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बांग्लादेश कोर्ट का फैसला: शेख हसीना की पार्टी के सात नेताओं को फांसी की सजा, फिलहाल भारत में हैं पूर्व पीएम
Tue, 15 Sep 2026 02:49 PM IST
प्रशांत तिवारी
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Tue, 15 Sep 2026 02:49 PM IST
सार
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने 2024 के छात्र आंदोलनों के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मौत की सजा सुनाई है। हालांकि जिन नेताओं को सजा सुनाई गई है वो बांग्लादेश में नहीं हैं।
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शेख हसीना, बांगालदेश की पूर्व प्रधानमंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-2 ने मंगलवार को प्रतिबंधित अवामी लीग के सात वरिष्ठ नेताओं को मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई। इन नेताओं पर 2024 में छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों, जिन्हें ‘जुलाई विद्रोह’ के नाम से जाना जाता है, के दौरान हिंसा का निर्देश देने, उसे भड़काने या उसे बढ़ावा देने में भूमिका निभाने का आरोप था। तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति मोहम्मद नजरुल इस्लाम चौधरी ने सातों के खिलाफ फैसला सुनाया। सभी आरोपियों पर मुकदमा उनकी गैरमौजूदगी में चला।
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बड़े नेताओं पर चला मुकदमा
मौत की सजा पाने वालों में अवामी लीग के महासचिव और पूर्व सड़क परिवहन मंत्री ओबैदुल कादेर, संयुक्त महासचिव एएफएम बहाउद्दीन नसीम और पूर्व सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मोहम्मद अली अराफात शामिल हैं। इनके अलावा जुबो लीग के अध्यक्ष शेख फजले शम्स परश, महासचिव मैनुल हुसैन खान निखिल, बांग्लादेश छात्र लीग के अध्यक्ष साद्दाम हुसैन और महासचिव शेख वली आसिफ एनान को भी मौत की सजा सुनाई गई है। ट्रिब्यूनल के फैसले के दौरान सातों आरोपियों की ओर से सरकार द्वारा नियुक्त बचाव पक्ष के वकील मौजूद थे। यह मामला 2024 के उन प्रदर्शनों से जुड़ा है, जिनके करीब 10 महीने बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई गई थी।
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सात आरोप, फरवरी से शुरू हुआ था ट्रायल
ट्रिब्यूनल ने 22 जनवरी को सातों आरोपियों के खिलाफ सात आरोप तय किए थे और 17 फरवरी से मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई थी। ICT-2 ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा का निर्देश देने और उसे भड़काने में उनकी कथित भूमिका की जांच की। इन प्रदर्शनों ने अंततः 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि आरोपियों ने प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए निर्देश जारी किए, भड़काऊ और उकसाने वाले बयान दिए तथा ऐसी बैठकों में हिस्सा लिया, जिनमें हिंसा की योजनाओं पर चर्चा की गई। उन पर हथियारबंद हमलों, व्यापक दमन और अलग-अलग स्थानों पर मीडिया को नियंत्रित करने की कोशिशों में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया, जिससे हत्या, हत्या के प्रयास और देशभर में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई।
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हसीना भारत में, पहले भी सुनाई गई मौत की सजा
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत चली गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। नवंबर 2025 में ट्रिब्यूनल ने हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों पर कार्रवाई के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई थी। ट्रिब्यूनल ने हसीना को ‘सुपीरियर कमांड रिस्पॉन्सिबिलिटी’ के सिद्धांत के तहत दोषी ठहराया और माना कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय के अनुमान के मुताबिक, 15 जुलाई से 5 अगस्त 2024 के बीच प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में 1,400 तक लोग मारे गए थे।
हसीना की सजा पर उठे थे सवाल
हसीना को सुनाई गई मौत की सजा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी। कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने मुकदमे की निष्पक्षता और अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि मुकदमे और सजा से न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ। ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंता जताई थी। संगठन ने खास तौर पर इस बात पर सवाल उठाया था कि हसीना को अपनी पसंद के वकील के जरिए अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं मिला। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना हसीना सरकार ने 2010 में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए मानवता के खिलाफ अपराधों की सुनवाई के लिए की थी। हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने ट्रिब्यूनल के कानून में संशोधन किए, जिनमें राजनीतिक दलों और उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार भी शामिल था।
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अवामी लीग नेताओं पर देशभर में दर्ज हैं मामले
हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद अवामी लीग के नेताओं, मंत्रियों, सांसदों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पूरे बांग्लादेश में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई मामलों में अभी सुनवाई शुरू नहीं हुई है। इस बीच हसीना ने पिछले महीने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के लिए दृढ़ हैं और देश को ‘सही रास्ते’ पर लाना चाहती हैं। उन्होंने कहा था कि जेल जाने या मौत की सजा के खतरे से भी वह पीछे नहीं हटेंगी। नई दिल्ली में आयोजित केवल ऑडियो माध्यम से हुई एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह बात कही थी। यह भारत आने के बाद मीडिया से उनकी पहली सार्वजनिक बातचीत थी। कार्यक्रम में मौजूद लोग हसीना को देख नहीं सके और केवल उनकी आवाज सुनाई दी।