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Trump Tariffs: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटके बाद बढ़ी ट्रंप की मुश्किलें, अब 133 अरब डॉलर लौटाने की चुनौती
Sat, 21 Feb 2026 01:03 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 21 Feb 2026 01:03 PM IST
सार
Tariffs Refund Process: सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी होने वाली है, जो है निर्यातकों से वसूले गए 133 अरब डॉलर लौटाना। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार देते हुए कहा है कि ये कानूनी रूप सही नहीं था। पढ़ें, किसे-कब और कैसे मिलेगा रिफंड...
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें
- फोटो : PTI
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विस्तार
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे बड़े टैरिफ वाले फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रंप ने जिस आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करके दुनिया भर के देशों पर आयात टैक्स लगाया था, वह कानूनी रूप से सही नहीं था। कोर्ट का कहना है कि आयात पर टैक्स लगाने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं बल्कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास होता है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि सरकार ने जो करीब 133 अरब डॉलर (लगभग 11 लाख करोड़ रुपये) टैरिफ के रूप में पहले ही वसूल कर लिए हैं, उनका क्या होगा। बड़ी-बड़ी कंपनियां अब अपने पैसे वापस मांग रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आखिरकार कंपनियों को रिफंड मिल सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत लंबी, जटिल और विवादों से भरी रहने वाली है।
यह भी पढ़ें - India-US Trade Deal: ट्रंप ने PM मोदी को बताया स्मार्ट प्रधानमंत्री, ट्रेड डील पर बोले- हमारा फायदा उठाया गया
रिफंड में कितना लगेगा समय और किसे मिलेगी राहत?
जानकारों के मुताबिक, रिफंड का फैसला अमेरिकी कस्टम विभाग, इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट और अन्य अदालतों के जरिए तय होगा। इसमें 12 से 18 महीने या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। कई कंपनियों ने तो पहले ही केस कर दिए हैं ताकि वे रिफंड की लाइन में सबसे आगे रह सकें। हालांकि आम लोगों को इस फैसले से सीधे पैसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं है। वजह यह है कि टैरिफ का बोझ कंपनियों ने बढ़ी कीमतों के रूप में ग्राहकों पर डाल दिया था और यह साबित करना मुश्किल होगा कि किसी ग्राहक ने कितना अतिरिक्त पैसा दिया।
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इन कंपनियों ने रिफंड के लिए दायर किया केस
कई बड़ी कंपनियां जैसे कॉस्टको, रेव्लॉन और बम्बल बी फूड्स पहले ही रिफंड के लिए मुकदमे दायर कर चुकी हैं, ताकि फैसला उनके पक्ष में आने पर उन्हें जल्दी पैसा मिल सके। आगे और भी कानूनी लड़ाइयां होने की संभावना है, क्योंकि कुछ निर्माता यह भी दावा कर सकते हैं कि कच्चे माल की कीमत बढ़ाने वाले सप्लायरों से भी हिस्सा लिया जाए।
रिफंड के लिए क्या है अमेरिकी कस्टम एजेंसी का नियम?
अमेरिका की कस्टम एजेंसी के पास ऐसा नियम है जिसके तहत अगर आयातकों से गलती से ज्यादा शुल्क वसूला गया हो तो उन्हें पैसा वापस किया जा सकता है। ट्रेड वकील डेव टाउनसेंड के मुताबिक सरकार ट्रंप के आईईईपीए टैरिफ का पैसा लौटाने के लिए इसी पुराने सिस्टम का इस्तेमाल कर सकती है। पहले भी ऐसा हो चुका है- 1990 के दशक में अदालत ने निर्यात पर लगाए गए एक शुल्क को असंवैधानिक बताया था और कंपनियों को रिफंड लेने की व्यवस्था बनाई गई थी।
इतिहास में पहली बार होगा अरबों डॉलर का रिफंड
हालांकि इस बार मामला बहुत बड़ा है। हजारों आयातक और अरबों डॉलर की रकम एक साथ लौटानी पड़ सकती है, जो पहले कभी नहीं हुआ। वकीलों का कहना है कि प्रक्रिया कठिन जरूर है, लेकिन अगर पैसा गलत तरीके से लिया गया है तो सरकार उसे रोककर नहीं रख सकती। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अलग वेबसाइट या विशेष सिस्टम बना सकती है, लेकिन यह भी आशंका है कि सरकार जिम्मेदारी कंपनियों पर डालकर उन्हें अदालतों में जाने के लिए मजबूर कर सकती है।
यह भी पढ़ें - टैरिफ अवैध तो अब क्या: बौखलाए ट्रंप ने दुनियाभर पर लगाए अतरिक्त शुल्क, भारत को राहत या कुछ और? समझिए पूरा खेल
अमेरिकी राज्यों के नेता भी मांग रहे रिफंड
ट्रंप ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है और कहा कि यह मामला अब कई साल तक अदालतों में चलता रहेगा। वहीं कुछ अमेरिकी राज्यों के नेता भी अपने नागरिकों की तरफ से सरकार से अरबों डॉलर का रिफंड मांग रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनियों को पैसा वापस मिलता है तो इससे अर्थव्यवस्था में कुछ राहत और खर्च बढ़ सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा नहीं होगा, क्योंकि अमेरिका अभी भी कई सेक्टर में दूसरे देशों पर भारी टैरिफ लगाए हुए है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया फंस सकता है टैरिफ रिफंड
आम उपभोक्ताओं को सीधे रिफंड मिलने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि यह साबित करना मुश्किल होगा कि उन्होंने जो ज्यादा कीमत चुकाई वह किस खास टैरिफ की वजह से थी। फिर भी कुछ राजनीतिक नेता इस मुद्दे को उठा रहे हैं। इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने कहा है कि उनके राज्य के हर परिवार पर औसतन 1700 डॉलर का बोझ पड़ा है और उन्होंने सरकार से अरबों डॉलर लौटाने की मांग की है। वहीं नेवादा के ट्रेजरर जैक कॉनाइन ने भी अपने राज्य के लिए 2.1 अरब डॉलर की वापसी की मांग की है। कुल मिलाकर, टैरिफ रिफंड का मामला अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंसा रह सकता है और इसमें कई साल लगने की संभावना बताई जा रही है।
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रिफंड में कितना लगेगा समय और किसे मिलेगी राहत?
