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कुरील द्वीपों पर एसईजेड बनाने का फैसला: रूस और जापान में और बढ़ा टकराव

Tue, 07 Sep 2021 06:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, टोक्यो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Sep 2021 06:13 PM IST
सार

कुरील द्वीपसमूह किसका है, इसे लेकर रूस और जापान के बीच विवाद दशकों से चल रहा है। 1940 के दशक से दोनों देश इस मुद्दे पर तकनीकी रूप से युद्ध की अवस्था में हैं। फिलहाल ये द्वीप रूस के नियंत्रण में हैं। लेकिन जापान का दावा है कि मूल रूप से ये द्वीप उसके हैं...

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Russia Decision to build SEZ on the Kuril Islands, start conflict between Russia and Japan
जापान कुरील द्वीप समूह - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कुरील द्वीपों को लेकर जापान और रूस में टकराव और बढ़ गया है। रूस ने इन द्वीपों पर नई विकास योजनाएं लागू करने की घोषणा हाल में की हैं। जापान ने चेतावनी दी है कि रूस के इस कदम से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध और बिगड़ सकते हैँ।

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कुरील द्वीपसमूह किसका है, इसे लेकर रूस और जापान के बीच विवाद दशकों से चल रहा है। 1940 के दशक से दोनों देश इस मुद्दे पर तकनीकी रूप से युद्ध की अवस्था में हैं। फिलहाल ये द्वीप रूस के नियंत्रण में हैं। लेकिन जापान का दावा है कि मूल रूप से ये द्वीप उसके हैं।
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रूस ने पिछले दिनों प्रशांत महासागर में मौजूद इस द्वीप समूह में निवेश आकर्षित करने और वहां के निवासियों के लिए रोजगार पैदा करने की योजना का एलान किया था। इस पर जापान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। जापानी मंत्रिमंडल के महासचिव कातसुनोबो कातो ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि रूस की ये योजना अतीत में दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि समझौतों में यह साफ प्रावधान है कि दोनों देश कुरील द्वीप समूह के बारे में यथास्थिति बनाए रखेंगे।  
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कातो ने कहा कि रूस ने कुरील द्वीपों पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) बनाने की घोषणा की है। लेकिन ऐसा इन द्वीपों के बारे में जापान के रुख की अनदेखी करते हुए किया गया है। कातो ने कहा कि रूस समझौतों का उल्लंघन करते हुए कुरील द्वीपों पर आर्थिक गतिविधियां शुरू नहीं कर सकता।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ्ते रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादीवोस्तोक में कुरील द्वीपों के लिए एक अभूतपूर्व योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि जो कारोबारी और उद्यमी कुरील द्वीपों में जाकर निवेश करेंगे, उन्हें दस साल तक टैक्स से पूरी छूट दी जाएगी। पुतिन ने कहा कि इस योजना का लाभ सिर्फ रूसी कारोबारी ही नहीं, बल्कि विदेशी कंपनियां भी उठा सकेंगी। उन्होंने कहा कि जापान की कंपनियां भी चाहें, तो वहां आकर निवेश कर सकती हैं। पुतिन ने कहा कि कंपनियां कुरील द्वीपों में जाकर कारोबार शुरू कर सकती हैं और ऐसा करते हुए टैक्स छूट का लाभ पाने की अपनी योग्यता का दावा कर सकती हैं।

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जापान में पुतिन की इन बातों को इस बात का संकेत माना गया है कि रूस सरकार कुरील द्वीपों में जल्द ही नई आर्थिक गतिविधियां शुरू कर देगा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक कुरील द्वीपों को लेकर विवाद दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के साथ ही खड़ा हो गया था, जब दोनों देशों ने इन द्वीपों पर अपना दावा जताया। उसके बाद दोनों देशों में कई बार शांति वार्ता हुई, लेकिन इन द्वीपों का मसला कभी नहीं सुलझ सका।

योशिहिदे सुगा ने पिछले साल जापान का प्रधानमंत्री बनने के बाद कुरील द्वीपों का विवाद हल करने का इरादा जताया था। वेबसाइट रशिया टुडे के मुताबिक सुगा के बयान से रूस में ये उम्मीद जगी थी कि ये विवाद जल्द ही हल हो जाएगा। लेकिन दोनों देशों में कोई समझौता नहीं हो सका। इस बीच रूस ने इस मामले में अपना रुख सख्त कर दिया है।

पिछले साल रूस की संसद ड्यूमा में एक संवैधानिक संशोधन को पारित किया गया था, जिसमें कुरील द्वीपों को रूस का संप्रभु क्षेत्र घोषित किया गया। उसी संशोधन में यह प्रावधान भी कर दिया गया कि रूस की कोई सरकार देश के संप्रभु क्षेत्र के बारे में किसी अन्य देश से कोई समझौता नहीं कर सकती। पिछले हफ्ते व्लादीवोस्तोक में दिए अपने भाषण के दौरान इन द्वीपों पर जापान के दावे को ‘बकवास’ करार दिया था।

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