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आमने-सामने चीन और अमेरिका: एक छोटे से द्वीपसमूह को लेकर बड़ी ताकतों के बीच क्यों भड़क गया है बड़ा विवाद

Mon, 25 Apr 2022 04:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 25 Apr 2022 04:33 PM IST
सार

ऑस्ट्रेलिया में इस समय चुनाव का माहौल है। वहां 21 मई को संसदीय चुनाव होना है। विपक्ष इस मामले प्रधानमंत्री ने स्कॉट मॉरीसन को घेरने की कोशिश में है। उसने ऑस्ट्रेलिया के बिल्कुल करीब तक चीनी फौज पहुंचने को मॉरीसन सरकार की विदेश नीति की नाकामी बताया है...

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Solomon Islands become a new front of confrontation between the countries of China and the US
चीन-सोलोमन आइलैंड - फोटो : Agency

विस्तार

सात लाख से भी कम आबादी वाला देश- सोलोमोन आइलैंड्स चीन और अमेरिकी खेमे के देशों के बीच टकराव का नया मोर्चा बन गया है। पिछले दो दिन में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने इस मामले में चीन को कड़ी चेतावनी दी है। उधर ये मामला ऑस्ट्रेलिया में चुनावी मुद्दा भी बन गया है।

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पिछले दिनों सोलोमन आइलैंड्स ने चीन के साथ सुरक्षा समझौता करने का एलान किया था। सोलोमन आइलैंड्स प्रशांत महासगर में मौजूद एक द्वीपसमूह है। पिछले साल यहां अचानक दंगे भड़क गए थे। तब चीन ने अपने सुरक्षा बल सोलोमन आइलैंड्स की सरकार की मदद के लिए भेजे थे। तभी से दोनों देशों के बीच निकटता बढ़ने के संकेत मिल रहे थे।

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चीन की सैनिक मौजूदगी बढ़ेगी

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, और न्यूजीलैंड ने कहा है कि चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच हुआ समझौता एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्वतंत्रता और खुलेपन के लिए एक गंभीर खतरा है। इन देशों ने आशंका जताई है कि इस समझौते के कारण इस क्षेत्र में चीन की सैनिक मौजूदगी बढ़ेगी। अमेरिकी खेमे के देशों में ये अंदेशा इतना गहरा है कि पिछले शुक्रवार को अमेरिका ने अपना एक विशेष उत्तरस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सोलोमन आइलैंड्स भेजा। वहां राजधानी होनिआरा में इस दल की प्रधानमंत्री मानासेह सोगावारे से बातचीत हुई।

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पश्चिमी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक अमेरिकी दल ने सोगावारे को इस बारे में कड़ी चेतावनी दी। चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच हुए समझौते के दस्तावेज को गुप्त रखा गया है। लेकिन इस बारे में लीक होकर जो खबरें छपी हैं, उनके मुताबिक इसके तहत ‘कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद के लिए’ चीन को अपने सुरक्षा बल द्वीपसमूह पर भेजने का अधिकार मिल गया है।

ऑस्ट्रेलिया में इस समय चुनाव का माहौल है। वहां 21 मई को संसदीय चुनाव होना है। विपक्ष इस मामले प्रधानमंत्री ने स्कॉट मॉरीसन को घेरने की कोशिश में है। उसने ऑस्ट्रेलिया के बिल्कुल करीब तक चीनी फौज पहुंचने को मॉरीसन सरकार की विदेश नीति की नाकामी बताया है। उधर मॉरीसन ने रविवार को कहा कि सोलोमन आइलैंड्स में चीन ने सैनिक अड्डा बनाया, तो ऑस्ट्रेलिया उसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अपनी इस ‘रेड लाइन’ को लागू करने के लिए वे न्यूजीलैंड और अमेरिका की सरकारों के साथ मिल कर योजना बना रहे हैं।

समझौते को बताया ‘गेम चेंजर’

न्यूजीलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटबरी में चीन विशेषज्ञ एनी-मेरी ब्रैडी ने चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच हुए समझौते को ‘गेम चेंजर’ बताया है। उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी से कहा- ‘इस समझौते का मुख्य निशाना अमेरिका है। इसका मकसद इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी रणनीति का मुकाबला करना है।’

इस बीच चीन ने कहा है कि सामाजिक स्थिरता कायम रखने, टिकाऊ विकास को हासिल करने, और सुरक्षा चिंताओं को दूर करने में वह सोलोमन आइलैंड्स की मदद करना जारी रखेगा। सोगावारे ने पिछले हफ्ते कहा था कि चीन और सोलोमन आइलैंड्स के बीच 2019 में राजनयिक संबंध बनने के बाद से दोनों देशों के आपसी रिश्ते मजबूत होते गए हैं।



लेकिन ब्रैडी ने कहा है- ‘इस समझौते से प्रशांत महासागर में मौजूद द्वीपों की सुरक्षा और स्वायत्तता के लिए खतरा पैदा होगा। साथ ही ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की सुरक्षा के लिए भी यह खतरा है।’ सोलोमन आइलैंड्स ऑस्ट्रेलिया से लगभग 1,300 मील दूर है। ये द्वीपसमूह अमेरिका और एशिया के बीच जहाज मार्ग के बीच एक प्रमुख ठिकाना है।

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