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कहां है मसूद अजहर?: भारतीय एजेंसियों ने ढूंढे आतंकी सरगना के ठिकाने, आईएसआई उसे क्यों अफगानिस्तान नहीं भेज पाई
Tue, 15 Sep 2026 03:05 PM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 15 Sep 2026 03:05 PM IST
सार
पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया है और दावा किया है कि वह अफगानिस्तान में छिपा है। इसके उलट भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि अजहर पाकिस्तान में ही है और सुरक्षा कारणों से उसे लगातार अलग-अलग ठिकानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।
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जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये की नई इनामी राशि घोषित की है। FIA का कहना है कि आतंकी सरगना अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, खुफिया एजेंसियां और पाकिस्तान पर नजर रखने वाले वैश्विक जानकार इस दावे को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की निगरानी से बचने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। उनका मानना है कि पाकिस्तान अजहर के खिलाफ कार्रवाई का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि उसके वास्तविक ठिकाने को अंतरराष्ट्रीय जांच और निगरानी से दूर रखना चाहता है।
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FATF की निगाहों के बीच पाकिस्तान का नया दांव
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब आतंकवाद की फंडिंग और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है। सुरक्षा अधिकारियों और पाकिस्तान मामलों के जानकारों का कहना है कि इनाम की रकम बढ़ाने का मकसद मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दिखावा करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जाए कि पाकिस्तान उसके खिलाफ कदम उठा रहा है। FIA ने इनाम की घोषणा करते हुए दोहराया कि अजहर अफगानिस्तान में है और पाकिस्तान में नहीं। हालांकि, अफगान तालिबान इस दावे को कई बार खारिज कर चुका है।
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भारतीय एजेंसियों का दावा- पाकिस्तान में ही है मसूद अजहर
भारतीय खुफिया अधिकारियों का दावा इससे बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि मसूद अजहर पाकिस्तान में ही मौजूद है। एक इंटेलिजेंस ब्यूरो अधिकारी के मुताबिक, भारतीय एजेंसियों की ट्रैकिंग से लगातार संकेत मिले हैं कि अजहर पाकिस्तान में है। अधिकारी ने बताया, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह बहावलपुर में ही था, लेकिन जैश-ए-मोहम्मद के उस मुख्यालय में नहीं था, जिसे निशाना बनाया गया था। ऑपरेशन के समय उसे तत्काल रावलपिंडी स्थित कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया था। वह समय-समय पर इसी अस्पताल में आता-जाता रहा है, क्योंकि वह लंबे समय से किडनी फेल्योर की बीमारी से जूझ रहा है।'
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार बदले ठिकाने
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद मसूद अजहर को पाकिस्तान के भीतर कई बार एक जगह से दूसरी जगह ले जाया गया। ऑपरेशन के बाद से जैश प्रमुख दोबारा बहावलपुर नहीं लौटा है। इसके बजाय उसे कम से कम तीन से चार अलग-अलग ठिकानों के बीच लगातार स्थानांतरित किया गया है। अधिकारी के मुताबिक, 'सुरक्षा कारणों से उसे कभी भी लंबे समय तक एक ही जगह पर नहीं रखा जाता। जब वह रावलपिंडी के अस्पताल में था, उस दौरान एक रहस्यमयी विस्फोट हुआ था, जिसमें उसे मामूली चोटें आई थीं।'
ISI को क्यों है मसूद अजहर की जरूरत?
