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Supreme Court: अनुसंधान के 783 मिलियन डॉलर फंड की कटौती का रास्ता साफ, मजबूत होगा ट्रंप का DEI विरोधी अभियान

Fri, 22 Aug 2025 05:21 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 22 Aug 2025 05:21 AM IST
सार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को एनआईएच की 783 मिलियन डॉलर की रिसर्च फंडिंग में कटौती की इजाजत दी है। यह कदम डीईआई नीतियों को सीमित करने की योजना का हिस्सा है। 5-4 के फैसले में कोर्ट ने कई शोध ग्रांट्स रद्द करने की छूट दी, हालांकि भविष्य की फंडिंग गाइडलाइंस पर रोक अब भी बनी हुई है।

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Supreme Court lets Trump admin cut $783 mn of research funding in anti-DEI push News In Hindi
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) की तरफ से 783 मिलियन डॉलर की रिसर्च फंडिंग में कटौती करने की अनुमति दे दी है। यह कटौती ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें वे संघीय स्तर पर विविधता, समानता और समावेशन (डीईआई) से जुड़ी पहल को कम करना चाहते हैं। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला दिया, जबकि मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स और कोर्ट के तीन उदारवादी जज कटौती को रोकने के पक्ष में थे।

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कोर्ट के फैसले से क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के द्वारा सुनाए गए इस फैसले का मतलब है कि ट्रंप प्रशासन कई शोध ग्रांट्स को कैंसिल कर सकता है, हालांकि कोर्ट ने भविष्य में फंडिंग से जुड़ी गाइडलाइंस को फिलहाल रोक रखा है। इस फैसले के खिलाफ मुकदमे में कई राज्यों और सार्वजनिक स्वास्थ्य समूहों का कहना है कि इस कटौती से सार्वजनिक स्वास्थ्य को बहुत बड़ा नुकसान होगा और यह शोधकर्ताओं के करियर और वैज्ञानिक प्रगति को भी नुकसान पहुंचाएगी।

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बता दें कि यह फैसला ट्रंप के लिए सुप्रीम कोर्ट की एक और जीत मानी जा रही है, जिससे प्रशासन को सैकड़ों शोध ग्रांट्स रद्द करने की मंजूरी मिल गई है, जबकि मुकदमा अभी भी चल रहा है। वहीं वादी पक्ष का कहना है कि इन कटौतियों से जनता के स्वास्थ्य और जीवन को भारी नुकसान होगा।

फैसले पर क्या बोला न्याया विभाग? 
वहीं न्याय विभाग का कहना है कि फंडिंग के फैसले पर कोर्ट को दोबारा विचार नहीं करना चाहिए और डीईआई जैसी नीतियां कभी-कभी छुपे हुए रंगभेद को बढ़ावा देती हैं। मामले की सुनवाई में एक डिस्ट्रिक्ट जज विलियम यंग ने कहा कि यह कटौती अचानक और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मैंने सरकार से इस तरह का रंगभेद पहले कभी नहीं देखा। इस दौरान उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमें शर्म नहीं आनी चाहिए। गौरतलब है कि यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है और ट्रंप प्रशासन अन्य कई फंडिंग कटौतियों को भी चुनौती देने की कोशिश कर रहा है।

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मामले में क्या कहा सॉलिसिटर जनरल डी जॉन सॉयर?

इसके साथ ही सॉलिसिटर जनरल डी जॉन सॉयर ने कहा कि इन मामलों को फेडरल क्लेम कोर्ट में जाना चाहिए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कटौती के लिए ऐसा रास्ता साफ किया है। पांच कंजरवेटिव जज इस बात से सहमत हुए, जबकि न्यायाधीश नील गोरसच ने निचली अदालतों की आलोचना की कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रही हैं।

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