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US: 'ट्रंप को श्रेय लेने की आदत', भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम में मध्यस्थता के दावे पर बोले पूर्व अमेरिकी NSA

Wed, 21 May 2025 08:50 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: बशु जैन Updated Wed, 21 May 2025 08:50 PM IST
सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत पाकिस्तान संघर्ष विराम में उन्होंने मध्यस्थता की थी। उनके इस दावे को भारत ने खारिज कर दिया था। अब पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने कहा कि ट्रंप को श्रेय लेने की आदत है।

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'Trump has a habit of taking credit', former US NSA said on the claim of mediation in India-Pakistan ceasefire
जॉन बोल्टन, पूर्व अमेरिकी एनएसए - फोटो : ANI/वीडियो ग्रैब

विस्तार

भारत पाकिस्तान संघर्ष विराम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावे पर पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने तंज कसा है। बोल्टन ने कहा कि ट्रंप को श्रेय लेने की आदत है। यह भारत के लिए व्यक्तिगत नहीं है। 
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उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप हर चीज का श्रेय लेते हैं। मुझे लगता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत की थी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी इस बातचीत में शामिल थे। मुझे यकीन है कि यह ठीक वैसा जैसा होगा, जैसे अन्य देश भी यह देखने के लिए कॉल कर रहे हैं कि वे क्या कर सकते हैं। ट्रंप की खासियत है, वह हर किसी के श्रेय लेने से पहले ही कूद पड़ते हैं। यह परेशान करने वाला हो सकता है। लेकिन यह भारत के खिलाफ कुछ नहीं है। यह सिर्फ ट्रंप का ट्रंप होना है।
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बोल्टन ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के अंदर उन स्थानों के खिलाफ आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार था, जहां से आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी और उसे अंजाम दिया गया था। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है जब कोई देश अपने क्षेत्र में चल रही आतंकवादी गतिविधि को नियंत्रित नहीं कर सकता है तो साफ है कि शायद वह इसमें योगदान दे रहा है। 

उन्होंने कहा कि भारत की कार्रवाई पूरी तरह से उचित थी, लेकिन इससे सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तानी सरकार को यह समझाने की कोई संभावना है कि यह उनके हित में नहीं है और अगर वे इसे नियंत्रित नहीं करते हैं तो उनके लिए इससे भी बदतर परिणाम हो सकते हैं। 

बोल्टन ने कहा कि यह लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है, लेकिन संघर्ष विराम पर सहमति बनने से पहले भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव, सैन्य प्रतिक्रिया और आगे-पीछे होना 2019 में जो हुआ उससे कहीं ज़्यादा था। पाकिस्तान को आपूर्ति किए गए चीनी सैन्य विमान पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में प्रमुख थे और यह पाकिस्तान के अंदर बढ़ते चीनी प्रभाव को दर्शाता है, जो निश्चित रूप से भारत के लिए खतरा बढ़ाता है।

मुनीर को फील्ड मार्शल बनाना पाकिस्तान के लिए अच्छा नहीं
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल मुनीर को फील्ड मार्शल बनाए जाने पर पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने कहा,  कि मुझे लगता है कि यह संभावित रूप से परेशान करने वाला संकेत है। पाकिस्तान में आंतरिक असंतोष को दबा दिया गया है। इमरान खान जेल में हैं। मुझे नहीं लगता कि यह पाकिस्तान के हित में है। यह कुछ ऐसा है जिस पर अमेरिकी सरकार को जोर देना चाहिए। यहां शत्रुता का निरंतर स्तर पाकिस्तान के विकास में बाधा डालेगा। मुझे चिंता है कि यह चीन के लिए इन घटनाक्रमों का लाभ उठाने का एक और अवसर है जो उन्हें पाकिस्तान के अंदर अतिरिक्त लाभ प्रदान करता है।


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टीआरएफ को प्रतिबंधित कराना जरूरी
पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाला टीआरएफ को संयुक्त राष्ट्र में आतंकी संगठन घोषित कराने के भारत के प्रयास पर जॉन बोल्टन ने कहा कि जब भी आप संयुक्त राष्ट्र से किसी को आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दिलवाते हैं, तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटनाक्रम होता है। भारत द्वारा ऐसा करने की कोशिश करना उचित है। मुझे लगता है कि यह एक अच्छा प्रयास का भी हिस्सा है। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि जब वह किसी आतंकी हमले के लिए जवाबी कार्रवाई करता है, तो सभी तथ्यों को सार्वजनिक रूप से सामने लाना और दुनिया को यह दिखाना महत्वपूर्ण है कि यह क्यों उचित है। 

परमाणु हथियार की सुरक्षा प्राथमिकता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तान की परमाणु हथियारों से निपटने की क्षमता का जवाब देने पर बोल्टन ने कहा कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए दुनिया में कहीं भी बहुत उच्च प्राथमिकता है। मैंने 9/11 के दौरान जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन में काम किया था और तत्कालीन विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल के साथ पाकिस्तान और फिर भारत गया था। कॉलिन पॉवेल ने तत्कालीन पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ विशेष रूप से जो विषय उठाए थे, उनमें से एक यह था कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमता कितनी सुरक्षित है। यह हमेशा एक चिंता का विषय रहा है और पाकिस्तान के साथ भारत की आम सीमा को देखते हुए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण चिंता का विषय है। हम कभी नहीं कह सकते कि हमने इसे नियंत्रण में कर लिया है, क्योंकि इन परमाणु हथियारों के आतंकवादियों या गैर-जिम्मेदार कमांडरों के हाथों में पड़ने का जोखिम परमाणु हथियारों के उपयोग के बारे में अपने स्वयं के निर्णय लेने से बहुत खतरनाक होगा।

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