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स्पेस वार : अमेरिकी उपग्रह के करीब पहुंचा रूसी यान, हमला करने की तैयारी में है कॉस्मॉस 2542!

Sun, 02 Feb 2020 08:50 AM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, वॉशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Sun, 02 Feb 2020 08:50 AM IST
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Space War Russian spacecraft approaching US satellite, Cosmos 2542 is ready to attack
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

एक चौंका देने वाले घटनाक्रम में रूस का एक अंतरिक्ष यान अपनी राह बदलकर अमेरिकी जासूसी उपग्रह के बिल्कुल करीब पहुंच गया है। धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊंचाई पर दोनों महाशक्तियों के आमने-सामने आने के बाद दुनियाभर के विशेषज्ञ घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि कही ये एक-दूसरे पर हमला न कर दें।

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दरअसल, रूसी यान कॉस्मॉस 2542 काफी पहले से अमेरिकी उपग्रह यूएसए 245 के करीब की कक्षा में ही पृथ्वी के चक्कर लगा रहा था। पर, करीब दस दिनों पहले कॉस्मॉस ने अचानक अपनी कक्षा बदल ली और अमेरिकी उपग्रह के 150 किलोमीटर करीब तक पहुंच गया।

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खुफिया मिशन पर यूएसए 245

अमेरिकी उपग्रह यूएसए 245 अमेरिकी सैन्य संस्था के लिए 2013 से खुफिया अभियान पर है। इस अभियान के तहत दर्जन भर उपग्रह पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं। अमेरिका ने कभी भी इनकी उपस्थिति या काम को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है। बताया जाता है कि ये टोही उपग्रह अत्याधुनिक संचार सुविधाओं से लैस हैं।

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...नहीं पता आगे क्या होगा

पर्ड्यू विश्वविद्यालय से जुड़े उपग्रह विशेषज्ञ माइकल थॉम्पसन इस पूरी घटना पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। वह कहते हैं- ये असाधारण है। हो सकता है कि रूसी यान सिर्फ जासूसी अभियान पर हो। हम कुछ पक्के तौर पर तो नहीं कह सकते, लेकिन ये गतिविधियां काफी संदेहास्पद हैं। किसी को नहीं पता कि आगे क्या होगा।

 

एंटी सैटेलाइट कैपेबिलिटी सिस्टम को तेजी से विकसित कर रहा है रूस


अमेरिका की बढ़ी है चिंता : हकीकत ये है कि रूस ने अमेरिका की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है। इसकी वजह एंटी सैटेलाइट कैपेबिलिटी सिस्टम है, जिसको वह तेजी से विकसित करने में लगा है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार रूस ने हाल में इसका परीक्षण किया था जो पूरी तरह सफल रहा था।

17 मिनट की उड़ान में 1864 मील दूर लक्ष्य ढेर

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट की मानें तो इस एंटी सैटेलाइट मिसाइल ने 17 मिनट की उड़ान के दौरान 1864 मील की दूरी तय की और लक्ष्य को हिट किया। गौरतलब है कि रूस के अलावा चीन और भारत भी इसका परीक्षण कर चुके हैं।

डायरेक्ट एनर्जी वेपन: लेजर किरणों से भी घातक

डायरेक्ट एनर्जी वेपंस लेजर किरणों से भी घातक होती हैं। ये मिसाइल या किसी भी अत्याधुनिक जेट को पलभर में खाक कर सकते हैं। रूस इन्हें और घातक बनाने पर काम कर रहा है।

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