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Sri Lanka Crisis: संकट के बीच अच्छी खबर, अगले महीने से फिलिंग स्टेशनों पर 'ईंधन कोटा योजना' शुरू करेगा श्रीलंका
Sun, 12 Jun 2022 05:45 PM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 12 Jun 2022 05:45 PM IST
सार
श्रीलंका के उर्जा मंत्री ने कहा कि जब तक हम वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, चौबीस घंटे बिजली बहाल करने और ईंधन की स्थिर आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो जाते, हमारे पास फिलिंग स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को एक गारंटीकृति कोटा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है
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अगले महीने एक सप्ताह के ईंधन राशन कोटा की साप्ताहिक गारंटी करेगा श्रीलंका : उर्जा मंत्री कंचना विजेसेकेरा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
श्रीलंका सरकार अगले महीने से "ईंधन राशन योजना" शुरू करने जा रही है जिसके तहत फिलिंग स्टेशनों पर पंजीकृत उपभोक्ताओं को साप्ताहिक कोटा की गारंटी दी जाएगी। एक वरिष्ठ मंत्री ने रविवार को कहा।
फरवरी के मध्य बिजली उत्पादन के डीजल की आपूर्ति पर दबाव पड़ने के कारण श्रीलंकाई लोगों को ईंधन भरने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा था।
अप्रैल के शुरुआत तक बिजली उत्पादन के लिए डीजल और फर्नेस ऑयल की कमी के कारण इस देश में लोगों को दस घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा था।
श्रीलंका सरकार में उर्जा मंत्री कंचना विजेसेकेरा ने रविवार को ट्वीट किया, जब तक हम वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, चौबीस घंटे बिजली बहाल करने और ईंधन की स्थिर आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो जाते, हमारे पास फिलिंग स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को पंजीकृत करने और उन्हें एक गारंटीकृति कोटा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मुझे उम्मीद है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक यह प्रणाली लागू हो जाएगी।"
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उर्जा मंत्री ने कहा कि जब तक चौबीसों घंटें बिजली और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति नहीं हो जाती, तब तक ईंधन की आपूर्ति का प्रबंधन किया जाना चाहिए। इस कमी के कारण ईंधन के भंडार और जमाखोरी की खबरें आई हैं।
विजेसेकेरा ने आशा जताई कि ईंधन कोटा लगाने का यह उपाय संकट को दूर करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रतिबंधों के साथ सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन एक सप्ताह के प्रंबंधन के लिए ईंधन का आयात करता है लेकिन कुछ उपभोक्ता अपनी मशीनरी और जनरेटर के लिए एक महीने या उससे अधिक समय के लिए ईंधन का भंडार करते हैं।
उन्होंने कहा कि चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति में डीजल, फर्नेस ऑयल और नाप्था के लिए अतिरिक्त दस करोड़ डॉलर मासिक खर्च होता है। मंत्री ने कहा, गैस आपूर्ति में कमी ने बिजली और मिट्टी के तेल की मांग में वृद्दि की है, और मासिक ईंधन बिल जो चार महीने पहले 200 मिलियन अमरीकी डॉलर था, अब 550 मिलियन अमरीकी डॉलर है।
इस बीच भारत की ओर से लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत ईंधन शिपमेंट इस महीने के अंत में श्रीलंका पहुंच रहे हैं, भविष्य की आपूर्ति के निर्वाह पर कोई संकेत नहीं है। श्रीलंका भारत की सहायता पर निर्भर है।
श्रीलंका के उर्जा मंत्री ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "हम 16 जून से आईएलसी (इंडियन लाइन ऑफ क्रेडिट) के तहत आखिरी डीजल शिपमेंट और 22 जून को आखिरी पेट्रोल शिपमेंट की उम्मीद कर रहे हैं।"
श्रीलंका की ईंधन खरीद पूरी तरह से आईएलसी पर निर्भर है। विजेसेकेरा ने कहा कि डीजल की न्यूनतम दैनिक जरूरत पांच हजार मीट्रिक टन थी क्योंकि बिजली कटौती के कारण लोगों को निजी जनरेटर चलाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
भारत ने भोजन और चिकित्सा आपूर्ति के अलावा हजारों टन डीजल और पेट्रोल भेजकर कर्ज में डूबे श्रीलंका की मदद की है। आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका को भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक की माचिस जैसी जरूरी वस्तुओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को ईंधन और भोजन के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
