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मुस्लिम नाटो : हथियारों के निर्माण की जमीन तैयार, रियाद में बनेगा मक्का रक्षा गठबंधन का सचिवालय

Tue, 01 Sep 2026 07:35 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Tue, 01 Sep 2026 07:35 AM IST
सार

पाकिस्तान, सऊदी अरब तुर्किये गठबंधन की पहली बैठक में रक्षा क्षमताएं बढ़ाने, तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और रक्षा उद्योग में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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Muslim NATO Pakistan Saudi Arabia  Türkiye Mecca Defense Alliance meeting secretariat in Riyadh know details
सऊदी-पाकिस्तान और तुर्किये के बीच अहम सहमति - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स

विस्तार

मक्का में हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते को जमीन पर उतारने की दिशा में तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने कदम बढ़ा दिए हैं। इस्तांबुल में सोमवार को तीनों देशों की पहली रणनीतिक, राजनीतिक और रक्षा समिति की बैठक में गठबंधन को औपचारिक संस्थागत ढांचा देने पर सहमति बनी। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने बताया कि इसका नाम मक्का रक्षा गठबंधन होगा। सचिवालय रियाद में स्थापित किया जाएगा, जबकि पहला महासचिव पाकिस्तान से होगा। 

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इस बैठक में रक्षा क्षमताएं बढ़ाने, तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और रक्षा उद्योग में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। हथियारों के संयुक्त उत्पादन, अनुसंधान व विकास पर भी बातचीत की गई। इससे भविष्य में तीनों देशों के बीच हथियार प्रणालियों के सह-विकास और सह-निर्माण  का रास्ता खुलता है।

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पाकिस्तान की अहम भूमिका
गठबंधन के पहले महासचिव का पद पाकिस्तान को मिलना भी महत्वपूर्ण है। सचिवालय रियाद में होने से सऊदी अरब को संस्थागत केंद्र की भूमिका मिलेगी, जबकि पाकिस्तान को संगठन के शुरुआती संचालन में प्रमुख जिम्मेदारी मिलेगी। इसके साथ ही तीनों देशों के बीच अन्य मित्र देशों को गठबंधन से जोड़ने के लिए रोडमैप तैयार करने पर भी सहमति बनी। 
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भारत हर पहलू पर लगाए है पैनी निगाह
भारत के नजरिये से इस गठबंधन का सबसे बड़ा पहलू संभावित रक्षा-औद्योगिक आयाम है। तुर्किये पिछले वर्षों में ड्रोन, मिसाइल, नौसैनिक प्रणालियों और अन्य रक्षा तकनीकों के क्षेत्र में अपनी क्षमताएं तेजी से बढ़ा चुका है। पाकिस्तान के साथ उसके पहले से गहरे रक्षा संबंध हैं। ऐसे में सऊदी अरब की आर्थिक क्षमता के साथ इन दोनों देशों का रक्षा सहयोग एक ढांचे में आने पर पाकिस्तान के लिए नई सैन्य संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। हथियार प्रणालियों के संयुक्त विकास व उत्पादन को सहयोग के क्षेत्र के रूप में आगे बढ़ाना दर्शाता है कि 7 अगस्त को मक्का में हुआ समझौता केवल राजनीतिक घोषणा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे स्थायी रक्षा सहयोग ढांचे में बदल रहा है।

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