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अटकलें: क्या चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में होने वाली है कोई बड़ी सियासी उथल-पुथल?

Thu, 14 Oct 2021 03:40 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 14 Oct 2021 03:40 PM IST
सार

जानकारों का कहना है कि चीन में सत्ता संघर्ष के बारे में फू के पास खास सूचनाएं थीं। एक दौर में अपनी इसी खूबी की वजह से पार्टी में उनका दर्जा बढ़ा। 2013 में शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके प्रति अपनी वफादारी जताने का कोई मौका उन्होंने नहीं गंवाया। लेकिन वे कम्युनिस्ट पार्टी में शी के गुट से नहीं जुड़े हुए थे...

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Speculation made in world media that there is some big political development could happen in china
शी जिनपिंग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

क्या चीन में कोई सियासी भूकंप आने वाला है? ऐसी अटकलें विश्व मीडिया में लगातार लगाई जा रही हैं। दो अक्तूबर को चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के एक दिग्गज अधिकारी को जिस तरह उनके पद से हटाया गया, उससे चीन में जारी सियासी उथल-पुथल का संकेत समझा गया है। चीन के केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग अब पूर्व न्याय मंत्री फू झेंगहुआ के खिलाफ जांच कर रहा है। उन पर पार्टी अनुशासन तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।  

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फू 66 साल के हैं और पार्टी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य रहे हैं। देश की पूरी न्यायपालिका उनकी ही निगरानी में थी। फू की देखरेख में हुई जांच के कारण चीन में आज भी अनगिनत लोग जेल में हैं। अब चूंकि खुद उनके खिलाफ जांच शुरू हो गई है, तो उनके दौर में जो जांच हुई थीं, उनकी वैधता पर भी अब सवाल उठाए जा रहे हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के एक सूत्र ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘यह एक ऐसा मामला है, जिसमें एक व्यक्ति के पास जरूरत से अधिक जानकारी इकट्ठी हो गई। उन्हें बहुत ही निर्मम तरीके से हटा दिया गाय है। अब कुछ भी हो सकता है।’
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फू की देखरेख में जिन लोगों के खिलाफ जांच हुई, उनमें पार्टी की सर्वोच्च संस्था पॉलित ब्यूरो के पूर्व सदस्य झाऊ योंगकांग भी हैं। 2012 तक झाऊ का देश के तमाम न्यायिक और पुलिस संगठनों पर शिकंजा था। झाउ ने इन संगठनों से जानकारी पाने का विशाल तंत्र बना लिया था। इसलिए उनकी हैसियत बहुत बड़ी हो गई थी। दिसंबर 2013 में वे पार्टी के निशाने पर आ गए। इसका आधार फू के नेतृत्व में की गई जांच से ही तैयार हुआ था।

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जानकारों का कहना है कि चीन में सत्ता संघर्ष के बारे में फू के पास खास सूचनाएं थीं। एक दौर में अपनी इसी खूबी की वजह से पार्टी में उनका दर्जा बढ़ा। 2013 में शी जिनपिंग के राष्ट्रपति बनने के बाद उनके प्रति अपनी वफादारी जताने का कोई मौका उन्होंने नहीं गंवाया। लेकिन वे कम्युनिस्ट पार्टी में शी के गुट से नहीं जुड़े हुए थे। इसलिए पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन्हें हमेशा शक की निगाह से देखा जाता था।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक राष्ट्रपति शी के मन में पुलिस संगठनों के प्रति पुराना अविश्वास है। इस बात की मिसाल यह है कि 2017 में शी का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद से तीन पूर्व उप सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों को हिरासत में लिया जा चुका है। उनमें मेंग होंगवेई 2018 में निशाना बने। सुन लिजुन 2020 में जांच के घेरे में आए। अब फू के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

बताया जाता है कि फू की जगह अब चेन यिशिन की नियुक्ति होगी, जिन्हें शी जिनपिंग का करीबी समझा जाता है। फिलहाल वे पार्टी के केंद्रीय राजनीतिक एवं वैधानिक आयोग के महासचिव हैं। ये आयोग न्याय और पुलिस विभागों की निगरानी करता है। चेन का संबंध लंबे समय के कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर शी जिनपिंग गुट से रहा है।

शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति बनने के बाद सत्ता पर अपनी पकड़ लगातार मजबूत की है। इसके बावजूद उनकी कुछ नीतियों से पार्टी में असंतोष की खबरें आती रही हैँ। अक्सर सत्ता को चुनौती सेना या पुलिस से आती है। सेना पर शी का पूरा नियंत्रण बताया जाता है। अब उन्होंने पुलिस संगठनों पर शिकंजा कसने की कोशिश की है। एक पार्टी सूत्र ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘पार्टी के अंदर बहुत से लोग मानते हैं कि अभी कहानी पर परदा नहीं गिरा है। अगर शी पूरी राजनीतिक सुरक्षा की तलाश में हैं, तो ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी। उसका कोई अंत नजर नहीं आता।’

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