श्रीलंकाई रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो गया है। रविवार तक एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 361.07 श्रीलंकाई रुपया हो चुकी है। दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे की तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतें और घटे गैस भंडार ऐसी वजहें हैं जिनकी वजह से यह देश ईंधन आयात करने के लिए संघर्ष कर रहा है।
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फरवरी के मध्य बिजली उत्पादन के डीजल की आपूर्ति पर दबाव पड़ने के कारण श्रीलंकाई लोगों को ईंधन भरने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ा था।
अप्रैल के शुरुआत तक बिजली उत्पादन के लिए डीजल और फर्नेस ऑयल की कमी के कारण इस देश में लोगों को दस घंटे तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा था।
श्रीलंका सरकार में उर्जा मंत्री कंचना विजेसेकेरा ने रविवार को ट्वीट किया, जब तक हम वित्तीय स्थिति को मजबूत करने, चौबीस घंटे बिजली बहाल करने और ईंधन की स्थिर आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो जाते, हमारे पास फिलिंग स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को पंजीकृत करने और उन्हें एक गारंटीकृति कोटा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मुझे उम्मीद है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक यह प्रणाली लागू हो जाएगी।"
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1) Fuel Update - Until we have uninterrupted power supply n steady fuel supply, fuel line management will be impossible. With the Financial restrictions, CPC imports fuel to manage for a week but some consumers collect Fuel for a month or more for their machinery n generators.
— Kanchana Wijesekera (@kanchana_wij) June 12, 2022
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उर्जा मंत्री ने कहा कि जब तक चौबीसों घंटें बिजली और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति नहीं हो जाती, तब तक ईंधन की आपूर्ति का प्रबंधन किया जाना चाहिए। इस कमी के कारण ईंधन के भंडार और जमाखोरी की खबरें आई हैं।
विजेसेकेरा ने आशा जताई कि ईंधन कोटा लगाने का यह उपाय संकट को दूर करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रतिबंधों के साथ सीलोन पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन एक सप्ताह के प्रंबंधन के लिए ईंधन का आयात करता है लेकिन कुछ उपभोक्ता अपनी मशीनरी और जनरेटर के लिए एक महीने या उससे अधिक समय के लिए ईंधन का भंडार करते हैं।
उन्होंने कहा कि चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति में डीजल, फर्नेस ऑयल और नाप्था के लिए अतिरिक्त दस करोड़ डॉलर मासिक खर्च होता है। मंत्री ने कहा, गैस आपूर्ति में कमी ने बिजली और मिट्टी के तेल की मांग में वृद्दि की है, और मासिक ईंधन बिल जो चार महीने पहले 200 मिलियन अमरीकी डॉलर था, अब 550 मिलियन अमरीकी डॉलर है।
इस बीच भारत की ओर से लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत ईंधन शिपमेंट इस महीने के अंत में श्रीलंका पहुंच रहे हैं, भविष्य की आपूर्ति के निर्वाह पर कोई संकेत नहीं है। श्रीलंका भारत की सहायता पर निर्भर है।
श्रीलंका के उर्जा मंत्री ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "हम 16 जून से आईएलसी (इंडियन लाइन ऑफ क्रेडिट) के तहत आखिरी डीजल शिपमेंट और 22 जून को आखिरी पेट्रोल शिपमेंट की उम्मीद कर रहे हैं।"
श्रीलंका की ईंधन खरीद पूरी तरह से आईएलसी पर निर्भर है। विजेसेकेरा ने कहा कि डीजल की न्यूनतम दैनिक जरूरत पांच हजार मीट्रिक टन थी क्योंकि बिजली कटौती के कारण लोगों को निजी जनरेटर चलाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है।
भारत ने भोजन और चिकित्सा आपूर्ति के अलावा हजारों टन डीजल और पेट्रोल भेजकर कर्ज में डूबे श्रीलंका की मदद की है। आर्थिक संकट के चलते श्रीलंका को भोजन, दवा, रसोई गैस और अन्य ईंधन, टॉयलेट पेपर और यहां तक की माचिस जैसी जरूरी वस्तुओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को ईंधन और भोजन के लिए दुकानों के बाहर घंटों इंतजार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
श्रीलंकाई रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो गया है। रविवार तक एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 361.07 श्रीलंकाई रुपया हो चुकी है। दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे की तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतें और घटे गैस भंडार ऐसी वजहें हैं जिनकी वजह से यह देश ईंधन आयात करने के लिए संघर्ष कर रहा है।