US Assault Weapons Ban: क्या प्रतिबंध सांविधानिक? सुप्रीम कोर्ट करेगी फैसला; तीन जजों की पीठ में अलग-अलग राय
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने AR-15 और हाई-कैपेसिटी मैगजीन पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कीं। मामले में नौ सदस्यीय पीठ में से तीन कंज़र्वेटिव जजों ने इस फैसले से असहमति जताई। हालांकि जस्टिस कावनॉ ने कहा कि वे अभी इस मामले को लेने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन आने वाले एक-दो कार्यकालों में सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला करेगा।
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सोमवार को अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने बंदूक अधिकारों से जुड़ी दो बड़ी याचिकाएं खारिज कर दीं। ये याचिकाएं असॉल्ट वेपन (जैसे AR-15) और हाई-कैपेसिटी मैगजीन पर राज्य सरकारों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दे रही थीं। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले का कारण नहीं बताया, लेकिन 9 सदस्यीय पीठ में से 3 कंज़र्वेटिव जजों ने इस फैसले से असहमति जताई।
मामले में जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने अलग से लिखा कि AR-15 जैसे हथियारों पर प्रतिबंध शायद संविधान के दूसरे संशोधन का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि मैं यह तय करने के लिए और इंतजार नहीं करूंगा कि सरकार अमेरिका की सबसे लोकप्रिय राइफल पर बैन लगा सकती है या नहीं।
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जल्द सुप्रीम कोर्ट में उठ सकता है ये मामला
हालांकि जस्टिस अलिटो और गोरसच ने भी कहा कि वे मैरीलैंड में लगे असॉल्ट वेपन बैन को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए लेते। वहीं जस्टिस कावनॉ ने कहा कि वे अभी इस मामले को लेने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन आने वाले एक-दो कार्यकालों में सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर फैसला करेगा।
बता दें कि मैरीलैंड का यह कानून 2012 में सैंडी हुक स्कूल शूटिंग के बाद लागू हुआ था, जिसमें एक हमलावर ने AR-15 से 20 बच्चों और 6 वयस्कों की जान ले ली थी। देश के जदस से ज्यादा राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में ऐसे ही कानून लागू हैं, जो AR-15, AK-47 और अन्य सैन्य जैसे हथियारों पर रोक लगाते हैं। इनमें 10 राउंड से ज्यादा गोलियों वाली मैगजीन पर भी पाबंदी है।
एवरी टाउन कानून ने फैसले का किया स्वागत
मामले में गन कंट्रोल समर्थक संगठन एवरी टाउन कानून ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। एवरी टाउन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ऐसे कानून समुदायों को सुरक्षित बनाते हैं। वहीं गन राइट्स समर्थक संगठन सेकंड अमेंडमेंट फाउंडेशन ने कहा कि वे इस तरह के सात और मामलों पर कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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गौरतलब है कि इसी संदर्भ में बीते साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि हथियारों से जुड़े कानूनों की संवैधानिकता तय करते समय अब जजों को पब्लिक सेफ्टी पर नहीं, बल्कि अमेरिका की ऐतिहासिक बंदूक परंपरा पर ध्यान देना होगा। हालांकि इस फैसले के बाद देशभर में कई गन कानूनों को चुनौती दी गई और कुछ को रद्द भी किया गया। लेकिन अब भी निचली अदालतों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि कौन से गन कानून वैध हैं और कौन से नहीं।
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