जानकारों के मुताबिक, रिफंड का फैसला अमेरिकी कस्टम विभाग, इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट और अन्य अदालतों के जरिए तय होगा। इसमें 12 से 18 महीने या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। कई कंपनियों ने तो पहले ही केस कर दिए हैं ताकि वे रिफंड की लाइन में सबसे आगे रह सकें। हालांकि आम लोगों को इस फैसले से सीधे पैसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं है। वजह यह है कि टैरिफ का बोझ कंपनियों ने बढ़ी कीमतों के रूप में ग्राहकों पर डाल दिया था और यह साबित करना मुश्किल होगा कि किसी ग्राहक ने कितना अतिरिक्त पैसा दिया।
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इन कंपनियों ने रिफंड के लिए दायर किया केस
कई बड़ी कंपनियां जैसे कॉस्टको, रेव्लॉन और बम्बल बी फूड्स पहले ही रिफंड के लिए मुकदमे दायर कर चुकी हैं, ताकि फैसला उनके पक्ष में आने पर उन्हें जल्दी पैसा मिल सके। आगे और भी कानूनी लड़ाइयां होने की संभावना है, क्योंकि कुछ निर्माता यह भी दावा कर सकते हैं कि कच्चे माल की कीमत बढ़ाने वाले सप्लायरों से भी हिस्सा लिया जाए।
रिफंड के लिए क्या है अमेरिकी कस्टम एजेंसी का नियम?
अमेरिका की कस्टम एजेंसी के पास ऐसा नियम है जिसके तहत अगर आयातकों से गलती से ज्यादा शुल्क वसूला गया हो तो उन्हें पैसा वापस किया जा सकता है। ट्रेड वकील डेव टाउनसेंड के मुताबिक सरकार ट्रंप के आईईईपीए टैरिफ का पैसा लौटाने के लिए इसी पुराने सिस्टम का इस्तेमाल कर सकती है। पहले भी ऐसा हो चुका है- 1990 के दशक में अदालत ने निर्यात पर लगाए गए एक शुल्क को असंवैधानिक बताया था और कंपनियों को रिफंड लेने की व्यवस्था बनाई गई थी।
इतिहास में पहली बार होगा अरबों डॉलर का रिफंड
हालांकि इस बार मामला बहुत बड़ा है। हजारों आयातक और अरबों डॉलर की रकम एक साथ लौटानी पड़ सकती है, जो पहले कभी नहीं हुआ। वकीलों का कहना है कि प्रक्रिया कठिन जरूर है, लेकिन अगर पैसा गलत तरीके से लिया गया है तो सरकार उसे रोककर नहीं रख सकती। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अलग वेबसाइट या विशेष सिस्टम बना सकती है, लेकिन यह भी आशंका है कि सरकार जिम्मेदारी कंपनियों पर डालकर उन्हें अदालतों में जाने के लिए मजबूर कर सकती है।
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अमेरिकी राज्यों के नेता भी मांग रहे रिफंड
ट्रंप ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है और कहा कि यह मामला अब कई साल तक अदालतों में चलता रहेगा। वहीं कुछ अमेरिकी राज्यों के नेता भी अपने नागरिकों की तरफ से सरकार से अरबों डॉलर का रिफंड मांग रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंपनियों को पैसा वापस मिलता है तो इससे अर्थव्यवस्था में कुछ राहत और खर्च बढ़ सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा नहीं होगा, क्योंकि अमेरिका अभी भी कई सेक्टर में दूसरे देशों पर भारी टैरिफ लगाए हुए है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया फंस सकता है टैरिफ रिफंड
आम उपभोक्ताओं को सीधे रिफंड मिलने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि यह साबित करना मुश्किल होगा कि उन्होंने जो ज्यादा कीमत चुकाई वह किस खास टैरिफ की वजह से थी। फिर भी कुछ राजनीतिक नेता इस मुद्दे को उठा रहे हैं। इलिनॉय के गवर्नर जेबी प्रिट्जकर ने कहा है कि उनके राज्य के हर परिवार पर औसतन 1700 डॉलर का बोझ पड़ा है और उन्होंने सरकार से अरबों डॉलर लौटाने की मांग की है। वहीं नेवादा के ट्रेजरर जैक कॉनाइन ने भी अपने राज्य के लिए 2.1 अरब डॉलर की वापसी की मांग की है। कुल मिलाकर, टैरिफ रिफंड का मामला अभी लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंसा रह सकता है और इसमें कई साल लगने की संभावना बताई जा रही है।
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