नव-उदारवादी सुधार: कंपनियों और निवेश को लुभाने की सऊदी अरब की मुहिम बनेगी यूएई की चिंता?
प्रिंस सलमान ने कुछ समय पहले ‘विज़न 2030’ नाम का दस्तावेज जारी किया था। उसका मकसद कच्चे तेल पर सऊदी अरब की निर्भरता घटाना बताया गया है। इस उद्देश्य के लिए सऊदी अरब ने नव-उदारवादी सुधार लागू करने का फैसला किया है। विदेशी कंपनियों को लुभाने के लिए सऊदी सरकार ने कई आकर्षक प्रस्ताव रखे हैं...
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सऊदी अरब ने 44 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को अपना क्षेत्रीय मुख्यालय में रियाद में खोलने की इजाजत दे दी है। बताया जाता है कि उसके इस कदम से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से उसकी प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक सऊदी अरब ने विदेशी पूंजी और प्रतिभाओं को आकर्षित करने की मुहिम शुरू की है। इसके लिए वह अपना उदार चेहरा पेश करने की कोशिश में है।
युवराज सलमान का दिमाग
सऊदी अरब ने अब जिन कंपनियों को अपनी राजधानी में क्षेत्रीय मुख्यालय खोलने की इजाजत दी है, उनमें सैमसंग, डिलॉयट, यूनिलीवर, बेकर ह्यूज, और सिमंस शामिल हैं। सऊदी सरकार के मुताबिक उसके इस फैसले से 18 अरब डॉलर की रकम सऊदी अर्थव्यवस्था में आएगी। उससे 2030 तक लगभग 30 हजार नौकरियां पैदा होंगी। बताया जाता है कि सऊदी युवराज सलमान इस पूरी पहल का नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रिंस सलमान ने कुछ समय पहले ‘विज़न 2030’ नाम का दस्तावेज जारी किया था। उसका मकसद कच्चे तेल पर सऊदी अरब की निर्भरता घटाना बताया गया है। इस उद्देश्य के लिए सऊदी अरब ने नव-उदारवादी सुधार लागू करने का फैसला किया है। विदेशी कंपनियों को लुभाने के लिए सऊदी सरकार ने कई आकर्षक प्रस्ताव रखे हैं। लेकिन उसने इसके साथ 2023 तक की समयसीमा रखी है। उसने कहा है कि इस समय तक जो कंपनियां नहीं आएंगी, वे उसके आकर्षक प्रस्तावों के लाभ से वंचित रह जाएंगी।
जानकारों का कहना है कि इस सऊदी पहल से यूएई के साथ सऊदी अरब की होड़ शुरू होगी। अब तक इस इलाके में यूएई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पसंदीदा देश रहा है। अब सऊदी अरब उन कंपनियों को यूएई से अपने यहां बुलाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि सऊदी सरकार का कहना है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए वह यूएई के साथ किसी प्रतिस्पर्धा में शामिल नहीं है।
रेगिस्तान में दावोस सम्मेलन!
सऊदी निवेश मंत्री खालिद अल-फलीह ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘हम मानते हैं कि सऊदी अरब के विकास के साथ पश्चिम एशिया में सभी देशों को फूलना-फलना चाहिए। विजन 2030 के साथ सऊदी अरब का विकास होगा, तो उसका फायदा पूरे इलाके में पहुंचेगा।’ उन्होंने कहा कि सऊदी अरब में रहने वाले विदेशी लोग बेहतर जीवन स्तर के साथ यहां रहें, इसे सुनिश्चित करने का सऊदी सरकार भरसक प्रयास कर रही है।
लेकिन वरिष्ठ भू-राजनीति विशेषज्ञ रेयन बोल के मुताबिक इस सऊदी कोशिश से यूएई के साथ उसकी होड़ तेज होना तय है। उन्होंने निक्कई एशिया से कहा- ‘अभी सऊदी अरब को ऐसा वातावरण बनाने में वर्षों लगेंगे, जिससे एशियाई और अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियां यूएई से वहां अपने मुख्यालय ले जाएं। इस बीच यूएई की सरकार भी श्रम बाजार का और उदारीकरण कर सकती है, जिससे वहां रहना सऊदी अरब की तुलना में और सुविधाजनक हो जाएगा।’
हाल में रियाद में फ्यूचर इनिशिएटिव इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन हुआ। उसे दावोस इन डेजर्ट (रेगिस्तान में दावोस सम्मेलन) बताया गया। वहां बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय निवेशक पहुंचे। लेकिन उनमें से ज्यादातर इस बारे में कुछ कहने को तैयार नहीं थे कि क्या उनकी कंपनी अपने क्षेत्रीय मुख्यालय को यूएई से सऊदी अरब लाएगी। जापान के नोमुरा असेट मैनेजमेंट कंपनी के सीईओ तारिक फदलाल्लाह ने कहा- ‘खाडी क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। यह कई दफ्तर बने रह सकते हैं।’