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इस बार फीकी रहेगी चीनी जनवादी गणराज्य की सालगिरह, व्यापार युद्ध, उइगर और हांगकांग हैं वजह
Sun, 18 Aug 2019 11:24 AM IST
शिल्पा ठाकुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिल्पा ठाकुर
Updated Sun, 18 Aug 2019 11:24 AM IST
सार
- चीनी गणराज्य के स्थापना दिवस को हर साल खूब तैयारियों के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार शायद ऐसा ना हो।
- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ये साल बाकी समय के मुकाबले सबसे बुरा है।
- अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध लाख कोशिशों के बाद भी बढ़ता जा रहा है।
- हांगकांग में चीन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में भारी पुलिस बल तैनात करने के बावजूद भी कोई कमी नहीं आ रही है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : PTI
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विस्तार
चीन में 70 के दशक में गृह युद्ध समाप्त हुआ था। जिसमें माओ जेडॉन्ग के साम्यवादी बल ने जीत हासिल की। माओ की सेना ने जनरलसिमो चियांग काई-शेक को हराया था। शेक बाद में ताईवान भाग गया और माओ ने एक अक्तूबर, 1949 को चीनी गणराज्य की स्थापना की घोषणा की। हर साल इसकी सालगिरह को चीन में खूब तैयारियों के साथ मनाया जाता है। लेकिन इस बार शायद ऐसा ना हो।
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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए ये साल बाकी समय के मुकाबले सबसे बुरा है। अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध लाख कोशिशों के बाद भी बढ़ता जा रहा है, हांगकांग में चीन के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में भारी पुलिस बल तैनात करने के बावजूद भी कोई कमी नहीं आ रही है और उइगर मुसलमानों के साथ अमानवीय व्यवहार के कारण चीन की दुनियाभर में बदनामी हो रही है। कभी अपनी लगातार बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाने वाला चीन अब इस मामले में भी पिछड़ता जा रहा है।
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अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के कारण चीन की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान हो रहा है। हालात ये हैं कि अब शी जिनपिंग को चीन में मिलने वाले समर्थन में भी कमी आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये साल शी के लिए काफी मुश्किलों भरा है। कई विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि चीन शायद इस मुसीबत से जल्द निजात पा लेगा।
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बात साल 2017 की है, तब दावोस में शी ने खुद को वैश्वीकरण के चैंपियन के रूप में पेश किया था और चीन को वर्ल्ड लीडर बताया था। ये वो समय था जब डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका का राष्ट्रपति बने कुछ हफ्ते ही हुए थे। तब चीन को ये उम्मीद थी कि उसके सुधार के लिए ट्रंप शायद और दरवाजे खोलेंगे। लेकिन उसकी उन सारी उम्मीदों पर धीरे-धीरे पानी फिरता गया।
विशेषज्ञ कहते हैं कि दावोस 2017 के शी जिनपिंग, जो वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के रक्षक के रूप में विश्व मंच पर उभरे थे, आज अपरिचित से हैं। अक्तूबर 2017 में जब कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में उन्होंने अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया, तब तक शी राज्य में व्यक्तित्व के एक केंद्र के रूप में थे।
शी को उस वक्त चीनी लोगों ने माओ जैसा ही माना था। शी ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया और एक पुनर्जीवित पार्टी के लिए दशकों में सबसे शक्तिशाली चीनी नेता बनने का आह्वान किया। उन्होंने संवैधानिक बदलाव भी किए कि वह जब तक चाहें तब तक शासन कर सकते हैं। लेकिन बावजूद इसके अब उनपर देश का भी दबाव बढ़ता जा रहा है।