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Sri Lanka Crisis: 'किसी परिवार को नहीं, संकट में पड़े देश को बचाना लक्ष्य', नए पीएम रानिल विक्रमसिंघे का राजपक्षे कुनबे पर निशाना

Mon, 16 May 2022 09:31 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 16 May 2022 09:31 PM IST
सार

श्रीलंका की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के नेता विक्रमसिंघे ने कहा कि देश में फिलहाल पेट्रोल की जबरदस्त किल्लत है और अब पेट्रोल, कच्चे तेल और तेल के शिपमेंट के खर्च को चुकाने के लिए खुले बाजारों से अमेरिकी डॉलरों को जुटाया जाएगा। 

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Sri Lanka Newly appointed PM Ranil Wickremesinghe says his aim is to save crisis-hit takes jibe on Gotabaya and Mahinda Rajapaksa news in hindi
महिंदा राजपक्षे पर रानिल विक्रमसिंघे का निशाना।

विस्तार

श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने सोमवार को पहली बार राष्ट्र के नाम संबोधन में देश में उभरी समस्याओं पर बात की। राजपक्षे परिवार पर निशाना साधते हुए विक्रमसिंघे ने कहा कि उनका लक्ष्य किसी परिवार या समूह को बचाना नहीं, बल्कि संकट में पड़े देश को संभालना है। गौरतलब है कि हाल ही में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने विपक्ष के दबाव के चलते अपने भाई महिंदा राजपक्षे को पीएम पद से हटा दिया था। हालांकि, उन्होंने अपना पद नहीं छोड़ा और देश के26वें प्रधानमंत्री के तौर पर रानिल विक्रमसिंघे को नियुक्त किया। 
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श्रीलंका की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के नेता विक्रमसिंघे ने कहा कि देश में फिलहाल पेट्रोल की जबरदस्त किल्लत है और अब पेट्रोल, कच्चे तेल और तेल के शिपमेंट के खर्च को चुकाने के लिए खुले बाजारों से अमेरिकी डॉलरों को जुटाया जाएगा। उन्होंने श्रीलंका के संकट पर कहा कि इसे खत्म करने के लिए 2022 के विकास बजट की जगह राहत बजट लाया जाएगा। विक्रमसिंघे ने कहा कि वे श्रीलंका की सरकारी एयरलाइन कंपनी- श्रीलंकन एयरलाइंस के निजीकरण का प्रस्ताव रखेंगे, क्योंकि इससे सरकार को काफी नुकसान हो रहा है। 
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गौरतलब है कि श्रीलंकन एयरलाइंस को 2021 में 45 अरब श्रीलंकाई रुपयों का नुकसान हुआ। 31 मार्च 2022 तक यह नुकसान बढ़कर 372 अरब श्रीलंकाई रुपये तक पहुंच गया। विक्रमसिंघे ने कहा कि अगर हम श्रीलंकाई एयरलाइंस का निजीकरण भी कर दें तो भी हमें काफी नुकसान होगा। इन नुकसानों को श्रीलंका की मासूम जनता को उठाना पड़ेगा, जिन्होंने कभी एक विमान में कदम भी नहीं रखा है। 
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विक्रमसिंघे ने कहा, ‘‘मैं खतरनाक चुनौती ले रहा हूं ....मैंने नुकीले कील वाले जूते पहन रखे हैं , जिन्हें नहीं हटाया जा सकता है....मैं अपने देश की खातिर यह चुनौती स्वीकार कर रहा हू। मेरा लक्ष्य एवं समर्पण किसी व्यक्ति, परिवार या पार्टी को बचाना नहीं है । मेरा उद्देश्य इस देश के सभी लोगों एवं अपनी भावी पीढ़ी के भविष्य को बचाना है।’’

उन्होंने चेतावनी दी कि अगले दो महीने इस वर्तमान आर्थिक संकट में सबसे मुश्किल भरे होंगे। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, ‘‘ अगले एक-दो महीने हमारे जीवन में सबसे कठिन होंगे। हम कुछ कुर्बानियां देने एवं इस काल की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने आप को तैयार करना चाहिए।’’ विक्रमसिंघे ने कहा कि फिलहाल श्रीलंका की अर्थव्यवस्था बहुत जोखिम पूर्ण स्थिति में है और देश को जरूरी सामानों के लिए लगी कतारों में कमी लाने के लिए अगल दो-चार दिनों में 7.5 करोड़ डॉलर हासिल करना होगा।

'श्रीलंका में सिर्फ एक दिन का पेट्रोल भंडार बचा'
उन्होंने कहा, ‘‘ फिलहाल हमारे पास बस एक दिन के लिए पेट्रोल का भंडार है। ’’ उन्होंने कहा कि भारतीय ऋण सुविधा के कारण डीजल की कमी से निपट लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘ कल पहुंचे डीजल के खेप के कारण डीजल की कमी कुछ हद तक हल हेा गयी है। भारतीय ऋण सुविधा से डीजल के दो और खेप 18 मई और एक जून तक पहुंचने वाले हैं। इसके आलवा, पेट्रोल के दो खेपों के 18 एवं 29 मई को आने की संभावना है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ अगले 40 दिनों के लिए में कच्चे तेल एवं भट्ठी तेल श्रीलंका की समुद्री सीमा में खड़े कर लिये गये हैं। हम इन खेपों का भुगतान करने के लिए खुले बाजार से डॉलर जुटाने में लगे हैं। ’’ उन्होंने कहा कि श्रीलंक में बिजली का एक चौथाई हिस्सा तेल से पैदा होती है इसलिए प्रतिदिन बिजली कटौती 15 घंटे तक होगी । उन्होंने कहा, ‘‘ हालांकि हमने इस संकट को टालने के लिए धन पहले ही जुटा लिया है। ’’

'देश में दवाओं और सर्जिकल उपकरणों की भारी कमी'
विक्रमसिंघे ने कहा कि पूरी बैंकिंग प्रणाली डॉलर की कमी से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि अन्य गंभीर चिंता दवाइयों की कमी है। उन्होंने कहा, ‘‘ हृदय संबंधी दवा समेत कई दवाइयों एवं सर्जिकल उपकरण की भारी कमी है। दवाओं, चिकित्सा आपूर्ति एवं मरीजों के लिए भोजन के वास्ते चार महीनों के लिए भुगतान नहीं किये गये हैं। उनके प्रति भुगतान राशि 34 अरब रूपये (श्रीलंकाई) है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अभी हमें और मुश्किल स्थिति का सामना करना होगा। संभावना है कि महंगाई और बढे।’’

आजादी के बाद सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा श्रीलंका
श्रीलंका 1948 में मिली आजादी के बाद से सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है।विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी से ईंधन, रसोई गैस एवं अन्य जरूरी चीजों के लिए लंबी लंबी कतारें लग गयी हैं तथा भारी बिजली कटौती एवं खाने-पीने के बढ़ते दामों ने लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दी हैं।


आर्थिक संकट से श्रीलंका में राजनीतिक संकट पैदा हो गया और प्रभावशाली राजपक्षे की इस्तीफे की मांग होने लगी। राष्ट्रपति गोटबाया ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया लेकिन उन्होंने पिछले सप्ताह नये प्रधानमंत्री एवं युवा मंत्रिमंडल को नियुक्त किया। नयी सरकार राष्ट्रपति के अधिकारों में कटौती के लिए अहम संवैधानिक सुधार पेश करेगी।
 
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