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US Tariffs: ट्रंप प्रशासन ने स्मार्टफोन और लैपटॉप को टैरिफ से दी छूट, जानें किन-किन चीजों पर मिलेगी छूट?

Sat, 12 Apr 2025 08:57 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 12 Apr 2025 08:57 PM IST
सार

US Tariffs: ट्रंप प्रशासन की तरफ से कुछ इलेक्ट्रॉनिक सामानों को टैरिफ से छूट दी है। इस फैसले से आम जनता के साथ-साथ बड़ी टेक कंपनियों भी फायदा होगा। जानकारी के मुताबिक, इन उत्पादों की ज्यादा मांग अमेरिका में होती है और अन्य देशों में इसका उत्पादन होता है, इससे अमेरिकी लोगों को ये सामान महंगे दामों पर मिलते।

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Trump administration says will exclude some electronics from 'reciprocal' tariffs, News in Hindi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को कहा कि कुछ खास इलेक्ट्रॉनिक सामानों को परस्पर शुल्क से छूट दी जाएगी। इसमें स्मार्टफोन, लैपटॉप और कुछ अन्य तकनीकी उपकरण भी शामिल हैं। इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है, क्योंकि इन सभी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका अब कम हो गई है।
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किन चीजों को मिलेगी छूट?
अमेरिकी कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग के अनुसार, कई वस्तुओं को टैरिफ से छूट दी गई है:-
  • स्मार्टफोन  
  • लैपटॉप  
  • सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनें  
  • फ्लैट-पैनल मॉनिटर (जैसे LED स्क्रीन)
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इस फैसले से किसे होगा फायदा?
इस फैसले से आम जनता को फायदा होगा, क्योंकि स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसी रोजमर्रा की तकनीकी चीजें महंगी नहीं होंगी। इसके अलावा बड़ी टेक कंपनियों जैसे एप्पल और सैमसंग को भी राहत मिलेगी, क्योंकि उनके बहुत से उत्पाद अमेरिका में नहीं बनते और वे दूसरे देशों से इन्हें आयात करते हैं।
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प्रशासन की तरफ से क्यों लिया गया फैसला?
इन उत्पादों की ज्यादा मांग अमेरिका में होती है, लेकिन इनका उत्पादन अधिकतर चीन, कोरिया और वियतनाम जैसे देशों में होता है। अगर इन पर भारी टैक्स लगाया जाता, तो कंपनियों को नुकसान होता और ग्राहकों को भी ये चीजें महंगी मिलतीं। इसीलिए ट्रंप सरकार ने इन्हें टैरिफ से छूट देने का फैसला लिया।

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क्या है ट्रंप प्रशासन का परस्पर शुल्क?
परस्पर शुल्क का मतलब है कि अगर कोई देश अमेरिकी सामान पर ज्यादा टैक्स लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश के सामान पर वैसा ही टैक्स लगाएगा। यह नीति दूसरे देशों के साथ व्यापार को संतुलित करने के लिए बनाई गई है। इसे ट्रंप प्रशासन की तरफ से 2 अप्रैल को लागू किया गया था। जिसके बाद दुनिया भर के तमाम देशों ने इसका विरोध किया। वहीं इसके चलते शेयर बाजार को काफी नुकसान हुआ था।

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