नेपाल बाढ़ की डरावनी आपबीती: आंखों के सामने बहे घर और अपने, किसी ने पकड़ा तार तो किसी ने जंगल में भाग बचाई जान
नेपाल की बाढ़ ने कई जिंदगियां खत्म कर दी। किसी ने आंखों के सामने अपना घर और परिवार खो दिया, तो किसी ने दोस्तों को खो दिया। कई लोग मौत से बच तो गए, लेकिन अपनों की तलाश अब भी कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि इस त्रासदी से जिंदा बचे लोगों ने उस दिन की तबाही के बारे में क्या बताया है।
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विस्तार
नेपाल में बुधवार को आई तबाही के बाद अब बचे हुए लोग उस खौफनाक मंजर की आपबीती बता रहे हैं। किसी ने अपनी आंखों के सामने पानी और मलबे को घरों की ओर बढ़ते देखा, तो किसी ने भागकर अपनी जान बचाई। हादसे के बाद लोगों के चेहरों पर डर और तबाही की तस्वीर साफ नजर आ रही है।
बाढ़ से बचे लोगों ने बेहद डरावने मंजर बयां किए हैं। कोई ऊंची जगहों की ओर बेताब होकर भागना। अपने आस-पास घरों का गिरना और पानी, कीचड़ और मलबे के तेज बहाव में लोगों का बह जाना देखा। कुछ लोगों की जान ऊंची जगहों की ओर तेजी से भागने की वजह से बची। दूसरों ने बेबस होकर अपने दोस्तों और अपनों को बहते हुए देखा, जबकि जो लोग बाद में प्रभावित इलाकों में पहुंचे, उन्होंने बाजारों को कीचड़ में दबा हुआ और परिवारों को अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश करते हुए पाया।
त्रासदी से बचे दीपक ने क्या बताया?
इस त्रासदी से बचे दीपक तमांग ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने लगा कि जमीन हिल रही है। फिर उन्होंने देखा कि पानी कीचड़ और पत्थरों की एक दीवार तिमुरे बाजार में भोटेकोशी नदी के किनारे बने घरों की ओर तेजी से बढ़ रही है। उन्हें एहसास हुआ कि ऊपर जाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
'पीछे बाढ़, आगे पहाड़'
पड़ोसी सिंधुपलचोक जिले के रहने वाले तमांग, नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बसे शहर तिमुरे में थे, जब बुधवार को अचानक बाढ़ आ गई। नेपाली न्यूज पोर्टल 'ऑनलाइनखबर' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया, 'जब मैं घर से बाहर निकला और पहाड़ी की ओर ऊपर भागा, तो तेज बाढ़ की वजह से कुछ घर पहले ही गिर चुके थे। मेरे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे। मेरे पीछे बाढ़ थी और सामने दीवार जैसी पहाड़ी थी।'
'दोस्त को पानी में बहता देखा'
नीचे बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा था और लोग अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे थे। हर बार जब वह गिरते, तो तमांग को लगता कि शायद यह उनकी जिंदगी का आखिरी पल है। आखिरकार, वह पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गए। वहां से उन्होंने लोगों को बाढ़ में बहते हुए देखा। उनमें उनके दोस्त भी शामिल थे। उन्होंने याद करते हुए कहा, 'जब मेरे दोस्त मेरी आंखों के सामने लहरों में बह गए, तो मैं कुछ नहीं कर सका।'
आखिरकार तमांग को जंगल में लकड़ी रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक पुराना गोदाम मिला, जहां अपनी जान बचाने में कामयाब रहे दर्जनों अन्य लोगों ने भी शरण ली थी। बारिश होती रही और वह बिना बिस्तर के वहीं रात बिताते हुए बचाव दल का इंतजार करते रहे। लगभग 24 घंटे बाद उन्हें बचाया गया।
फोटो जर्नलिस्ट अमूल थापा ने क्या बताया?
बाढ़ के कुछ ही समय बाद त्रिशूली पहुंचे फोटो जर्नलिस्ट अमूल थापा के लिए तबाही का मंजर समझना लगभग नामुमकिन था। नेपाली दैनिक 'नया पत्रिका' में अपनी यात्रा के बारे में लिखते हुए थापा ने बताया कि उत्तरगया बोर्डिंग स्कूल के कुछ छात्रों के बारे में भी लोगों को बात करते सुना, जो लापता हो गए थे और बाद में छह घंटे तक जंगल से चलकर अपने स्कूल वापस लौटे थे। शुक्रवार दोपहर तक, चितवन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पास शव ले जाने वाली एम्बुलेंस आ-जा रही थीं। थापा ने लिखा कि बाढ़ में रसुवा से बहकर आए कुछ शव नारायणी नदी से बरामद किए गए थे।
भारतीय-अमेरिकी दंपत्ति ने क्या बताया?
