Syria: अलकायदा से नाता...फिर एचटीएस का चीफ, अब सीरिया में असद को उखाड़ फेंका, कौन है अबु मोहम्मद अल जोलानी?
सीरिया में बदले हालात में जिस एक शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है एचटीएस प्रमुख अबु मोहम्मद अल जोलानी। खुद के आधुनिक होने का दावा करने वाला जोलानी एक इस्लामिक नेता है। जानते हैं एचटीएस प्रमुख अबु मोहम्मद अल जोलानी के बारे में सबकुछ...
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सीरिया में करीब डेढ़ दशक से जारी गृहयुद्ध के बाद विद्रोहियों द्वारा तख्तापलट का दावा किया जा रहा है। सीरिया के कई बड़े शहरों पर विद्रोहियों ने अपना कब्जा कर लिया है। राजधानी दमिश्क में कब्जे के बाद विद्रोहियों ने सीरिया के राष्ट्रीय टीवी नेटवर्क पर भी अपना कब्जा कर लिया है। इस बीच, यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति असद दमिश्क छोड़कर किसी अज्ञात जगह चले गए हैं। उनका परिवार पहले ही रूस रवाना हो चुका है। सीरिया में इस बदले हालात में जिस एक शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वह है एचटीएस प्रमुख अबु मोहम्मद अल जोलानी। खुद के आधुनिक होने का दावा करने वाला जोलानी एक इस्लामिक नेता है। पहले अलकायदा का अंग रहे जोलानी ने साल 2016 में अल-कायदा से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद उसने हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) का गठन किया। उसका मकसद सीरिया की सत्ता से बशर अल असद सरकार को हटाना है। अब उसका दावा है कि सीरिया तानाशाह मुक्त हो गया है।
क्या है हयात तहरीर अल-शाम
सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार के खिलाफ लड़ रहा विद्रोही गुट हयात तहरीर अल शाम आंतकी संगठन अल कायदा की शाखा रहा है। अबू मोहम्मद अल-गोलानी के नेतृत्व वाला एचटीएस लंबे समय से इदलिब में प्रमुख ताकत रहा है। तहरीर अल-शाम को पहले जबात नुसरा फ्रंट के नाम से जाना जाता था। दरअसल, एचटीएस को अल-कायदा ने बनाया था ताकि यह सीरिया के गृहयुद्ध खत्म होने के बाद यहां की स्थिति का फायदा उठा सके। यह जल्द ही अपने मकसद में कामयाब भी हो गया और इसने विद्रोही हमलों के साथ-साथ सेना और अन्य दुश्मनों के खिलाफ आत्मघाती बम विस्फोट किए। हालांकि, यह समूह धीरे-धीरे सीरिया और इराक में इस्लामिक स्टेट का कट्टर दुश्मन बन गया और अंततः 2016 में अल-कायदा से भी अलग हो गया। अमेरिका, रूस, तुर्किये और अन्य देशों ने तहरीर अल-शाम को आतंकवादी समूह घोषित किया है।
जोलानी का असली नाम अहमद अल-शरा है। उसका अतीत विवादास्पद रहा है। अबु जोलानी का जन्म 1982 को हुआ था और उसका लालन-पालन सीरिया की राजधानी दमिश्क के माजेह इलाके में हुआ। जोलानी के परिवार का ताल्लुक गोलान हाइट्स इलाके से है और उसका दावा है कि उसके दादा को साल 1967 में गोलान हाइट्स इलाके से भागना पड़ा था, जब गोलान हाइट्स पर इस्राइल का कब्जा हो गया था।
जोलानी ने 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद जिहाद का रास्ता पकड़ा। मिडिल ईस्ट आई के अनुसार, वह हमलावरों से प्रेरित था और इसके बाद वह दमिश्क में गुप्त धर्मोपदेशों में भाग लेने लगा। बाद में वह इराक में अल-कायदा में शामिल हो गया और 2011 में सीरिया लौटने से पहले उसे पांच साल तक हिरासत में रखा गया, जहां उसने अल-कायदा की सीरियाई शाखा अल-नुसरा फ्रंट की स्थापना की। बाद में जोलानी ने 2016 में अल-कायदा से नाता तोड़ लिया और हयात तहरीर अल शाम की स्थापना कर असद सरकार के खिलाफ जंग का नेतृत्व करने लगा। दावा है कि जोलानी जो कभी अमेरिकी जेल में बंद रहा था उस पर यूएस ने 10 मिलियन का इनाम घोषित कर रखा है।
