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Russia-US: यूक्रेन शांति वार्ता के बीच रूस-अमेरिका की ऊर्जा कूटनीति तेज, सखालिन-1 परियोजना पर हुई चर्चा
Tue, 26 Aug 2025 10:30 PM IST
राहुल कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 26 Aug 2025 10:30 PM IST
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : पीटीआई
यूक्रेन में शांति स्थापित करने के प्रयासों को लेकर अमेरिका और रूस के अधिकारी कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। अहम बात यह है कि ये बैठकें सिर्फ शांति प्रयासों तक ही सीमित नहीं है। इनमें दोनों देशों के बीच ऊर्जा सौदों को लेकर भी मंथन जारी है। यही नहीं, रूस की तरफ से अपनी एनएनजी परियोजनाओं के लिए अमेरिकी उपकरण खरीदने की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है।
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रूस-अमेरिका के बीच चल रही वार्ता से अवगत पांच सूत्रों ने बताया कि क्रेमलिन के समक्ष इन सौदों की पेशकश यूक्रेन जंग रोकने पर राजी होने के प्रोत्साहन के तौर पर रखी गई है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से प्रतिबंधों में ढील देने का भरोसा भी दिलाया जा रहा है। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस अपने ऊर्जा क्षेत्र में अधिकांश अंतरराष्ट्रीय निवेश और प्रमुख सौदों से कट गया है।
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तीन सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों ने एक्सॉन मोबिल के रूस की सखालिन-1 तेल एवं गैस परियोजना में फिर से प्रवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। रूस के अपनी आर्कटिक एलएनजी-2 जैसी परियोजनाओं के लिए अमेरिकी उपकरण खरीदने पर भी बात हो रही है, जिसे अभी पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों ने बताया कि ये वार्ताएं इस माह के शुरू में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की मास्को यात्रा के दौरान हुईं, जब वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके निवेश दूत किरिल दिमित्रिव से भी मिले थे।
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हालांकि, व्हाइट हाउस अधिकारियों ने इन सौदों के बारे में पूछे गए सवालों पर कोई जवाब देने से इन्कार कर दिया। लेकिन जिस तरह अमेरिका-रूस के अधिकारियों की बैठकें द्विपक्षीय मुद्दों पर केंद्रित होती जा रही हैं, उसे ट्रंप की चीन को अलग-थलग करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। एक सूत्र ने कहा कि बीजिंग और मॉस्को के बीच संबंधों को कमजोर करने की व्यापक रणनीति के तहत रूस को चीनी तकनीक के बजाय अमेरिकी तकनीक खरीदने के लिए प्रेरित करना चाहता है। गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में सेना भेजने से कुछ दिन पहले चीन-रूस के बीच असीमित रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी।