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Hindi News ›   World ›   Three thousand sexual abusers of children worked in Catholic churches of France within 70 years report prepared by independent commission

शर्मनाक: फ्रांस के कैथोलिक चर्चों में तैनात रह चुके हैं बच्चों के तीन हजार यौन शोषक, स्वतंत्र आयोग ने तैयार की रिपोर्ट

Tue, 05 Oct 2021 05:54 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, पेरिस।
एजेंसी, पेरिस। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 05 Oct 2021 05:54 AM IST
सार

स्वतंत्र आयोग के अध्यक्ष जॉन मार्क सॉव ने बताया कि यह जांच ढाई साल से चल रही है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट मंगलवार को जारी हो सकती है। उन्होंने यौन शोषण पीड़ितों की वास्तविक संख्या नहीं बताई, लेकिन कहा कि कुल 11,500 प्रीस्ट और चर्च के अन्य स्टाफ में से शोषकों की संख्या 3,000 हो सकती है।

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Three thousand sexual abusers of children worked in Catholic churches of France within 70 years report prepared by independent commission
यौन शोषणा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फ्रांस के रोमन कैथोलिक चर्च में यौन शोषण के मामलों की जांच कर रहे एक स्वतंत्र आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बीते 70 वर्ष में यहां बच्चों का यौन शोषण करने वाले करीब 3,000 लोग काम कर चुके हैं। इनमें से दो तिहाई प्रीस्ट थे, जो इन चर्च के छह स्तर के धार्मिक नेताओं में पांचवीं वरीयता पर आते हैं।

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आयोग अध्यक्ष जॉन मार्क सॉव ने एक फ्रांसीसी अखबार को दिए साक्षात्कार में बताया, यह जांच ढाई साल से चल रही है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट मंगलवार को जारी हो सकती है। उन्होंने यौन शोषण पीड़ितों की वास्तविक संख्या नहीं बताई, लेकिन कहा कि कुल 11,500 प्रीस्ट और चर्च के अन्य स्टाफ में से शोषकों की संख्या 3,000 हो सकती है। यह लोग 1950 के बाद यहां तैनात हुए थे।
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62 नए मामलों में जांच होगी
सॉव के अनुसार अभियोजन पक्ष को 22 मामले भेजे गए हैं, जिनमें अभी कार्रवाई होनी बाकी है। 40 मामले ऐसे भी हैं, जो वैसे तो बहुत पुराने हैं, लेकिन उनमें भी कार्रवाई की जा सकती है क्योंकि इनमें शामिल संदिग्ध अभी जिंदा हैं। इन्हें भी चर्च को कार्रवाई के लिए भेजा गया है।
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पीड़ितों का अस्तित्व नकार देता था चर्च
सॉव ने बताया, चर्च 1950 से 70 तक के वर्षों में पीड़ितों के अस्तित्व से ही इनकार कर देते था। बच्चों को जिस पीड़ा से गुजरना पड़ा, उसकी कल्पना की जा सकती है। बाद के वर्षों में दबाव बढ़ा, तो उसने अपनी नीति बदली। उन्होंने कहा, आयोग का मकसद इन मामलों की पुख्ता जांच कर उन्हें रिपोर्ट बद्ध करना है। तभी इनके कारणों, अपराधियों और परिणामों की पहचान हो सकेगी।

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