ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक जी-20 के वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए इंडोनेशिया रवाना हो गए हैं। सुनक ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर इस साल जी-20 से 'पुतिन के शासन को हटाने का संकल्प' लिया है। बता दें कि जी-20 देशों में ब्रिटेन के अलावा रूस भी शामिल है। दुनिया की 20 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के इस समूह की अध्यक्षता 1 दिसंबर से भारत करेगा।
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी के साथ पहली बैठक
2 of 5
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : एजेंसी (फाइल फोटो)
जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सुनक के साथ मुलाकात हो सकती है। पिछले महीने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद ऋषि सुनक की मोदी के साथ पहली बैठक होगी। बाली के लिए रवाना होने से पहले सुनक ने एक बयान में कहा, "व्लादिमिर पुतिन के युद्ध ने दुनियाभर में तबाही मचाई है और जीवन को नष्ट किया है। अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को उथल-पुथल में डाल दिया है।"
बाली रवाना होने से पहले सुनक ने दिया ये बयान
3 of 5
Rishi Sunak, ऋषि सुनक
- फोटो : twitter/@Rishi Sunak
सुनक ने आगे कहा, यह जी-20 शिखर सम्मेलन हमेशा की तरह व्यवसायिक नहीं होगा। हम जी-20 जैसे संप्रभु मंचों से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सम्मान के लिए पुतिन के शासन को हटाने का आह्वान करेंगे। पुतिन के व्यवधान के विपरीत ब्रिटेन और उसके सहयोगी आने वाली आर्थिक चुनौतियों को हल करने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
शिखर सम्मेलन में पुतिन नहीं, सर्गेई लावरोव होंगे शामिल
4 of 5
व्लादिमीर पुतिन
- फोटो : एजेंसी (फाइल फोटो)
जी-20 के पूर्ण सम्मेलन में सुनक का रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से सामना होगा। मंगलवार को सभी सदस्यों के भाग लेने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डाउनिंग स्ट्रीट ने शिखर सम्मेलन की तैयारी यह मानकर की थी कि वहां रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन होंगे। लेकिन मॉस्को ने पिछले हफ्ते खुलासा किया कि वह इसमें शामिल नहीं होंगे और उनकी जगह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को भेजेंगे।
बैठक में रूस की कार्रवाई पर चर्चा होना तय
5 of 5
यूक्रेन संकट
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 2008 के आर्थिक संकट के बाद से वार्षिक बैठकें शुरू की गई थीं। अगले सप्ताह होने वाली बैठक में 2008 के बाद से रूस-यूक्रेन संकट के कारण पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। जी-20 के सदस्य देशों की बैठक में रूस की कार्रवाई पर चर्चा होना तय है। इसके बारे में पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं का मानना है कि इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अराजकता फैला दी है। उर्जा और खाद्य कीमतें आसमान छू रही हैं।