगा। उससे पाइपलाइन की क्षमता के साथ-साथ सुरक्षा भी खतरे में पड़ेगी।  

जानकारों के मुताबिक हाल में यूरोपीय देशों को सीधे गैस सप्लाई करने की रूस की बढ़ रही क्षमता से यूक्रेन परेशान है। हाल में गैजप्रोम ने हंगरी को 15 साल तक हर साल 4.5 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस सप्लाई करने का समझौता किया था। यूक्रेन ने इस समझौते की भी निंदा की थी। उसने इसे अपनी राष्ट्रीय और ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरनाक बताया था।


नॉर्ड स्ट्रीम-2 पाइपलाइन को रुकवाने की यूक्रेन की मंशा भी पूरी नहीं हुई। जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल इसे पूरा करवाने पर आडिग रहीं। उनके दबाव में जो बाइडन प्रशासन ने भी इसे हरी झंडी दे दी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अब ताजा संकट का इस्तेमाल जेलेन्स्की एक बार फिर अमेरिका में इस पाइपलाइन के खिलाफ माहौल बनाने के लिए कर रहे हैं।

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