कभी गुप्त रूप से काम करने के लिए जाने जाने वाले जोलानी अब ज्यादा सार्वजनिक भूमिका निभा रहा है। हालिया आक्रमणों के दौरान, वह कई जगह देखा गया है। हाल में जब विद्रोहियों ने सीरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर अलेप्पो पर कब्जा किया था तो वहां जोलानी को भी देखा गया था। जोलानी खुद को आधुनिक और उदारवादी दिखाता है। उसने जिहादियों से जुड़ी पारंपरिक पगड़ी पहनना बंद कर दिया है और अब सैन्य वर्दी और खाकी शर्ट पहनना शुरू कर दिया है, जिससे वे खुद को अधिक व्यावहारिक और अनुकूलनीय के रूप में पेश कर रहे हैं। पिछले बुधवार को अलेप्पो में जोलानी को भीड़ को हाथ हिलाते हुए देखा गया, जो उनके पहले के एकांतप्रिय व्यक्तित्व के बिल्कुल विपरीत था। उन्होंने अपने असली नाम से बयानों पर हस्ताक्षर करना भी शुरू कर दिया है।
सीरिया में कैसे घटा पूरा घटनाक्रम
कट्टरपंथी समूह हयात तहरीर अल-शाम ने पिछले हफ्ते सीरिया में अचानक और सफल आक्रमण करके चौंका दिया। हयात तहरीर अल-शाम या एचटीएस लंबे समय से देश का सबसे मजबूत विद्रोही गुट माना जाता रहा है। इन विद्रोहियों ने 26 नवंबर को अचानक अलप्पो के उत्तर और उत्तर-पश्चिम के इलाकों से हमला किया। वहीं 29-30 नवंबर को वे शहर में घुस आए और सेना को वहां से खदेड़ दिया। एचटीएस के हजारों लड़ाकों ने अलप्पो के बाद कई अन्य प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया। साल 2011 में असद सरकार के खिलाफ अरब स्प्रिंग विद्रोह से शुरू हुए इस गृह युद्ध में करीब पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है। गृह युद्ध से 2.3 करोड़ की आबादी वाले देश से करीब 68 लाख लोगों को अपने घरों से मजबूर बेघर होना पड़ा है और लाखों लोग विदेशों में शरणार्थी बन गए हैं।
सीरिया सरकार को रूस के साथ ही ईरान और हिजबुल्ला का भी समर्थन था, जिसकी वजह से बशर सरकार का सीरिया पर मजबूत कब्जा था, लेकिन अब इस्राइल के साथ लड़ाई में हिजबुल्ला को बड़ा झटका लगा है। वहीं साल 2016 में बशर सरकार की मदद के लिए अपने लड़ाकू विमानों को सीरिया में तैनात करने वाला रूस भी यूक्रेन युद्ध में फंसा हुआ है। ईरान भी इस्राइल के साथ तनाव में उलझा हुआ है, जिससे बशर सरकार कमजोर हुई और इस मौके का फायदा उठाकर विद्रोहियों ने सीरिया में हमले तेज कर दिए। बशर अल असद ने भी बीते दिनों अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों पर विद्रोहियों को समर्थन देने का आरोप लगाया था।
सीरिया गृह युद्ध में जा चुकी है पांच लाख से ज्यादा लोगों की जान
बशर अल असद सरकार और विद्रोही गुटों के बीच जारी संघर्ष में अब तक पांच लाख से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा है। साथ ही बीते 13 वर्षों में सीरिया से करीब 68 लाख लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर लोग तुर्किये और यूरोपीय देशों में रह रहे हैं। सीरिया के 30 फीसदी हिस्से पर पहले भी विद्रोहियों का कब्जा था, लेकिन अब अधिकतर हिस्से पर उनका कब्जा हो गया है। सीरिया के मौजूदा हालात में आतंकी संगठन आईएसआईएस के अगले कदम पर भी सभी की निगाहें हैं।