पड़ोसी मुल्क की सियासत: पाकिस्तान में अजीबोगरीब राजनीति, संयुक्त राष्ट्र और सेना से दखल की खुलेआम गुहार
विश्लेषकों का कहना है कि ये तमाम घटनाएं पाकिस्तान में बड़ी सियासी उथल-पुथल का संकेत हैं। इनकी वजह से देश में अस्थिरता की भावना गहराती जा रही है।
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पाकिस्तान की राजनीति में असाधारण घटनाएं हो रही हैं। एक तरफ हाल ही में सत्ता से बाहर हुई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पार्टी) ने देश के नए गृह मंत्री के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद में शिकायत दर्ज कराई है, तो दूसरी तरफ पंजाब प्रांत के गवर्नर ने अपने राज्य में ‘संवैधानिक ढांचे पर अमल’ सुनिश्चित करने के लिए सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा से दखल देने की गुहार लगाई है। किसी देश के अंदरूनी मामलों को संयुक्त राष्ट्र के पास ले जाना या सेना से राजनीति मामलों में दखल देने की खुलेआम अपील आम लोकतांत्रिक चलन के खिलाफ समझा जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई की नेता शिरीन मजारी ने संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद की आयुक्त मिशेल बैशलेट को पत्र लिखा है। मजारी इमरान खान सरकार में मानव अधिकार मामलों की मंत्री थीं। मिशेल बैशलेट को लिखे पत्र में उन्होंने राना सनुल्लाह को नया गृह मंत्री बनाए जाने की सूचना देते हुए आरोप लगाया है कि सनुल्लाह ‘आतंकवादी गुटों’ के सहयोगी रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अब एक ‘हत्यारे’ को देश का गृह मंत्री बना दिया गया है। मजारी ने कहा कि सनुल्लाह की नियुक्ति कर प्रधानमंत्री शरीफ ने अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ‘मजहबी कार्ड’ खेला है।
सत्ता पक्ष की तरफ से मजारी के इस पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री मुसादिक मलिक ने देश के मामले में संयुक्त राष्ट्र से अपील करने के पीटीआई के नजरिए पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अमेरिका पर पाकिस्तान में दखल देने की आरोप लगा रही है, उसने संयुक्त राष्ट्र के पास ऐसे दखल के लिए गुहार लगाई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिस समय इमरान खान ने विदेशी दखल के खिलाफ पाकिस्तान के आत्म-सम्मान को अपनी सियासत का प्रमुख मुद्दा बना रखा है, शिरीन मजारी के पत्र से उनके अभियान की धार कमजोर पड़ सकती है।
उधर, पंजाब के गवर्नर उमर सरफराज चीमा ने बुधवार को सेनाध्यक्ष बाजवा को एक पत्र लिखा। उसमें राज्य में जारी राजनीतिक संकट को लेकर चिंता जताई है। साथ ही जनरल बाजवा से उन्होंने अपील की है कि प्रांतीय और संघीय सरकारों में लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए वे ‘अपनी उचित भूमिका’ निभाएं। इसके पहले चीमा ने प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने प्रधानमंत्री की पार्टी- पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) पर पंजाब की प्रांतीय असेंबली में पीटीआई के दलबदलू विधायकों का अनुचित ढंग से समर्थन हासिल करने का आरोप लगाया।
पाकिस्तान में पिछले महीने पीटीआई की संघीय सरकार गिरने के साथ ही पंजाब में भी राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हो गई। चीमा ने दावा किया है कि पंजाब विधानसभा में नियमों का उल्लंघन करते हुए ‘धोखाधड़ी’ के जरिए नए मुख्यमंत्री का चुनाव किया गया। चीमा ने इस निर्वाचन को गैर कानूनी बताया है और संकल्प जताया है कि वे पीएमएल (नवाज) के मुख्यमंत्री को शपथ नहीं दिलाएंगे। चीमा ने शरीफ पर आरोप लगाया है कि वे अपने अधिकारों का असंवैधानिक ढंग से इस्तेमाल कर देश को संकट की तरफ ले जा रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ये तमाम घटनाएं पाकिस्तान में बड़ी सियासी उथल-पुथल का संकेत हैं। इनकी वजह से देश में अस्थिरता की भावना गहराती जा रही है।