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यूक्रेन में युद्ध: 30 देशों ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन और उच्चाधिकारियों पर लगाए प्रतिबंध, जब्त होंगी प्रॉपर्टी, सफर भी नहीं कर सकेंगे
Sat, 26 Feb 2022 09:25 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 26 Feb 2022 09:25 AM IST
सार
अमेरिकी राजकोष विभाग ने शुक्रवार देर रात पुतिन और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का एलान किया। इससे पहले रूसी सुरक्षा परिषद के 11 सदस्यों सत्तारूढ़ नेताओं और रईसों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला किए जाने के बाद यूरोपीय देशों के संघ- ईयू ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने का एलान किया है। अब इन प्रतिबंधों में अमेरिका ने भी ईयू का साथ दिया है। बताया गया है कि अमेरिका समेत अब तक कुल 30 देश रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके उच्चाधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने आगे आ चुके हैं। इन प्रतिबंधों से रूस को आगे आर्थिक और कूटनीतिक तौर पर बड़ा नुकसान होने की संभावना है।
अमेरिकी राजकोष विभाग ने शुक्रवार देर रात पुतिन और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का एलान किया। इससे पहले रूसी सुरक्षा परिषद के 11 सदस्यों सत्तारूढ़ नेताओं और रईसों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
कौन-कौन से देश लगा चुके हैं राष्ट्रपति पुतिन समेत रूसी नेताओं पर प्रतिबंध?
अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों के एलान के बाद अब तक कुल 30 देश पुतिन और रूसी व्यापारियों-रईसों के खिलाफ प्रतिबंध लगा चुके हैं। इनमें यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सभी 27 सदस्य देश- ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, साइप्रस, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्वीडन शामिल हैं। इसके अलावा ब्रिटेन और कनाडा दो और देश हैं, जिन्होंने रूस और पुतिन पर प्रतिबंध लगाए हैं।
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पुतिन और उच्चाधिकारियों पर क्या प्रतिबंध लागू होंगे?
अमेरिका और ईयू की तरफ से जो प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनके तहत पुतिन और उनके अफसरों की अमेरिका, ईयू, ब्रिटेन और कनाडा में स्थापित संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा। अमेरिका में तो प्रतिबंधित लिस्ट में शामिल लोगों के सफर करने तक पर भी बैन होगा। गौरतलब है कि पश्चिमी देशों की तरफ से अब तक इस तरह के कदम नहीं लिए गए थे। हालांकि, रूस ने इन प्रतिबंधों के बावजूद कहा है कि उसे पहले ही इन कदमों की उम्मीद थी।
ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म 'स्विफ्ट' से हटाने की मांग उठाई
इससे पहले नाटो गठबंधन में शामिल देश के नेताओं के बीच हुई बैठक को संबोधित करते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा था कि उनकी सरकार, शीत युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था को पलटने के लिए “खोई हुई जमीन वापस पाने के वास्ते चलाये जा रहे अभियान पर” रूस के नेताओं के विरुद्ध निजी तौर पर पाबंदी लगाएगी। जॉनसन ने रूस को ‘स्विफ्ट’ भुगतान मंच से हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का भी आह्वान किया ताकि रूसी सरकार को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके।
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अमेरिकी राजकोष विभाग ने शुक्रवार देर रात पुतिन और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का एलान किया। इससे पहले रूसी सुरक्षा परिषद के 11 सदस्यों सत्तारूढ़ नेताओं और रईसों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं।
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कौन-कौन से देश लगा चुके हैं राष्ट्रपति पुतिन समेत रूसी नेताओं पर प्रतिबंध?
अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों के एलान के बाद अब तक कुल 30 देश पुतिन और रूसी व्यापारियों-रईसों के खिलाफ प्रतिबंध लगा चुके हैं। इनमें यूरोपियन यूनियन (ईयू) के सभी 27 सदस्य देश- ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, साइप्रस, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पुर्तगाल, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, बुल्गारिया, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्वीडन शामिल हैं। इसके अलावा ब्रिटेन और कनाडा दो और देश हैं, जिन्होंने रूस और पुतिन पर प्रतिबंध लगाए हैं।
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पुतिन और उच्चाधिकारियों पर क्या प्रतिबंध लागू होंगे?
अमेरिका और ईयू की तरफ से जो प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनके तहत पुतिन और उनके अफसरों की अमेरिका, ईयू, ब्रिटेन और कनाडा में स्थापित संपत्ति को जब्त कर लिया जाएगा। अमेरिका में तो प्रतिबंधित लिस्ट में शामिल लोगों के सफर करने तक पर भी बैन होगा। गौरतलब है कि पश्चिमी देशों की तरफ से अब तक इस तरह के कदम नहीं लिए गए थे। हालांकि, रूस ने इन प्रतिबंधों के बावजूद कहा है कि उसे पहले ही इन कदमों की उम्मीद थी।
ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म 'स्विफ्ट' से हटाने की मांग उठाई
इससे पहले नाटो गठबंधन में शामिल देश के नेताओं के बीच हुई बैठक को संबोधित करते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा था कि उनकी सरकार, शीत युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था को पलटने के लिए “खोई हुई जमीन वापस पाने के वास्ते चलाये जा रहे अभियान पर” रूस के नेताओं के विरुद्ध निजी तौर पर पाबंदी लगाएगी। जॉनसन ने रूस को ‘स्विफ्ट’ भुगतान मंच से हटाने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का भी आह्वान किया ताकि रूसी सरकार को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जा सके।
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