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अमेरिका : स्कूल बन गए राजनीति का अखाड़ा, 2010 के टी पार्टी आंदोलन से हो रही तुलना

Wed, 08 Sep 2021 11:29 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 08 Sep 2021 11:29 PM IST
सार

कंजरवेटिव समूहों ने अमेरिका में स्कूल केंद्रित संगठन बना लिए हैं। उनमें नो लेफ्ट टर्न इन एजुएकेशन, पैरेंट्स राइट्स इन एजुकेशन, मॉम्स फॉर लिबर्टी जैसे संगठन शामिल हैं। ऐसे कम से कम 165 संगठन बन गए हैं। इनका मकसद स्कूलों में पढ़ाई को प्रभावित करना है।
 

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School has become the arena of politics in America, being compared with the Tea Party movement of 2010
सांकेतिक चित्र - फोटो : social media

विस्तार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो 'संस्कृति युद्ध' (कल्चर वॉर) छेड़ा था, उसके केंद्रीय स्थल अब देश के स्कूल बन रहे हैं। कंजरवेटिव कार्यकर्ताओं ने स्थानीय शिक्षा नीति को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। इस आंदोलन की तुलना 2009-10 में देश में चले ‘टी-पार्टी’ आंदोलन से की जा रही है। फिलहाल इस आंदोलन ने तीन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया है। ये हैं- स्कूलों को फिर खोलना, वहां मास्क पहनने की अनिवार्यता का विरोध और वहां अमेरिकी इतिहास को किस तरह पढ़ाया जाए। इस बीच कंजरवेटिव नेताओं ने अपने समर्थकों से कहा है कि वे स्कूल बोर्डों के चुनाव में हिस्सा लें, ताकि वहां के पाठ्यक्रम को वे प्रभावित कर सकें।

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टीवी चैनल एनबीसी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस आंदोलन का प्रभाव सभी स्तरों के स्कूलों पर देखा जा रहा है। रिपब्लिकन शासन वाले राज्यों में विधायिका ने पाठ्यक्रम में क्या शामिल किया जाए और क्या नहीं, इस बारे में हाल में कानून पारित किए हैं। इसी तरह रिपब्लिकन गवर्नरों ने स्कूलों में मास्क पहनने की अनिवार्यता को एक बड़ा मुद्दा बना रखा है। इस मसले पर कई जगहों पर स्कूल बोर्डों की बैठक में हिंसा भी हुई है।
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अमेरिका में शिक्षा क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसी हालत इसके पहले कभी नहीं देखी। शिक्षकों के संगठन अमेरिकन फेडरेशन ऑफ टीचर्स की अध्यक्ष रेंडी वेइंगार्टन ने एनबीसी से कहा- 'पहले बच्चे विवादों से दूर रहते थे। कई मसलों पर तनाव होता था। लेकिन बच्चों को उनसे दूर रखा जाता था। अब आधुनिक इतिहास को लेकर जो लड़ाई छिड़ी है, उसमें बच्चे ही युद्ध का मैदान बन गए हैं।’
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पिछले महीने पेनसिल्वेनिया राज्य के नॉर्थम्पटन काउंटी में एक स्कूल बोर्ड के चुनाव के दौरान रिपब्लिकन उम्मीदवार ने वादा किया कि वे जीते तो स्कूलों को अपने माफिक झुकाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो इसके लिए वे '20 शक्तिशाली लोगों' की सहायता लेंगे। मिशिगन राज्य में पहले रिपब्लिकन पार्टी के नेता रह चुके जेफ टिमर ने कहा है कि वे सबसे ज्यादा चिंतित स्कूलों में फैलाए जा रहे उग्रवाद को लेकर हैं। उन्होंने पेनसिल्वेनिया की घटना का जिक्र करते हुए एनबीसी से कहा- 'अगर ऐसे लोग स्कूल बोर्ड में चुन लिए गए, तो वे पाठ्यक्रम तय करना शुरू कर देंगे। उसका दीर्घकालिक असर होगा।'

खबरों के मुताबिक कंजरवेटिव समूहों ने देश भर में स्कूल केंद्रित संगठन बना लिए हैं। उनमें नो लेफ्ट टर्न इन एजुएकेशन, पैरेंट्स राइट्स इन एजुकेशन, मॉम्स फॉर लिबर्टी जैसे संगठन शामिल हैं। एनबीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश भर में ऐसे कम से कम 165 संगठन बन गए हैं, जिनका मकसद स्कूलों में पढ़ाई को प्रभावित करना है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे संगठनों को बनाने की शुरुआत क्रिटिकल रेस थ्योरी के लेकर छिड़े विवाद के दौरान हुई। इस सिद्धांत के तहत अमेरिका में मौजूद नस्लवाद के इतिहास और उसके विभिन्न रूपों को पढ़ाया जाता है। ट्रंप ने इस सिद्धांत को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए मुहिम छेड़ी थी।


सरकारी स्कूलों से जुड़े लोगों का कहना है कि कंजरवेटिव समूह सरकारी स्कूलों की साख खत्म करने में जुटे हुए हैँ। वे प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा देना चाहते हैं, जहां कोर्स खुद स्कूल तय करते हैँ। हालांकि इस मुद्दे पर इन संगठन के बीच मतभेद भी है। कुछ संगठन सभी स्कूलों में एक जैसे पाठ्यक्रम की पढ़ाई चाहते हैँ। लेकिन उसे श्वेत वर्चस्व के एजेंडे के मुताबिक कोर्स को ढालना चाहते हैं।

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