फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Sri Lankan government sold half of the gold in its reserves paid for international sovereign bonds

आर्थिक संकट: सोना बेचकर अंतर्राष्ट्रीय साख बचाने में जुटी है श्रीलंका सरकार

Fri, 21 Jan 2022 05:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 21 Jan 2022 05:51 PM IST
सार

श्रीलंका सरकार ने अपने भंडार में मौजूद सोने का आधा हिस्सा बुधवार को बेच दिया। उससे प्राप्त रकम से अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड्स का भुगतान किया जा रहा है। श्रीलंका सरकार के 50 करोड़ डॉलर के बॉन्ड 18 जनवरी को मैच्योर हुए थे...

विज्ञापन
Sri Lankan government sold half of the gold in its reserves paid for international sovereign bonds
श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सीमित विदेशी मुद्रा को कहां खर्च करें, इस बारे में श्रीलंका सरकार ने अर्थशास्त्रियों और कारोबारियों के सुझाव की अनदेखी कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस रुख का देशवासियों पर बहुत खराब असर पड़ रहा है। देश के कारोबारियों के संगठन सिलोन चैंबर ऑफ कॉमर्स और कुछ प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने मांग की थी कि सरकार मैच्योर हुए बॉन्ड्स के भुगतान को फिलहाल रोक दे और विदेशी मुद्रा को वह रोजमर्रा के लिए जरूरी चीजों के आयात पर खर्च करे। लेकिन राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे की सरकार ने कर्ज डिफॉल्ट करने का ये सुझाव नहीं माना।

विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड्स का भुगतान

पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस सुझाव पर सरकार ने कोई प्रतिक्रिया देने की जरूरत भी नहीं समझी। इसके पहले उसने फौरी उपायों के जरिए समस्या टालने की कोशिश की थी, जिससे कोई स्थायी लाभ नहीं हुआ। बीते महीने सरकार ने डॉलर लाने के लिए करेंसी स्वैप (मुद्राओं की अदला-बदली) का सहारा लिया। इससे उसे चीन से डेढ़ बिलियन डॉलर प्राप्त हुए। लेकिन उससे तात्कालिक राहत ही मिली।

विज्ञापन


अब खबर है कि श्रीलंका सरकार ने अपने भंडार में मौजूद सोने का आधा हिस्सा बुधवार को बेच दिया। उससे प्राप्त रकम से अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड्स का भुगतान किया जा रहा है। श्रीलंका सरकार के 50 करोड़ डॉलर के बॉन्ड 18 जनवरी को मैच्योर हुए थे। ताजा खबर से साफ है कि सरकार ने लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने से ज्यादा बॉन्ड खरीदारों के हितों और उनकी निगाह में अपनी छवि की ज्यादा परवाह की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले महीने सरकार ने लाइसेंस प्राप्त कॉमर्शियल बैंकों से कहा था कि वे उन्हें होने वाली मौजूद विदेशी मुद्रा प्राप्तियों के एक चौथाई हिस्से को हर हफ्ते सेंट्रल बैंक को दे दें। संसद में विपक्ष के नेता हर्षा डि सिल्वा ने आरोप लगाया है कि इस कदम से कॉमर्शियल बैंकों में अपना खाता रखने वाले आयातकों की भुगतान क्षमता भी सीमित हो गई है। इस कारण वे भी अब जरूरत के मुताबिक चीजों का आयात नहीं कर पा रहे हैं।

देश में उवर्रकों की भारी कमी

जिन आयातकों पर असर पड़ा है, उनमें प्राकृतिक गैस के सप्लायर भी हैं। देश की दो प्रमुख गैस कंपनियों में से एक लॉगफ्स गैस ने कुछ दिन पहले ये साफ कहा था कि डॉलर की कमी के कारण वह गैस का आयात नहीं कर पा रही है। उधर खाद्य सामग्रियों की उत्पादक एक कंपनी के एक अधिकारी ने टीवी चैनल अल-जजीरा से कहा कि कच्चे माल का आयात ना कर पाने के कारण कंपनी को अपने उत्पादन को आधा करना पड़ा है। अधिकारी ने कहा कि देश में उवर्रकों की भारी कमी है। उसका असर फसलों पर पड़ा है। इस कारण किसान भी इस कंपनी को अनाज की सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं।



मौजूदा हालत का छोटे कारोबार पर भी बहुत खराब असर हुआ है। इस वजह से बाजार में मौजूद हर चीज की कीमत 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है। आलोचकों का कहना है कि इस संकट के बीच सरकार के हालिया कदमों से स्थितियां बदतर हुई हैं। इस कारण विपक्ष के इस आरोप पर अब ज्यादा से ज्यादा लोग भरोसा करने लगे हैं कि राजपक्षे सरकार न सिर्फ संकट को संभालने में अक्षम है, बल्कि उसे आम लोगों की कोई परवाह भी नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed