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Saudi: सऊदी अरब में मौत की सजा का नया रिकॉर्ड, नशे के मामलों में बढ़ी फांसी, मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता
Mon, 07 Jul 2025 05:27 PM IST
हिमांशु चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Mon, 07 Jul 2025 05:27 PM IST
सार
Saudi Arab: सऊदी अरब में पिछले साल मौत की सजा का रिकॉर्ड टूटा, जहां 345 लोगों को फांसी दी गई। इस साल छह महीने में ही 180 लोगों को मौत की सजा मिल चुकी है। इनमें से ज्यादातर नशे से जुड़े गैर-हिंसक मामलों में दी गई हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। विदेशी नागरिकों पर भी सख्त कार्रवाई हो रही है।
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फांसी का फंदा
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
सऊदी अरब में मौत की सजा को लेकर पूरी दुनिया में चिंता बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि पिछले साल सऊदी अरब में रिकॉर्ड संख्या में लोगों को फांसी दी गई। इनमें ज्यादातर मामलों में नशे से जुड़े अपराध शामिल थे, जो जानलेवा नहीं थे। सऊदी सरकार की तरफ से इस पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन मानवाधिकार समूह इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बता रहे हैं।
एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में सऊदी अरब में कुल 345 लोगों को मौत की सजा दी गई, जो पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा है। वहीं, इस साल के पहले छह महीने में ही 180 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। अगर यही रफ्तार रही तो 2024 में भी नया रिकॉर्ड बन सकता है।
नशे से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा मौत की सजा
एक और मानवाधिकार संगठन 'रीप्राइव' के अनुसार, इस साल सऊदी अरब में करीब दो-तिहाई फांसियां नशे से जुड़े मामलों में दी गई हैं। ये ऐसे अपराध थे, जिनमें किसी की जान नहीं गई थी। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने भी यही चिंता जताई है कि गैर-हिंसक अपराधों में इतनी सख्त सजा देना गलत है।
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विदेशी नागरिकों पर ज्यादा गिरी गाज
एमनेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में नशे के मामलों में मौत की सजा पाने वालों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक हैं। इनमें से कई लोगों को न तो अपनी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी थी और न ही उन्हें वकील मिला। अकेले इस साल सऊदी में जितने लोगों को फांसी दी गई, उनमें से आधे से ज्यादा विदेशी नागरिक थे।
ये भी पढ़ें: अदालत में पेश नहीं हुए तो भी चलेगा मुकदमा, हसीना और उनके परिवार पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
जबरन फंसाया गया मछुआरा
ऐसा ही एक मामला मिस्र के रहने वाले एस्साम अहमद का है। 2021 में वह एक मछली पकड़ने वाली नाव पर काम कर रहा था। परिवार के मुताबिक, नाव के मालिक ने उसे बंदूक दिखाकर जबरन नशे से जुड़ा सामान ले जाने को मजबूर किया। बाद में उसे सऊदी में पकड़ लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। उसका परिवार अब हर दिन डर के साए में जी रहा है।
'विजन 2030' की आड़ में सख्ती
सऊदी अरब में 'विजन 2030' के तहत बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। महिलाओं को गाड़ी चलाने की आजादी, विदेशी निवेश बढ़ाने जैसी कोशिशें हो रही हैं। लेकिन दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, कारोबारी वर्ग और अन्य लोगों पर सख्ती बढ़ गई है। 2021 में सरकार ने नशे के मामलों में मौत की सजा पर रोक लगाने का ऐलान किया था, लेकिन तीन साल के अंदर ही यह रोक बिना किसी वजह हटा दी गई।
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान में बाढ़ और बारिश ने मचाई तबाही, 10 दिन में 72 की मौत, ये इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित
बदल सकती है सजा नीति
मानवाधिकार कार्यकर्ता जीद बसयौनी का मानना है कि अगर सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान चाहें तो इस नीति में तुरंत बदलाव आ सकता है। वह आम माफी दे सकते हैं या कानून में सुधार कर सकते हैं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। बसयौनी ने कहा कि सऊदी अरब में दिखावटी सुधारों के पीछे असल में एक सख्त और डर का माहौल बना हुआ है, जिसे बदलना जरूरी है।
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एक अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में सऊदी अरब में कुल 345 लोगों को मौत की सजा दी गई, जो पिछले 30 साल में सबसे ज्यादा है। वहीं, इस साल के पहले छह महीने में ही 180 लोगों को फांसी दी जा चुकी है। अगर यही रफ्तार रही तो 2024 में भी नया रिकॉर्ड बन सकता है।
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नशे से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा मौत की सजा
एक और मानवाधिकार संगठन 'रीप्राइव' के अनुसार, इस साल सऊदी अरब में करीब दो-तिहाई फांसियां नशे से जुड़े मामलों में दी गई हैं। ये ऐसे अपराध थे, जिनमें किसी की जान नहीं गई थी। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने भी यही चिंता जताई है कि गैर-हिंसक अपराधों में इतनी सख्त सजा देना गलत है।
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विदेशी नागरिकों पर ज्यादा गिरी गाज
एमनेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में नशे के मामलों में मौत की सजा पाने वालों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक हैं। इनमें से कई लोगों को न तो अपनी कानूनी प्रक्रिया की जानकारी थी और न ही उन्हें वकील मिला। अकेले इस साल सऊदी में जितने लोगों को फांसी दी गई, उनमें से आधे से ज्यादा विदेशी नागरिक थे।
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जबरन फंसाया गया मछुआरा
ऐसा ही एक मामला मिस्र के रहने वाले एस्साम अहमद का है। 2021 में वह एक मछली पकड़ने वाली नाव पर काम कर रहा था। परिवार के मुताबिक, नाव के मालिक ने उसे बंदूक दिखाकर जबरन नशे से जुड़ा सामान ले जाने को मजबूर किया। बाद में उसे सऊदी में पकड़ लिया गया और मौत की सजा सुनाई गई। उसका परिवार अब हर दिन डर के साए में जी रहा है।
'विजन 2030' की आड़ में सख्ती
सऊदी अरब में 'विजन 2030' के तहत बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। महिलाओं को गाड़ी चलाने की आजादी, विदेशी निवेश बढ़ाने जैसी कोशिशें हो रही हैं। लेकिन दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, कारोबारी वर्ग और अन्य लोगों पर सख्ती बढ़ गई है। 2021 में सरकार ने नशे के मामलों में मौत की सजा पर रोक लगाने का ऐलान किया था, लेकिन तीन साल के अंदर ही यह रोक बिना किसी वजह हटा दी गई।
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बदल सकती है सजा नीति
मानवाधिकार कार्यकर्ता जीद बसयौनी का मानना है कि अगर सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान चाहें तो इस नीति में तुरंत बदलाव आ सकता है। वह आम माफी दे सकते हैं या कानून में सुधार कर सकते हैं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया। बसयौनी ने कहा कि सऊदी अरब में दिखावटी सुधारों के पीछे असल में एक सख्त और डर का माहौल बना हुआ है, जिसे बदलना जरूरी है।