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Iran Unrest: ईरान के हिंसक प्रदर्शनों में 5000 लोगों की मौत, ईरानी हुकूमत ने आतंकियों को ठहराया जिम्मेदार
Sun, 18 Jan 2026 06:04 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेहरान
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 18 Jan 2026 06:04 PM IST
सार
ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुए प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं। सरकारी दावे के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में अब तक 5,000 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। सरकार ने हिंसा के लिए आतंकियों और विदेशी साजिश को जिम्मेदार ठहराया है। आइए जानते हैं इस पर ईरानी हुकूमत ने क्या कुछ कहा।
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ईरान में विरोध प्रदर्शन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों ने देश को हिला कर रख दिया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में हुए प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 5000 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में करीब 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए गए हैं। सरकार ने आरोप लगाया है कि इन घटनाओं के पीछे आतंकवादी और हथियारबंद दंगाई हैं, जिन्होंने आम नागरिकों को निशाना बनाया।
ईरानी अधिकारी के अनुसार, ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में लोग रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लेकिन दो हफ्तों के भीतर हालात तेजी से बिगड़ गए और आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया। कई शहरों में सरकार विरोधी नारे लगे और धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग उठने लगी।
सरकार का दावा
अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए मौत के आंकड़े पूरी तरह से सत्यापित हैं। सरकार का दावा है कि अंतिम मृतक संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा होने की संभावना नहीं है। प्रशासन का कहना है कि कई जगहों पर हिंसा इस हद तक बढ़ गई कि हालात काबू से बाहर हो गए और सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े।
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विदेशी साजिश का आरोप क्यों लगा रहा है तेहरान?
1979 की क्रांति के बाद सबसे घातक उथल-पुथल
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह हिंसा 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे घातक मानी जा रही है। तब से अब तक देश ने कई बार विरोध प्रदर्शन देखे हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौतें पहले कभी नहीं हुईं। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही है।
ये भी पढ़ें- खामेनेई की दो टूक: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाना चाहते हैं ट्रंप? ईरान ने अमेरिका को फिर चेताया; आरोप भी लगाए
कड़े कदम और बढ़ी निगरानी
सरकार ने साफ किया है कि देश में शांति बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि हालात और न बिगड़ें।
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ईरानी अधिकारी के अनुसार, ये प्रदर्शन 28 दिसंबर को आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में लोग रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। लेकिन दो हफ्तों के भीतर हालात तेजी से बिगड़ गए और आंदोलन ने राजनीतिक रूप ले लिया। कई शहरों में सरकार विरोधी नारे लगे और धार्मिक शासन को खत्म करने की मांग उठने लगी।
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सरकार का दावा
अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए मौत के आंकड़े पूरी तरह से सत्यापित हैं। सरकार का दावा है कि अंतिम मृतक संख्या में बहुत ज्यादा इजाफा होने की संभावना नहीं है। प्रशासन का कहना है कि कई जगहों पर हिंसा इस हद तक बढ़ गई कि हालात काबू से बाहर हो गए और सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े।
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विदेशी साजिश का आरोप क्यों लगा रहा है तेहरान?
- ईरान में हुई हिंसा के लिए तेहरान विदेशी साजिश का आरोप लगा रहा है।
- ईरानी नेतृत्व का कहना है कि विरोध प्रदर्शन स्वतःस्फूर्त नहीं थे।
- सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिका और इस्राइल पर अशांति भड़काने का आरोप लगाया।
- खामेनेई ने माना कि प्रदर्शनों में कई हजार लोगों की मौत हुई है।
- सरकार के मुताबिक बाहरी ताकतों ने देश के अंदर मौजूद असंतोष का फायदा उठाया।
- तेहरान का दावा है कि हालात बिगाड़ने के लिए विदेशी एजेंसियां सक्रिय रहीं।
1979 की क्रांति के बाद सबसे घातक उथल-पुथल
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह हिंसा 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे घातक मानी जा रही है। तब से अब तक देश ने कई बार विरोध प्रदर्शन देखे हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मौतें पहले कभी नहीं हुईं। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने की बात कही है।
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कड़े कदम और बढ़ी निगरानी
सरकार ने साफ किया है कि देश में शांति बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि हालात और न बिगड़ें।
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