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जलवायु परिवर्तन: असाधारण मौसम झेलती दुनिया को आईपीसीसी की रिपोर्ट का इंतजार

Wed, 04 Aug 2021 06:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 04 Aug 2021 06:34 PM IST
सार

जलवायु वैजानिक एड हॉकिन्स इस बार की रिपोर्ट के मुख्य लेखक हैं। उन्होंने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘उम्मीद है कि दुनिया जिस दिशा में जा रही है, उसका हम कुछ संदर्भ अपनी नई रिपोर्ट में बता पाएंगे।’

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The UN's Committee on Climate Change will release its sixth review report on August 9
क्लाइमेट चेंज - फोटो : FILE PHOTO

विस्तार

यूरोप गर्म हवाओं की चपेट में है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह हो रहे जलवायु परिवर्तन का साफ संकेत है। टर्की, ग्रीस, इटली और फिनलैंड को जंगलों में लगी आग का भी सामना करना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन संबंधी समिति इंटर-गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) अपनी छठी समीक्षा रिपोर्ट नौ अगस्त को जारी करेगी। कुछ विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन और मौसम के चरम रुख (एक्स्ट्रीम वेदर) के बीच सीधे संबंध की विस्तार से व्याख्या सामने आएगी। आईपीसीसी औसतन छह से सात साल पर जलवायु विज्ञान संबंधी अपने अध्ययन की समीक्षा पेश करती है। इस बार इसका बेसब्री इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि हाल में यूरोप, अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में असामान्य मौसम देखने को मिला है।

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जलवायु वैजानिक एड हॉकिन्स इस बार की रिपोर्ट के मुख्य लेखक हैं। उन्होंने वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू से कहा- ‘उम्मीद है कि दुनिया जिस दिशा में जा रही है, उसका हम कुछ संदर्भ अपनी नई रिपोर्ट में बता पाएंगे।’ बीते शुक्रवार को आईपीसीसी की रिपोर्ट में गर्म हवाओं, बाढ़ और असामान्य तेज ठंड जैसी मौसमी घटनाओं के पीछे इंसान के हाथ के बारे में शामिल कुछ जानकारी लीक हो गई थी।
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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पर्यावरण परिवर्तन संस्थान के निदेशक फ्रेडरिक ओटो के मुताबिक आज जो गर्म हवाएं लोगों को झेलनी पड़ रही हैं, उनकी तीव्रता जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ गई है। ऑटो भी आईपीसीसी की रिपोर्ट के लेखकों में एक हैं। आईपीसीसी की रिपोर्ट के लीक हुए हिस्सों के मुताबिक वैज्ञानिकों ने चरम मौसम और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंध से ठोस साक्ष्य जुटाए हैं। हॉकिन्स ने कहा- ‘विज्ञान इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है। इस बात की झलक निश्चित तौर पर आईपीसीसी की रिपोर्ट में मिलेगी।’
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इस वक्त खासकर दक्षिणी यूरोप में असाधारण गर्मी पड़ रही है। टर्की में पिछले महीने तापमान 49.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो एक रिकॉर्ड है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक ग्रीस में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है, जो वहां एक रिकॉर्ड होगा। इसके पहले यूरोप में सबसे अधिक तापमान 1977 में ग्रीस की राजधानी एथेंस में 48 डिग्री दर्ज हुआ था। ग्रीस सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक गर्मी के कारण वहां एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहां बिजली का संकट भी पैदा हो गया है।

इटली के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री तक जा चुका है। इटली के सिसली इलाके में जंगलों में लगी आग के कारण सैकड़ों लोगों को उनके निवास स्थल से हटाना पड़ा है। टर्की से लगी सीमा पर 100 जंगल पिछले कुछ दिनों में राख हो चुके हैं। उनसे आठ लोगों की जान भी गई है। 3000 से ज्यादा पशु मर चुके हैं। सोमवार को टर्की सरकार ने कहा था कि आग पर काबू पा लिया गया है। लेकिन आग का मौसम पर गहरा असर महसूस किया जा रहा है।


वातावरणीय भौतिकी के प्रोफेसर क्रिस्टोस जेफेरोस ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- इस हफ्ते के आखिर तक जब अगस्त की सामान्य हवाएं चलनी शुरू होंगी, तब गर्म हवाओं से परेशानी और बढ़ जाएगी। ऐसा हो सकता है कि हर चीज सूखी और जल उठने के लिए तैयार मालूम पड़ने लगे।

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