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अफगानिस्तान: आतंकी संगठनों पर खुद ही लगाम लगाएगा तालिबान, अमेरिका की मदद से किया इनकार
Sun, 10 Oct 2021 01:19 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 10 Oct 2021 01:19 AM IST
सार
कतर की राजधानी दोहा में आयोजित अमेरिका और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच दो दिवसीय वार्ता रविवार को समाप्त होगी। इस बीच अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यह वार्ता तालिबान को मान्यता देने की पहल कतई नहीं है।
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तालिबान (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
तालिबान अफगानिस्तान पर अमेरिका की सेना जाने के मात्र 20 दिन के अंदर ही काबुल की सत्ता पर काबिज हो गया था। साथ ही तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद अफगानिस्तान में अन्य आतंकी संगठन भी अपने पैर जमाने लगे हैं। वहां लगातार सार्वजनिक जगहों पर हो रहे धमाकों में इन्हीं आतंकी संगठनों का हाथ है।
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वहीं अमेरिका आतंकी संगठनों पर अंकुश लगाने के लिए तालिबान की मदद करना चाहता है, लेकिन तालिबान ने अमेरिका की मदद लेने से इनकार कर दिया और कहा कि तालिबान अपने दम पर इस्लामिक स्टेट से निपटने में सक्षम है। वहीं वापसी के बाद से ही तालिबान अमेरिका से सीधे मुंह बात नहीं कर रहा है।
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वहीं इस दौरान तालिबान के राजनीतिक प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि अफगानिस्तान में तेजी से सक्रिय हो रहे इस्लामिक स्टेट (आइएस) समूह से जुड़े संगठनों को लेकर हमारी ओर से अमेरिका को किसी तरह का सहयोग नहीं दिया जाएगा। हम आइएस से अपने दम पर निपटने में सक्षम हैं।
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साल 2014 से ही आइएस पूर्वी अफगानिस्तान में शिया मुसलमानों को निशाना बना रहा है। वह अमेरिका के लिए भी बड़ा खतरा है। हाल ही में मस्जिद पर हुए हमले में भी उससे संबंधित संगठन का हाथ था, जिसमें अल्पसंख्यक शिया समुदाय के 46 लोग मारे गए थे।
20 अक्तूबर को होगी अहम बैठक
मास्को फॉर्मेट के तहत अब तय हुई बैठक 20 अक्तूबर को होगी। उसमें भारत, चीन, पाकिस्तान, ईरान और अन्य कुछ देश भी भाग लेंगे। इस बीच तालिबान के सूत्रों ने कहा है कि जल्द ही रूस, अमेरिका, चीन और पाकिस्तान के साथ भी उसकी अलग से बैठक होने वाली है। रूस, अमेरिका और चीन ने अफगानिस्तान के मामले में त्रिपक्षीय वार्ता शुरू की थी। इस समूह को ट्रोइका कहा गया था। पाकिस्तान के उससे जुड़ने के बाद उसे ट्रोइका प्लस के नाम से जाना गया।