इस आपदा में फंसे लोगों में भारतीय-अमेरिकी दंपत्ति अंजना राजा और पट्टाभिरामन् वेंकटेशन भी शामिल थे, जो नेपाल में फंस गए थे और बाद में उन्हें बचाकर एयरलिफ्ट के जरिए काठमांडू ले जाया गया।
राजा ने सीबीएस न्यूज को बताया, 'मुझे पता था कि मैं मरने वाली हूं।'
पानी की तुलना सांप से की
वेंकटेशन ने कहा कि मलबे की जो दीवार उनकी तरफ आ रही थी, वह लगभग 60 से 70 फीट ऊंची लग रही थी और सुनामी जैसी दिख रही थी। उन्होंने कहा, ;मैं उस भयानक चीज को नीचे आते हुए देख सकता था। उस समय मुझे नहीं पता था कि वह पानी है। सच कहूं तो, मुझे लगा कि वह आग है, जंगल की आग है।' उन्होंने कहा, 'यह कीचड़ मिला हुआ पानी था जो कम से कम 50 से 60 फीट ऊंचा था।' इसकी तुलना एक सांप या कोबरा के फन से की जो उन्हें घूर रहा हो।
'बिजली का तार पकड़ बचाई जान'
काठमांडू रिपोर्ट के अनुसार, 'रौतहट की राजदेवी म्युनिसिपैलिटी-2 के हजमिनिया के रहने वाले 36 साल के रामबच्चन साह ने बताया कि वह पुल के पास श्याम स्वीट शॉप में 15 साल से काम कर रहे थे। बुधवार सुबह वे मिठाइयां बना रहे थे, तभी अचानक बाढ़ का पानी दुकान में घुस आया।
पानी की तेज धार उन्हें बहा ले गई। तभी उनका हाथ बिजली के एक तार से जा टकराया। उन्होंने कहा, 'मैं तार को पकड़कर बच गया। मुझे नई जिंदगी मिली।' वे लगभग आधे घंटे तक तार से लटके रहे, जबकि नीचे बाढ़ का पानी उफान मार रहा था।
'मैं तो बच गया, लेकिन अपने मामा का पूरा परिवार खो दिया'
झापा के सचिन खाती इसलिए बच पाए क्योंकि जब बाढ़ आई, तो वे उस बस्ती से दूर थे। उनके मामा, झापा के बुद्धाशांति-2 के रहने वाले 33 साल के राज कुमार दियाली गहनों का कारोबार कर रहे थे। वे वहां अपनी पत्नी श्रिति और चार साल के बेटे श्रीराज के साथ रहते थे। सचिन भी उनके साथ रह रहे थे और कारोबार में मदद कर रहे थे।
बुधवार सुबह, राज कुमार ने सचिन को काम के सिलसिले में चिलीमे भेजा। जब सचिन को बाढ़ के बारे में पता चला, तो वे तुरंत वापस लौटे। जब तक वे पहुंचे, वह बस्ती बह चुकी थी जहां वे रहते थे।
राज कुमार की भतीजी राधा खाती ने रोते हुए कहा, 'काश हमें कम से कम उनके शव मिल जाते, भले ही वे जिंदा न मिलें। पूरा परिवार उनका इंतजार कर रहा है।'
'नौ कंटेनर ट्रक और ड्राइवर बह गए'
नेपाल में बाढ़ से बचने वाले राज कुमार कार्की ने बताया कि उन्होंने बाढ़ से आगे ट्रक चलाकर अपनी जान बचाई। उनके पीछे आ रहे करीब नौ कंटेनर ट्रक और ड्राइवर बह गए। पहाड़ी पर ट्रक ले जाने से उनकी जान बची, लेकिन आंखों के सामने तबाही और दोस्तों के बहने का मंजर नहीं भूल पा रहे।
'मुझे नई जिंदगी मिली है'
नेपाल में बाढ़ से बचे 40 वर्षीय गथे कामी ने बताया कि पहाड़ से पत्थरों के गिरने जैसी आवाज सुनाई दी। तभी भोटेकोशी नदी का पानी तेजी से उनकी ओर बढ़ता दिखा। उन्होंने लोगों को भागने के लिए कहा और जंगल की पहाड़ी पर चढ़ गए। कुछ देर बाद होश आया तो नीचे बस्ती मलबे में दब चुकी थी। कामी बोले, ‘आज भी लगता है जैसे सपना था। ऐसा लगता है, मुझे नई जिंदगी मिली है।’
'जंगल की वजह से बची जान'
नेपाल में बाढ़ से बचे राजू बुधाथोकी ने बताया कि सुबह करीब 8:45 बजे वह तिमुरे में अपने कमरे में सो रहे थे, तभी पहाड़ जोर-जोर से हिलने लगा। उन्होंने इसे भूकंप जैसा महसूस किया। बिना समय गंवाए वह बाहर भागे। पुलिस चौकी की ओर जाते समय उन्होंने पुलिसकर्मियों को भी भागते देखा। पीछे मुड़कर देखा तो तिमुरे के घर बाढ़ में बह रहे थे और कुछ सेकंड में त्रिशूली नदी में समा गए। राजू करीब 500 मीटर ऊपर जंगल में पहुंचे, जहां उनकी जान बची। उन्होंने कहा, ‘जंगल की ओर भागना ही मेरी जिंदगी बचाने वाला फैसला था। यह सब किसी बुरे सपने जैसा लगता है।’
'बाढ़ में बहते शव और तबाह बस्ती देखी'
नेपाल में बाढ़ से बचे प्रकाश गौतम ने बताया कि तेज आवाज के बाद पूरा तिमुरे अंधेरे में डूब गया और आसमान पर काला बादल छा गया। जान बचाने के लिए वह जंगल की ओर भागे और पैर में चोट लग गई। जंगल से उन्होंने बाढ़ में बहते शव और तबाह बस्ती देखी। सेना के हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकलने के बाद बोले, ‘मैं नई जिंदगी लेकर वापस आया हूं।’