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Sri Lanka: श्रीलंकाई बौद्ध भिक्षुक को नौ महीने की सजा, इस्लामोफोबिक टिप्पणियां करने का आरोप
Thu, 09 Jan 2025 05:28 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 09 Jan 2025 05:28 PM IST
सार
गैलागोडा अथथे ज्ञानसार 2012 से ही मुस्लिम अल्पसंख्यक विरोधी अभियान चला रहे थे। मार्च 2016 उन पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। आज की सजा उन्हें अदालत में उपस्थित न होने के कारण सुनाई गई थी।
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जेल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : ANI
विस्तार
श्रीलंका के एत कट्टर बौद्ध भिक्षु को कोलंबो मजिस्ट्रेट कोर्ट ने नौ महीने सजा सुनाई है। उनपर 2016 में इस्लामोफोबिक टिप्पणियां करने का आरोप था। बता दें कि इस्लाम के प्रति डर पैदा करने वाले टिप्पणियों को इस्लामोफोबिक टिप्पणी कहते हैं। आरोपी भिक्षु की पहचान 49 वर्षीय गैलागोडा अथथे ज्ञानसार के तौर पर की गई है। कोलंबो के अतिरिक्त मजिस्ट्रेट पासन अमरसेना ने उनपर 1,500 रुपये की जुर्माना लगाया है। पिछले साल मार्च के महीने में हाई कोर्ट ने उन्हें चार साल की कठोर सजा सुनाई थी। इसके पांच महीने बाद ही उन्हें अपील कोर्ट की तरफ से रिहाई मिल गई थी।
बता दें कि गैलागोडा अथथे ज्ञानसार 2012 से ही मुस्लिम अल्पसंख्यक विरोधी अभियान चला रहे थे। मार्च 2016 उन पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। आज की सजा उन्हें अदालत में उपस्थित न होने के कारण सुनाई गई थी। पिछले साल उन्हें मुस्लिम समुदाय से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के बावजूद सजा सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि बोडु बाला सेना (बीबीएस) या बौद्ध शक्ति की ताकतों का नेतृत्व करने वाले ज्ञानसारा ने अपनी टिप्पणियों से धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन पैदा किया था। साल 2018 में अदालत की अवमानना करने के आरोप में ज्ञानसारा को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रपति से माफी मिल गई थी।
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बता दें कि गैलागोडा अथथे ज्ञानसार 2012 से ही मुस्लिम अल्पसंख्यक विरोधी अभियान चला रहे थे। मार्च 2016 उन पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। आज की सजा उन्हें अदालत में उपस्थित न होने के कारण सुनाई गई थी। पिछले साल उन्हें मुस्लिम समुदाय से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के बावजूद सजा सुनाई गई थी। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि बोडु बाला सेना (बीबीएस) या बौद्ध शक्ति की ताकतों का नेतृत्व करने वाले ज्ञानसारा ने अपनी टिप्पणियों से धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन पैदा किया था। साल 2018 में अदालत की अवमानना करने के आरोप में ज्ञानसारा को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रपति से माफी मिल गई थी।
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