Supreme Court: पालघर मामले में सुनवाई दो हफ्ते के लिए टली; प्रमाणिक के काफिले पर हमले की नहीं होगी CBI जांच
सुवेंदु अधिकारी की एक नई याचिका पर सुनवाई और विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में वापस भेज दिया है।
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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक के काफिले पर पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में गुरुवार को हमला हुआ था। इस हमले की कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच कराने का आदेश दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सुवेंदु अधिकारी की एक नई याचिका पर सुनवाई और विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को कलकत्ता उच्च न्यायालय में वापस भेज दिया है।
गौरतलब है, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निसिथ प्रमाणिक के काफिले पर पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में गुरुवार को हमला हुआ था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि हमले के पीछे सत्तारूढ़ तृणमूल का हाथ है। साथ ही भाजपा ने कहा कि टीएमसी समर्थकों ने उनके काफिले पर पथराव भी किया।
पालघर लिंचिंग मामले में सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित
सुप्रीम कोर्ट ने पालघर लिंचिंग मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने मामले में सीबीआई को जांच सौंपने पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा था। पालघर में दो साधुओं को मौत के घाट उतार दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील के अनुरोध पर मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। वकील ने पीठ से कहा कि सरकार ने घटना की सीबीआई जांच के लिए सहमति दे दी है लेकिन सरकार के आगे के निर्देशों का इंतजार है इसलिए मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित किया जाए।
छत्तीसगढ़: कोर्ट ने केंद्र को हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) को कोयला ब्लॉक आवंटन और अदाणी एंटरप्राइज लिमिटेड (एईएल) के खनन कार्यों से संबंधित याचिकाओं पर केंद्र को एक व्यापक हलफनामा सौंपने का निर्देश दिया। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि जो कुछ हुआ है, उस पर हम केंद्र सरकार से एक व्यापक बयान चाहते हैं। हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह सभी विषयों की स्थिति बताते हुए व्यापक हलफनामा दाखिल करे। दो सप्ताह के भीतर यह होना चाहिए।
बम धमाकों के आरोपी में जमानत शर्तों में ढील देने का किया अनुरोध
बेंगलुरु में 2008 में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के आरोपी अब्दुल नजीर मौदानी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत की शर्तों में ढील देने का अनुरोध किया, ताकि वह अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए केरल में अपने गृहनगर में रह सके। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक सरकार से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अप्रैल की तारीख तय की।
अब्दुल नजीर मौदानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत से जमानत की शर्तों में ढील देने और उसे केरल में अपने पिता से मिलने जाने की अनुमति देने का आग्रह किया, जो बीमार हैं। वकील सिब्बल ने यह भी बताया कि मौदानी आठ साल से जमानत पर बाहर रहे और जब वह जमानत पर बाहर रहे, उस अवधि के दौरान उन्होंने कुछ भी नहीं किया है।