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South Africa Gold Mine: अब तक 87 खनिकों की मौत; पुलिस पर असंवेदनशीलता के आरोप, रेस्क्यू के तरीकों पर भड़के लोग

Fri, 17 Jan 2025 02:09 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,स्टिलफोंटेन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,स्टिलफोंटेन Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 17 Jan 2025 02:09 AM IST
सार

दक्षिण अफ्रीका में बंद पड़े सोने की खदान में फंसे खनिकों में 87 लोगों की मौत होने की पुष्टि की गई है। साथ ही मामले में पुलिस और खदान मालिकों पर लापरवाही और असंदेनशीलता के आरोप भी लगाए जा रहे है। 

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Standoff in South Africa ends with Many miners dead, anger over police's 'smoke them out' tactics World News
खदान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दक्षिण अफ्रीका में बंद पड़ी सोने की खदान में फंसे लगभग 2000 खनिकों में अब तक 87 की मौत हो चुकी है। बीते एक महीने से खनिकों को निकालने को लेकर पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच गतिरोध है। हालांकि, अदालती आदेश के दबाव में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसके बाद पुलिस ने बताया कि 78 शव निकाले जा चुके हैं। खदान जोहान्सबर्ग के पास स्टिलफोंटेन शहर में है।
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बचाव कार्य के दौरान 78 शव अब हुए बरामद 
पुलिस ने बचाव कार्य के दौरान 78 शवों को बरामद किया और 246 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों का कहना है कि खनिकों की भूख के कारण मौतें हुईं, लेकिन मौतों के कारणों के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गई है। इस स्थिति में पुलिस और खदान मालिकों को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, खासकर तब जब उन्हें खनिकों की मदद करने के बजाय उनके लिए खाने पीने की चिजों को कम कर दिया गया।
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बता दें कि पिछले साल अधिकारियों ने कहा था कि वे खनिकों की मदद नहीं करेंगे क्योंकि वे अवैध खनन कर रहे थे। इस रवैये की जमकर आलोचना भी हुई थी। असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए स्थानीय सामुदायिक समूहों ने खुद ही बचाव कार्य शुरू किया। इसके बाद एक स्थानीय अदालत ने अधिकारियों को आदेश दिया था कि खदान में फंसे खनिकों को भोजन और पानी मुहैया कराया जाए। गहराते मानवीय संकट के आधार पर पिछले हफ्ते एक अन्य अदालत ने अधिकारियों को बचाव अभियान शुरू करने के सख्त निर्देश दिए।
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पुलिस और खदान मालिकों पर आरोप
मामले में पुलिस और खदान मालिकों पर आरोप है कि उन्होंने खनिकों की मदद के लिए इस्तेमाल होने वाली रस्सियों और आपात मदद वाली सामग्री को नष्ट कर दिया। हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा उन खबरों से लगाया जा सकता है कि खदान  में फंसे खनिकों ने शवों के सड़ने की सूचना भेजी और तत्काल मदद की गुहार लगाई। खनिकों के मुताबिक अगर अधिकारियों की तरफ से समय पर मदद भेजी जाती तो शायद हालात इतने बदतर नहीं होते।

स्थानीय नेता जोहान्स कांकसे का बयान
साथ ही मामले में स्थानीय नेता जोहान्स कांकासे ने कहा कि अगर पुलिस पहले कार्रवाई करती, तो इतनी अधिक मौतें नहीं होतीं। दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी ने राष्ट्रपति से एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। गौरतलब है कि यह खदान दक्षिण अफ्रीका की सबसे गहरी खदानों में से एक है, और यहां के खनिक अलग-अलग समूहों में 2.5 किलोमीटर नीचे काम कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि कुछ खनिक डर के कारण बाहर आने से मना कर रहे थे, जबकि कुछ बेहद कमजोर होकर एम्बुलेंस तक पहुंचे। 

गिरफ्तारी के डर से बाहर नहीं आएं खनिक
पुलिस ने कहा है कि खनिक कई शाफ्टों के माध्यम से बाहर आने में सक्षम थे, लेकिन गिरफ्तार होने के डर से उन्होंने मना कर दिया। खनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों ने इस पर विवाद किया है, जिनका कहना है कि सैकड़ों लोग फंस गए थे और अंधेरे और नम परिस्थितियों में भूखे मर रहे थे उनके चारों ओर सड़ते हुए शव थे।

पुलिस मंत्री का दावा
पुलिस मंत्री ने यह दावा किया कि उन्होंने खनिकों को खाना भेजने की अनुमति दी थी, लेकिन कुछ समूहों का कहना है कि अधिकारी सही तरीके से मदद नहीं कर रहे थे। दक्षिण अफ्रीका में अवैध खनन एक गंभीर समस्या है, और यहां तक कि ऐसे खनिकों को "ज़ामा ज़ामास" कहा जाता है, जो अक्सर आपराधिक गिरोहों का हिस्सा होते हैं।


एक नजर खदान पर
जानकारी के अनुसार यह खदान दक्षिण अफ्रीका की सबसे गहरी खदानों में से एक है। खासतौर पर सुरंगों और स्तरों का एक चक्रव्यूह है तथा इसमें कई शाफ्ट हैं। खनिक अलग-अलग समूहों में 2.5 किलोमीटर (1.5 मील) भूमिगत काम कर रहे थे।
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