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US: नौ जुलाई से पहले अमेरिका के साथ टैरिफ पर बन जाएगी बात! ट्रंप ने भारत के साथ 'बड़े समझौते' के दिए संकेत
Fri, 27 Jun 2025 02:38 AM IST
शिव शुक्ला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 27 Jun 2025 02:38 AM IST
सार
ट्रंप की यह टिप्पणी तब आई जब व्हाइट हाउस में वे एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सरकारी खर्च विधेयक को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि हमने अभी चीन के साथ (व्यापार समझौते) पर हस्ताक्षर किए हैं। हम हर किसी के साथ सौदे नहीं करने जा रहे हैं, लेकिन हम कुछ बेहतरीन सौदे कर रहे हैं।
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : वीडियो ग्रैब/एक्स/व्हाइट हाउस/एएनआई
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विस्तार
टैरिफ मुद्दे पर चीन के साथ तनाव के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ने चीन के साथ एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि ट्रंप ने यह साफ नहीं किया है कि चीन और अमेरिका के बीच किस तरह का सौदा हुआ है।
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ट्रंप ने बिग ब्यूटीफुल बिल कार्यक्रम में व्यापार समझौतों की ओर इशारा करते हुए ट्रंप ने कहा कि हर कोई हमसे सौदा करना चाहता है और उसका हिस्सा बनना चाहता है। कुछ महीने पहले याद कीजिए मीडिया पूछ रही थी कि 'क्या वाकई कोई ऐसा है जिसे कोई दिलचस्पी हो? हमने कल ही चीन के साथ हस्ताक्षर किए हैं । हम कुछ बेहतरीन सौदे कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि हम शायद भारत के साथ भी एक सौदा करने जा रहे हैं, एक बहुत बड़ा सौदा। हम भारत को खोलने जा रहे हैं। ऐसी चीजें जो वास्तव में कभी नहीं हो सकती थीं। हर देश के साथ संबंध बहुत अच्छे रहे हैं।
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इस दौरान ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अन्य किसी देश के साथ समझौते नहीं किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि हम हर किसी के साथ सौदा नहीं करने जा रहे हैं। कुछ लोगों को हम बस एक पत्र भेजकर बहुत-बहुत धन्यवाद कहेंगे। और उनसे कहेंगे कि आपको 25, 35, 45 प्रतिशत का भुगतान करना होगा। यह आसान तरीका है।
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चीन के साथ इस माह की शुरुआत में बनी थी सहमति
इससे पहले जून की शुरुआत में चीन और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर सहमति बनी थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ट्रुथ शोसल पर इसका एलान किया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा था कि 'हमारा चीन के साथ सौदा हो गया है, जो शी और मेरी अंतिम मंजूरी के अधीन है। चीन की ओर से सभी जरूरी रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) पहले से ही सप्लाई किए जाएंगे। इसी तरह, अमेरिका चीन को वह सब कुछ देगा, जो तय हुआ है – जिसमें चीनी छात्रों को हमारे कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में पढ़ने की इजाजत देना भी शामिल है (जो मुझे हमेशा ठीक लगा है)। रिश्ता शानदार है! धन्यवाद!' गौरतलब है कि इससे पहले जिनेवा में हुई बातचीत के दौरान दोनों देशों ने 90 दिनों के लिए टैरिफ पर रोक लगाने की घोषणा की थी।
भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी
वहीं, भारत और अमेरिका के बीच एक अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों देश इस समझौते को 9 जुलाई से पहले अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका ने 2 अप्रैल को भारत से आने वाले सामानों पर 26 फीसदी अतिरिक्त कर (टैरिफ) लगाने का एलान किया था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इसे 90 दिनों के लिए टाल दिया था। हालांकि, 10 फीसदी का मूल टैक्स अभी भी लागू है। भारत चाहता है कि उसे इस 26 फीसदी अतिरिक्त कर से पूरी तरह छूट मिल जाए।
एक-दूसरे से क्या चाहते हैं भारत और अमेरिका
भारत चाहता है कि प्रस्तावित 26 फीसदी शुल्क वापस लिया जाए और स्टील व ऑटो पार्ट्स पर पहले से लगे अमेरिकी शुल्कों में छूट मिले। मगर अमेरिका पहले भारत से सोयाबीन, मक्का, कार और शराब पर आयात शुल्क घटाने और गैर-शुल्क बाधाओं को आसान करने की प्रतिबद्धता चाहता है।
पीएम मोदी की रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं और चाहते हैं कि एप्पल जैसी कंपनियां चीन के बजाय भारत में उत्पादन करें। वे चीन से अलग आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना चाहते हैं। भारत ने बादाम, पिस्ता और अखरोट पर शुल्क में छूट की पेशकश की है और ऊर्जा, रक्षा व ऑटो क्षेत्रों में अमेरिकी आयात को विशेष प्राथमिकता देने की इच्छा जताई है। लेकिन कई दौर की वार्ता के बावजूद व्यापार वार्ता में खास प्रगति नहीं हुई है।
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दीर्घकालिक साझेदारी पर है भारत का जोर
भारतीय अधिकारी कहते हैं कि भारत अमेरिका को विश्वसनीय आर्थिक दीर्घकालिक साझेदार मानता है, लेकिन नीतिगत स्वतंत्रता बनाए रखेगा। फरवरी में मोदी और ट्रंप ने 2025 की शरद ऋतु तक पहले चरण का व्यापार समझौता पूरा करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जो 2024 में191 अरब डॉलर था।
देश टैरिफ झटका सहने को तैयार
सबसे खराब स्थिति में भी अगर वार्ता असफल होती है, तो भी भारत को भरोसा है कि वह इसका असर सह सकता है क्योंकि वियतनाम और चीन जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में उसके पास अभी भी टैरिफ लाभ है। भारत का अप्रैल–मई में अमेरिका को निर्यात बढ़कर 17.25 अरब डॉलर हो गया। यह बीते साल14.17 अरब डॉलर था। यह दिखाता है कि अप्रैल की शुरुआत में अमेरिका की औसतन 10 फीसदी टैरिफ वृद्धि का असर सीमित रहा है।
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