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South Africa: दक्षिण अफ्रीका में निर्माणाधीन मंदिर गिरने से दो लोगों की मौत; मलबे में कई लोग फंसे
Sat, 13 Dec 2025 07:36 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डरबन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डरबन
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 13 Dec 2025 07:36 AM IST
सार
दक्षिण अफ्रीका में एक निर्माणाधीन मंदिर के गिरने से दो लोगों की मौत हो गई है। अभी भी मलबे में कई लोगों को दबे होने की आशंका है। फिलहाल मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए बचाव कार्य चल रहा है।
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दक्षिण अफ्रीका में गिरा निर्माणाधीन मंदिर
- फोटो : फेसबुक/
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विस्तार
दक्षिण अफ्रीका के डरबन के उत्तर में स्थित रेडक्लिफ इलाके में शुक्रवार दोपहर को चार मंजिला मंदिर गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मलबे में कई लोग दबे हैं, जिन्हें बचाने के लिए अभियान चल रहा है। मुश्किल हालात के बीच, मलबे में सावधानी से ड्रिल करके जिंदा लोगों को ढूंढने की कोशिश हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक मजदूर की हादसे में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कंक्रीट का एक ढांचा मंदिर पर डाला जा रहा, जिससे पूरा ढांचा गिर गया और पूरी साइट गिर गई।
मलबे में कई लोग फंसे
मलबे में कितने लोग फंसे हुए हैं, यह जानकारी नहीं मिल सकी है। बचावकर्मी लोगों को बचाने में जुटे हैं। इस बीच, एक 54 साल के व्यक्ति, जो अपने परिवार के साथ मंदिर आए थे, घटना के बारे में सुनने के बाद उन्हें जोरदार कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई। ईथेक्विनी (पहले डरबन) की नगर पालिका ने कहा कि मंदिर बनाने के लिए किसी बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं दी गई है और इसका निर्माण गैर-कानूनी तरीके से हो रहा था।
दो साल पहले शुरू हुआ था मंदिर का निर्माण
अहोबिलम टेम्पल ऑफ प्रोटेक्शन के नाम से मशहूर, इस मंदिर को एक गुफा जैसा बनाया जा रहा था, जिसमें भारत से लाए गए पत्थरों और उस जगह से खोदे गए पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन पत्थरों को पहली मंजिल पर प्लास्टर किया जा रहा था। मंदिर बनाने वाले परिवार ने कहा कि निर्माण का काम लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था और पूरा होने के बाद, इसमें दुनिया की सबसे बड़ी भगवान नरसिंहदेव की मूर्ति होगी।
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मलबे में कई लोग फंसे
मलबे में कितने लोग फंसे हुए हैं, यह जानकारी नहीं मिल सकी है। बचावकर्मी लोगों को बचाने में जुटे हैं। इस बीच, एक 54 साल के व्यक्ति, जो अपने परिवार के साथ मंदिर आए थे, घटना के बारे में सुनने के बाद उन्हें जोरदार कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मौत हो गई। ईथेक्विनी (पहले डरबन) की नगर पालिका ने कहा कि मंदिर बनाने के लिए किसी बिल्डिंग प्लान को मंजूरी नहीं दी गई है और इसका निर्माण गैर-कानूनी तरीके से हो रहा था।
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दो साल पहले शुरू हुआ था मंदिर का निर्माण
अहोबिलम टेम्पल ऑफ प्रोटेक्शन के नाम से मशहूर, इस मंदिर को एक गुफा जैसा बनाया जा रहा था, जिसमें भारत से लाए गए पत्थरों और उस जगह से खोदे गए पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन पत्थरों को पहली मंजिल पर प्लास्टर किया जा रहा था। मंदिर बनाने वाले परिवार ने कहा कि निर्माण का काम लगभग दो साल पहले शुरू हुआ था और पूरा होने के बाद, इसमें दुनिया की सबसे बड़ी भगवान नरसिंहदेव की मूर्ति होगी।
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