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टोक्यो ओलिंपिक: आखिर प्रायोजकों की चिंता क्यों नहीं की, टोयोटा के विज्ञापन नहीं चलाने के फैसले से उठा सवाल
Tue, 20 Jul 2021 09:35 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 20 Jul 2021 09:35 PM IST
सार
महामारी के बीच टोक्यो ओलिंपिक खेलों के आयोजन के फैसले से प्रायोजित कंपनियों के भी मुश्किल पैदा हो गई है। टोयोटा द्वारा अपने विज्ञापन नहीं चलाने के फैसले से यही प्रकट हो रहा है। इतना ही नहीं कंपनी के अधिकारी खेलों के उदघाटन समारोह में भी शिरकत नहीं करेंगे।
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टोक्यो ओलंपिक
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना महामारी के बावजूद ओलिंपिक खेलों का आयोजन करने पर अड़े रहने से अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) के फैसले से प्रायोजित कंपनियों के लिए भी असहज स्थिति पैदा हो गई है। कंपनियों की राय में अब ये आयोजन उस तरह के निवेश का अवसर नहीं रह गया है, जैसा आम तौर पर ओलिंपिक खेल होते हैं। इन खेलों के दौरान अपने टीवी विज्ञापन वापस नहीं चलाने के टोयोटा कंपनी के फैसले से यही बात जाहिर हुई है।
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टोयोटा जापान की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी है। वह टोक्यो ओलिंपिक्स के सबसे बड़े प्रायोजकों में है, लेकिन अब उसने एलान किया है कि शुक्रवार को ओलिंपिक के उद्घाटन समारोह में कंपनी के अधिकारी भाग नहीं लेंगे। विश्लेषकों का कहना है कि ओलिंपिक्स दुनिया भर के करोड़ों लोगों के सामने अपने प्रोडक्ट की पहचान पेश करने का एक अनूठा मौका होते हैं। इसलिए कंपनियां उस आयोजन के महीनों पहले से अपने विज्ञापन अभियान में जुट जाती हैं। लेकिन इस बार महामारी और इसके बीच इन खेलों का आयोजन करने को लेकर उठे विवाद से कंपनियां असमंजस में हैं।
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आयोजन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन
गौरतलब है कि अब इन खेलों की शुरुआत में सिर्फ तीन दिन बचे हैं, जबकि जापान में जन भावना अभी भी इसके खिलाफ है। कई जगहों पर तो लोगों ने सड़कों पर आकर इस आयोजन के खिलाफ प्रदर्शन किए। टोक्यो ओलिंपिक के प्रायोजकों में जापानी कंपनियां असाही और निप्पन भी शामिल हैं। लेकिन इस बार चूंकि दर्शकों के आने पर रोक लगा दी गई है, इसलिए स्टेडियमों के अंदर उन्हें अपने बीयर या नई एआर टेक्नोलॉजी का विज्ञापन करने का मौका नहीं मिलेगा। कंपनियां लोगों में मौजूद इस आम भय के कारण भी चिंतित हैं कि ये खेल कोरोना संक्रमण का सुपर स्प्रेडर साबित होंगे।
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कोविड के कारण विज्ञापन अभियानों को नुकसान
पाइन स्पॉर्ट्स मीडिया स्ट्रेटेजीज के सीईओ और आईओसी के पूर्व मार्केटिंग और प्रसारण निदेशक माइकल पाइन ने वेबसाइट एक्सियोस.कॉम से कहा-कोविड के कारण सभी विज्ञापन अभियानों को नुकसान हुआ है। इसके बावजूद अगर ओलिंपिक खेल टीवी पर रिकॉर्ड संख्या में वैश्विक दर्शक हासिल कर पाए, तो यह बहुत सकारात्मक बात होगी।
आईओसी का कहना है कि उसके सभी पार्टनर्स ने बहुत सहयोगी रुख अपनाया है। उन सबका ध्यान एथलीट, अधिकारियों और जापान के लोगों की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। गौरतलब है कि आईओसी अपने 15 सबसे बड़े स्पॉन्सर्स को ओलिंपिक पार्टनर कहती है। इन कंपनियों में कोका कोला, ब्रिजस्टोन, ओमेगा, टोयोटा, वीजा, पैनासोनिक, डॉव, एयरएनबी, अलीबाबा, जनरल इलेक्ट्रिक, प्रोक्टर एंड गैंबल, एटॉस, इंटेल, एलायंज और सैमसंग शामिल हैं। इन कंपनियों को आईओसी से लंबी अवधि के मार्केटिंग अधिकार मिले हुए हैं।
15.4 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान
आईओसी ने टोक्यो ओलिंपिक और पैरा ओलिंपिक खेलों के लिए 6.7 अरब डॉलर का बजट रखा है। इसमें से आधी रकम प्रायोजकों से हासिल होगी। इन खेलों के लिए बुनियादी सुविधाएं तैयार करने का खर्च टोक्यो मेट्रोपॉलिटिन शासन ने वहन किया है। उन सबको मिला कर इन खेलों के आयोजन पर 15.4 अरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है।
आईओसी की आय में प्रायोजकों की हिस्सेदारी घटी
जानकारों के मुताबिक प्रायोजित कंपनियां आईओसी की आमदनी का बड़ा स्रोत हैं, लेकिन 1993 के बाद से आईओसी की कुल आय में उनका हिस्सा सिर्फ 21 फीसदी रह गया है। बाकी 79 प्रतिशत हिस्सा प्रसारक कंपनियों से आता है। आलोचकों का कहना है कि इसीलिए प्रायोजक कंपनियों की चिंताओं पर ज्यादा ध्यान ना देते हुए आईओसी ने खेलों के आयोजन पर अडिग रहने का फैसला किया, ताकि टीवी प्रसारकों को नुकसान ना हो।