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श्रीलंका संकट : राजपक्षे पर पीएम की तरह कार्य करने पर रोक, सिरिसेना बदल सकते हैं संसद भंग का आदेश

Mon, 03 Dec 2018 05:11 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 03 Dec 2018 05:11 PM IST
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Sri Lanka Crisis : Court denies Mahinda Rajpaksa Authority to asc as prime minister
महिंदा राजपक्षे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

श्रीलंका की एक अदालत ने सोमवार को महिंदा राजपक्षे के प्रधानमंत्री के रूप में काम करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट का यह आदेश राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के लिए बड़ा झटका है क्योंकि पूर्व पीएम रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर उन्होंने ही अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी राजपक्षे को पीएम पद की शपथ दिलाई थी।

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अपीलीय अदालत ने राजपक्षे और उनकी सरकार के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी करते हुए राजपक्षे के प्रधानमंत्री, कैबिनेट और उप मंत्रियों के रूप में काम करने पर रोक लगा दी है। यह आदेश राजपक्षे और उनकी सरकार के खिलाफ 122 सांसदों द्वारा याचिका दायर करने के बाद आया है। अदालत इस मामले में 12 और 13 दिसंबर को सुनवाई करेगी। सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद एक वकील ने कहा, अदालत का मानना है कि यदि लोग पीएम और कैबिनेट मंत्रियों के रूप में बैठने के अधिकारी नहीं हैं तो इससे अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है। इस बाबत विक्रमसिंघे ने अदालत में अपील दाखिल की थी।
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यह फैसला अंतरिम सत्तारूढ़ राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और महिंदा राजपक्षे दोनों के लिए ही एक बड़ा झटका है क्योंकि 26 अक्तूबर को सिरीसेना ने ही विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर राजपक्षे को नया पीएम नियुक्त किया था। इसके बाद उन्होंने संसद को भी भंग कर दिया और मध्यावधि चुनाव की घोषणा कर दी। यह सब ऐसे वक्त में हुआ जब मौजूदा सरकार को कार्यकाल पूरा होने में करीब 20 माह का समय बचा था।
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सिरीसेना वापस ले सकते हैं संसद भंग का आदेश

पीएम विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर राजपक्षे को नया पीएम नियुक्त करने और संसद भंग करने के बाद से श्रीलंका में छाए सियासी गतिरोध को रोकने के लिए राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना 225 सदस्यों वाली संसद को बहाल करने का मन बना रहे हैं। उनके करीबी सूत्र का दावा है कि राष्ट्रपति को अपने फैसले पर पछतावा है।

बता दें कि नवनियुक्त पीएम महिंदा राजपक्षे के बहुमत परीक्षण का आंकड़ा यानी 113 वोट हासिल नहीं कर सकने के कारण संसद में उनकी दावेदारी खत्म हो गई है। जबकि उन्होंने अब तक इस्तीफा भी नहीं दिया है। उधर, संसद भंग कर देश में मध्यावधि चुनाव के राष्ट्रपति के आदेश को श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है, जिसके चलते देश में हालात नियंत्रण से बाहर हैं।

सुप्रीम कोर्ट में संसद भंग के आदेश पर सुनवाई भी लंबित है। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति इसलिए भी संसद भंग करने के फैसले पर पुनर्विचार करने को मजबूर हैं क्योंकि सुनवाई शुरू होने पर शीर्ष अदालत में संसद भंग करने के मामले में राष्ट्रपति के आदेश को अवैध करार दे सकती है। संसद का कार्यकाल 2020 तक है, लेकिन संकट के चलते तय समय से दो साल पहले भी यहां चुनाव कराए जा सकते हैं।
 

एक देश में दो पीएम का दावा

अदालत द्वारा राजपक्षे का पीएम के रूप में कामकाज रोकने से पहले तक श्रीलंका में इस पद के लिए दो-दो उम्मीदवार दावा कर रहे थे। हालांकि राजपक्षे को संसद में बहुमत भी हासिल नहीं है। जबकि विक्रमसिंघे का दावा है कि उन्हें बर्खास्त करना अवैध है, क्योंकि उनके पास संसद में अब भी बहुमत है। राजपक्षे का कहना था कि हमारे संविधान के अनुसार संप्रभुता जनता में निहित है, संसद में नहीं, इसलिए मौजूदा संकट का एकमात्र विकल्प आम चुनाव हैं।

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