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'यह सीरिया का शुद्धिकरण': असद शासन खत्म करने के बाद विद्रोही संगठन के नेता का पहला भाषण, जानें क्या कहा

Mon, 09 Dec 2024 08:34 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दमिश्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दमिश्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 09 Dec 2024 08:34 AM IST
सार

बशर अल-असद रविवार को ही सीरिया से भाग निकले। कुछ घंटों बाद उनके रूस में शरण लेने की खबरें सामने आई थीं। इस बीच सीरिया में एचटीएस ने दमिश्क को पूरी तरह कब्जे में ले लिया और इसके बाद देश के बड़े हिस्से में लोगों और विद्रोहियों को जश्न मनाते देखा गया। 

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Syria Rebel Chief who ended Bashar Al-Assad rule Mohammed Al-Jolani victory speech HTS news and updates
अबु मोहम्मद अल-जोलानी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के 24 साल लंबे शासन को महज दो हफ्तों के अंदर खत्म करने वाले विद्रोही संगठन हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के प्रमुख मोहम्मद अल-जोलानी ने अपना पहला भाषण दिया है। सीरिया के प्रमुख शहरों पर कब्जे को ऐतिहासिक जीत बताते हुए जोलानी ने कहा कि हमारी विजय पूरे इस्लामिक देश की विजय है। उसने दावा किया कि अब सीरिया का शुद्धिकरण शुरू हो गया है। 
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गौरतलब है कि बशर अल-असद रविवार को ही सीरिया से भाग निकले। कुछ घंटों बाद उनके रूस में शरण लेने की खबरें सामने आई थीं। इस बीच सीरिया में एचटीएस ने दमिश्क को पूरी तरह कब्जे में ले लिया और इसके बाद देश के बड़े हिस्से में लोगों और विद्रोहियों को जश्न मनाते देखा गया। 
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एचटीएस प्रमुख ने क्या कहा?
अबु मोहम्मद अल-जोलानी ने रविवार को दमिश्क पर कब्जा करने के बाद एक वीडियो संदेश में कहा, "मेरे भाइयों यह जीत पूरे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक है।" उमाय्यद मस्जिद से टेलीग्राम के जरिए दिए अपने भाषण में जोलानी ने कहा, "आज सीरिया का शुद्धिकरण हो रहा है। यह विजय जेल में बंद लोगों के दर्द से पैदा हुई और मुजाहिद्दीनों ने उनकी जंजीरों को तोड़ दिया है।"

जोलानी ने असद का समर्थन करने वाले ईरान और लेबनान के हिजबुल्ला पर निशाना साधते हुए कहा, "असद के नेतृत्व में सीरिया ईरानी महत्वाकांक्षाओं का गढ़ बन गया था, जहां सांप्रदायिकता अपने चरम पर थी।" 

क्या है हयात तहरीर अल-शाम? 
सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार के खिलाफ लड़ रहा विद्रोही गुट हयात तहरीर अल शाम आंतकी संगठन अल कायदा की शाखा रहा है। अबू मोहम्मद अल-गोलानी के नेतृत्व वाला एचटीएस लंबे समय से इदलिब में प्रमुख ताकत रहा है। तहरीर अल-शाम को पहले जबात नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। दरअसल, एचटीएस को अल-कायदा ने बनाया था ताकि यह सीरिया के गृहयुद्ध खत्म होने के बाद यहां की स्थिति का फायदा उठा सके। यह जल्द ही अपने मकसद में कामयाब भी हो गया और इसने विद्रोही हमलों के साथ-साथ सेना और अन्य दुश्मनों के खिलाफ आत्मघाती बम विस्फोट किए। हालांकि, यह समूह धीरे-धीरे सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट का कट्टर दुश्मन बन गया और अंततः 2016 में अल-कायदा से भी अलग हो गया। अमेरिका, रूस, तुर्किये और अन्य देशों ने तहरीर अल-शाम को आतंकवादी समूह घोषित किया है। 

अब जानिये अबु मोहम्मद अल जोलानी के बारे में
जोलानी का असली नाम अहमद अल-शरा है। उसका अतीत विवादास्पद रहा है। अबु जोलानी का जन्म 1982 को हुआ था और उसका लालन-पालन सीरिया की राजधानी दमिश्क के माजेह इलाके में हुआ। जोलानी के परिवार का ताल्लुक गोलान हाइट्स इलाके से है और उसका दावा है कि उसके दादा को साल 1967 में गोलान हाइट्स इलाके से भागना पड़ा था, जब गोलान हाइट्स पर इस्राइल का कब्जा हो गया था। 

 
2001 के हमलों के बाद जिहाद की ओर अग्रसर हुआ जोलानी
जोलानी ने 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद जिहाद का रास्ता पकड़ा। मिडिल ईस्ट आई के अनुसार, वह हमलावरों से प्रेरित था और इसके बाद वह दमिश्क में गुप्त धर्मोपदेशों में भाग लेने लगा। बाद में वह इराक में अल-कायदा में शामिल हो गया और 2011 में सीरिया लौटने से पहले उसे पांच साल तक हिरासत में रखा गया, जहां उसने अल-कायदा की सीरियाई शाखा अल-नुसरा फ्रंट की स्थापना की। बाद में जोलानी ने 2016 में अल-कायदा से नाता तोड़ लिया और हयात तहरीर अल शाम की स्थापना कर असद सरकार के खिलाफ जंग का नेतृत्व करने लगा। दावा है कि जोलानी जो कभी अमेरिकी जेल में बंद रहा था उस पर यूएस ने 10 मिलियन का इनाम घोषित कर रखा है। 

हाल में और ज्यादा सुर्खियों में आया
कभी गुप्त रूप से काम करने के लिए जाने जाने वाले जोलानी अब ज्यादा सार्वजनिक भूमिका निभा रहा है। हालिया आक्रमणों के दौरान, वह कई जगह देखा गया है। हाल में जब विद्रोहियों ने सीरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर अलेप्पो पर  कब्जा किया था तो वहां जोलानी को भी देखा गया था। जोलानी खुद को आधुनिक और उदारवादी दिखाता है। उसने जिहादियों से जुड़ी पारंपरिक पगड़ी पहनना बंद कर दिया है और अब सैन्य वर्दी और खाकी शर्ट पहनना शुरू कर दिया है, जिससे वे खुद को अधिक व्यावहारिक और अनुकूलनीय के रूप में पेश कर रहे हैं। पिछले बुधवार को अलेप्पो में जोलानी को भीड़ को हाथ हिलाते हुए देखा गया, जो उनके पहले के एकांतप्रिय व्यक्तित्व के बिल्कुल विपरीत था। उन्होंने अपने असली नाम से बयानों पर हस्ताक्षर करना भी शुरू कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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