भारतीय अधिकारियों का कहना है कि अजहर को बार-बार शिफ्ट करने की वजह केवल उसकी सुरक्षा नहीं है, बल्कि FATF का बढ़ता दबाव भी है। उनका मानना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) किसी भी स्थिति में मसूद अजहर को खोना नहीं चाहती, खासकर ऐसे समय में जब जैश-ए-मोहम्मद अपने संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। अजहर लगातार ऑडियो संदेश जारी कर अपने कैडर और संभावित नए सदस्यों से भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने और बहादुरी से मुकाबला करने की अपील करता रहा है। अधिकारियों का कहना है, 'वह एक बेहद प्रभावशाली और ध्रुवीकरण करने वाला चेहरा है। ISI उसे सुरक्षित रखना चाहती है। इसके अलावा तालिबान के साथ पाकिस्तान के संबंध जिस तरह खराब हुए हैं, उसे देखते हुए पाकिस्तान के लिए अजहर को अफगानिस्तान भेजना लगभग असंभव है।'
नवाबशाह से रावलपिंडी तक, इन ठिकानों पर नजर
एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, भारतीय खुफिया एजेंसियों की ट्रैकिंग से पता चलता है कि मसूद अजहर को अक्सर सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में एक सुरक्षित ठिकाने पर रखा जाता है। इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के स्कार्दू में भी उसका एक सेफ हाउस बताया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा हालात में अजहर को PoK से दूर रखा जा रहा है और उसे दोबारा नवाबशाह ले जाया गया है। फिलहाल उसके नवाबशाह और रावलपिंडी के बीच लगातार स्थान बदलने की बात सामने आई है।
PoK में विरोध प्रदर्शन के बाद बदली भर्ती रणनीति
PoK में जारी विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान की आतंकी भर्ती रणनीति को भी प्रभावित किया है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ISI ने PoK में भर्ती रोक दी है और अब पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों से युवाओं को आतंकवादी संगठनों में शामिल करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के लिए पाकिस्तान के अन्य इलाकों से युवाओं को तैयार करने की कोशिश की जा रही है। इसी रणनीतिक बदलाव के तहत मसूद अजहर को भी PoK से दूर करके नवाबशाह भेजे जाने की बात कही जा रही है।
पाकिस्तान और तालिबान के बीच तनाव, इसलिए अफगानिस्तान भेजना मुश्किल
पाकिस्तान मामलों के जानकारों का कहना है कि FIA की ओर से बढ़ाई गई इनामी राशि का मकसद FATF को गुमराह करना हो सकता है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान का यह दावा विश्वसनीय नहीं है कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में मौजूद है। विशेषज्ञों का तर्क है कि पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच संबंध इस समय बेहद तनावपूर्ण हैं। ऐसे हालात में ISI के लिए अजहर को अफगानिस्तान भेजना और वहां सुरक्षित रखना बड़ा जोखिम होगा। इसलिए उसके पाकिस्तान में ही छिपे होने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है।
2021 में भी घोषित हुआ था 50 लाख का इनाम
मसूद अजहर पर FIA की ओर से इनाम घोषित किए जाने का यह पहला मामला नहीं है। साल 2021 में भी FIA ने उस पर 50 लाख पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया था। उस समय भी पाकिस्तान ने दावा किया था कि अजहर उसकी जमीन पर मौजूद नहीं है। हालांकि, 2021 में इनाम घोषित किए जाने के बाद भी जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर की गतिविधियों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला।
जैश ने बदली रणनीति, प्रॉक्सी संगठनों का सहारा
मसूद अजहर ने जम्मू-कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद की रणनीति में भी बदलाव किया है। संगठन ने हाइब्रिड वॉरफेयर की ओर रुख किया है और अपनी गतिविधियों के लिए प्रॉक्सी संगठनों का इस्तेमाल बढ़ाया है। FATF की निगरानी से बचने के लिए जैश ने पीपुल्स एंटी फासिस्ट फ्रंट (PAFF) जैसे प्रॉक्सी आतंकी संगठनों के नाम का इस्तेमाल किया। PAFF ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी के घने जंगलों में भारतीय सुरक्षा बलों पर हुए कई घातक हमलों की जिम्मेदारी भी ली है।
FATF बैठक तक अजहर को 'लो प्रोफाइल' रखने की तैयारी
अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा रणनीति दोहरी है। एक तरफ वह मसूद अजहर को सुरक्षित रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर उसे FATF की नजरों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है।अजहर पहले अपने कैडर का मनोबल बढ़ाने के लिए लगातार ऑडियो संदेश जारी करता रहा है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि ISI ने फिलहाल उसे ऐसे संदेश जारी करना बंद करने के लिए कहा है, ताकि उसकी मौजूदगी और गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा ध्यान न जाए।
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26 से 30 अक्टूबर तक होने वाली बैठक पर नजर
एक अधिकारी ने कहा कि इस्लामाबाद फिलहाल ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, जिससे यह लगे कि मसूद अजहर पाकिस्तान से बाहर है और उसका पाकिस्तान से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, यह रणनीति कम से कम तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक 26 से 30 अक्टूबर के बीच पेरिस में होने वाली FATF की बैठक पूरी नहीं हो जाती। पाकिस्तान की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश दिया जाए कि उसने अजहर के खिलाफ कार्रवाई की है और वह देश में मौजूद नहीं है। हालांकि, भारतीय खुफिया एजेंसियों के दावे और पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच मौजूदा तनाव इस कहानी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।