बांग्लादेश में संसदीय चुनावों से पहले हिंसा की आशंका के चलते हजारों सुरक्षा बल तैनात
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बांग्लादेश में आगामी 30 दिसंबर को होने जा रहे संसदीय चुनाव को ध्यान में रखते हुए सोमवार को पूरे देश में हजारों सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई। यह तैनाती चुनाव के दौरान हिंसा होने की आशंका के चलते की गई है।
चुनाव आयोग ने 13 दिसंबर को घोषणा की थी कि 11वें संसदीय चुनाव के दौरान सुरक्षा के लिए सेना तैनात की जाएगी और दो जनवरी तक इसकी तैनाती रहेगी। आयोग के संयुक्त सचिव फरहाद अहमद खान ने कहा कि देश के 270 निर्वाचन क्षेत्रों के 389 इलाकों में सशस्त्र बलों की लगभग 400-450 प्लाटून तैनात की गई हैं।
ढाका ट्रिब्यून ने खबर दी कि सेना 389 विशेष क्षेत्रों में और नौसेना 18 विशेष क्षेत्रों में काम करेगी। साथ ही सेना छह निर्वाचन क्षेत्रों के 845 मतदान केंद्रों पर इस्तेमाल होने वाली ईवीएम के परिचालन का काम भी देखेगी। चुनाव आयुक्त रफीक उल इस्लाम ने कहा कि सशस्त्र बलों की तैनाती राजनीतिक दलों और लोगों का डर दूर करने के लिए की गई है।
बता दें कि बांग्लादेश में चुनाव को लेकर काफी तनाव का माहौल है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, 17 दिसंबर तक विपक्ष के कम से कम 26 उम्मीदवारों के काफिले पर हमला किया गया है और 13 विपक्षी प्रत्याशी जख्मी हुए हैं। दो को गिरफ्तार किया गया है और 875 विपक्षी समर्थक घायल हुए हैं।
कट्टर इस्लामी दल को मिली चुनाव लड़ने की इजाजत
बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग ने आगामी 30 दिसंबर को होने वाले आम चुनावों में भाग लेने के लिए कट्टरपंथी इस्लामी दल जमात-ए-इस्लामी को इजाजत दे दी है। यह दल सजायाफ्ता और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया एवं विपक्षी दल बीएनपी का महत्वपूर्ण साझीदार है। निर्वाचन आयोग ने दो महीने पहले जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण रद्द कर दिया था। जमात संसदीय चुनावों में 25 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी और उसके उम्मीदवार बीएनपी के चुनाव चिन्ह का ही इस्तेमाल करेंगे। चुनाव आयोग ने यह फैसला उच्च न्यायालय के इस सप्ताह आए एक निर्णय के बाद लिया।
यूएन ने हिंसा पर जताई चिंता
बांग्लादेश में अगले हफ्ते होने वाले आम चुनाव से पहले, संयुक्त राष्ट्र ने चुनावी हिंसा और विपक्षी पार्टियों के सदस्यों की गिरफ्तारी पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से समावेशी और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने का आग्रह किया। संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा बलों से भी आग्रह किया कि वे सभी प्रत्याशियों द्वारा प्रचार के लिए स्वतंत्र और निर्बाध वातावरण सुनिश्चित करें।